रावण के रिश्तेदार! सतना के इस स्थान पर दशहरे पर नहीं जलाया जाता लंकेश, जानिए क्यों करते हैं इनकी पूजा?

Dussehra 2024: दशहरा उत्सव पूरे देश में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था. इस तरह सत्य की असत्य पर जीत हुई थी। पूरे देश में इस दिन रावण का पुतला दहन किया जाता है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी एक ऐसा शहर भी है, जहां रावण को जलाया नहीं जाता बल्कि रावण की पूजा की जाती है। मध्यप्रदेश के सतना में रावण को जलाया नहीं जाता बल्कि पूजा जाता है। आखिर ऐसा क्यों और क्या है इसके पीछे की वजह आइए जानते हैं।

जिले के कोठी कस्बे में थाना परिसर के अंदर रावण की प्रतिमा स्थापित है। प्रति वर्ष दशहरा के अवसर पर ग्रामीण रावण की पूजा करते हैं। कोठी के रहने वाले मिश्रा परिवार पिछले 45 सालों से लंकापति रावण की पूजा करते चले आ रहे हैं।

worship of Ravana in Satna

इतना ही नहीं ये लोग रावण को अपना रिश्तेदार मानते हैं। पुराणों में किए गए उल्लेख के अनुसार रावण महाज्ञानी और पंडित था, जिसकी वजह से कई जगहों पर रावण को पूजा जाता है। रमेश मिश्रा के मुताबिक वह सभी उनके दशानन के वंशज हैं, इसलिए वह रावण की पूजा अर्चना करते चले आ रहे हैं।

इसके अलावा भी गांव के काफी लोग रावण की इस पूजा में शामिल होते हैं, गांव के लोगों का कहना है रावण सबसे ज्ञानी था, जिन्होंने ब्रम्हा, विष्णु, महेश तीनों देवताओं को अपनी तपस्या से प्रसन्न किया था, जिसे वेद पुराण का ज्ञान था, उन्हीं के लिए भगवान राम की लीला रची गई और रावण का अंत किया गया है।

पुजारी रमेश मिश्रा के अनुसार 15 वर्ष पहले जब नए थाना भवन का निर्माण होना था तब उन्हें रात में स्वप्न आया कि कोई प्रतिमा तोड़ रहा है। सुबह वे पहुंचे तो जेसीबी लगी थी। जेसीबी ड्राइवर ने रावण की प्रतिमा पर प्रहार किया तो वहां एक सांप निकल आया। ऑपरेटर काम छोड़ कर हट गया, मजदूरों में भी भगदड़ मच गई। बाद में थाना भवन का निर्माण स्थल परिवर्तित कर दिया गया था।

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