यूपी: इस आशंका के चलते 300 सालों से भाइयों ने बहनों से नहीं बंधवाई राखी, जानिए क्या है बड़ी वजह

संभल, 21 अगस्त: 22 अगस्त, दिन रविवार को देश भर में धूमधाम से रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा। रक्षाबंधन के लिए बहने अपनी तैयारियों में जुटी हुई हैं। तो वहीं, हम आपको उत्तर प्रदेश के एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां भाई अपनी बहनों से राखी नहीं बंधवाते। क्योंकि, उन्हें लगता है कि उनकी बहन राखी के एवज में मिलने वाले उपहार में जायदाद न मांग लें। यहीं वजह है कि यहां पिछले 300 सालों से ज्यादा समय से राखी नहीं मनाई जाती।

festival of Rakshabandhan was not celebrated for the last 300 years in Bainipur Chak village of Sambhal

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    Raksha Bandhan 2021: यंहा 300 Year से बहनों ने भाइयों को नहीं बांधी राखी, ये है वजह |वनइंडिया हिंदी

    जी हां..ये बात आपकों सुनने में थोड़ी अजीब जरूर लगेगी, लेकिन यह सच है। दरअसल, यह गांव संभल जिले का बैनीपुर चक है। यूं तो बैनीपुर चक गांव श्रीवंशगोपाल तीर्थ के कारण प्रसिद्ध है लेकिन गांव की एक और मान्यता इसे अलग बनाती है। यहां राखी नहीं मनाई जाती। इसके पीछे की मान्यता के बारे में गांव के 75 वर्षीय सौदान सिंह व रघुनाथ सिंह बताते हैं कि उनके पूर्वज अलीगढ़ में अतरौली के सेमरई गांव के जमींदार थे। उनके परिवार में कोई बेटी नहीं थी। इस कारण वो गांव की ही बेटियों से राखी बंधवाने लगे।

    बताते हैं कि राखी पर एक बेटी ने राखी बांधकर उपहार में परिवार की जमींदारी मांग ली। परिवार ने भी राखी का मान रखा और गांव की जमींदारी उस बहन को सौंपकर गांव छोड़ दिया फिर संभल के बैनीपुर चक में आकर बस गए। तभी यादवों के मेहर व बकिया गोत्र के लोग राखी नहीं मनाते। हालांकि बहनें चाहती हैं कि वह भाइयों की कलाई पर राखी बांधें लेकिन दशकों की परंपरा का निर्वहन करते हुए वे भाइयों की कलाई पर राखी नहीं बांधतीं। गांव की बबीता और कुलदीप सिंह ने बताया कि मेहर व बकिया गोत्र के कुछ यादव परिवार गांव महोरा, बरवाली मढ़ैया, कटौनी व बहजोई क्षेत्र के गांव अजीमाबाद व चाटन में भी रहते हैं, जो राखी नहीं बंधवाते हैं।

    अनहोनी से डर से भी कोई नहीं बंधवाता राखी
    गुन्नौर तहसील क्षेत्र के गांव सैमला गुन्नौर, हदूदा, मखदूमपुर व टिगरूआ गांव में यादव जाति में ओढ़ा गोत्र के लोग रहते हैं। बुजुर्ग बताते हैं कि दशकों पहले एक बहने से भाई को राखी बांधी थी। इससे भाई की मौत हो गई थी। उसके करीब दो दशक बाद फिर से राखी की परंपरा को शुरू किया गया, लेकिन एक बड़े हादसे में कई लोगों की जान गई थी। लगातार हादसे होने के कारण यहां के लोग किसी प्रकार की अनहोनी होने के डर से राखी का पर्व नहीं मनाते हैं।

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