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Sagar: फरार बेटे को 17 साल ​​तक खुद छिपाए था पिता, खोजने सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया

सागर के आगासौद में अपने बेटे को छेड़छाड़ के मामले में पुलिस से बचाने के लिए पिता उसे ​उज्जैन में छिपाए रखा। इधर पिता ही बेटे की तलाश के लिए सागर से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। एसआईटी ने बेटे को उज्जैन से गिरफ्तार कर

अपराधी बेटे को छिपाकर 17 साल खुद कोर्ट में याचिका लगाता रहा

पुत्र से प्रेम कहें, पुत्र मोह कहें या पुलिस की मार का डर कहें... छेड़खानी के आरोप में फरार एक बेटे को उसका पिता बीते 17 साल से ​दुनिया से छिपाकर रखे रहा। वह जब-तब अपने घर आने वाली पुलिस की ​दबिश और पूछताछ से बचने के लिए खुद ही कोर्ट की शरण में चला गया। हैरत मानिए वह सागर से लेकर हाईकोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया कि उसके बेटे का पता लगाया जाए। जब 17 साल बाद बेटे का सुराग मिला तो पता चला कि पिता उसके लगातार संपर्क में था और उसी ने दूसरे की आईडी, नाम पर उज्जैन में छिपा रखा था।

अपराधी बेटे को छिपाकर 17 साल खुद कोर्ट में याचिका लगाता रहा

छेड़छाड़ के एक मामले से हाईप्रोफाइल हुए इस केस की कहानी वर्ष 2005 में शुरु हुई। जानकारी के अनुसार यहां रहने वाले युवक मनोज प्रजापति ने एक लड़की से छेड़छाड़ कर दी। इसके बाद वह गायब हो गया। इधर पुलिस इस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए उसके घर समेत अन्य ठिकानों के चक्कर लगाने लगी। दूसरी ओर बार-बार पुलिस की इस आमद से त्रस्त आकर आरोपी युवक मनोज के पिता उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस थाने में दर्ज करा दी, लेकिन पुलिस साल में दो-एक बार इस युवक की पूछताछ करने उसके घर पहुंच ही जाती। तब पिता ने इस मामले में हाईकोर्ट की शरण ली और वहां कहा कि मेरे बेटे को या तो अज्ञात लोगों ने मार दिया है या बंधक बना लिया है। उसकी खोजबीन की जाए। वहां से यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। जहां से सुप्रीम कोर्ट ने मप्र पुलिस को निर्देश दिए कि वह इस युवक की खोजबीन के लिए आईजी के नेतृत्व में एक एसआईटी गठित करे और तीन महीने में अपनी रिपोर्ट दे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एसआईटी गठित कर तलाश शुरु की गई
सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने और मनोज प्रजापति को तलाशने के आदेश के बाद सागर पुलिस ने एक एसआईटी का गठन किया था। पुलिस ने मनोज के पिता का मोबाइल नंबर कॉल ट्रेस पर डाल दिया। आखिर में जब सच्चाई सामने आती तो सब अवाक रह गए। दरअसल यह पिता ही अपने बेटे को कानून की मार से बचाने के लिए एक-दो नहीं, पूरे 17 साल तक छिपाए हुए था। पुलिस ने फरार मनोज को उज्जैन उसके बीच होने वाली कॉलिंग के जरिए दबोच लिया।

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