ब्लड बैंक ब्लंडर: थैलेसीमिया पीड़ित को O+ की जगह O- ब्लड की थैली दे दी
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की ब्लंडर व बड़ी लापरवाही सामने आई है, जिसमें स्टॉफ ने थैलेसीमिया ग्रसित बच्चे को गलत ब्लड थमा दिया। हालांकि बीएमसी के नर्सिंग स्टाफ की समझदारी के चलते ब्लड बच्चे को नहीं चढ़ाया गया। मामले का खुलासा ब्लड की थैली और पर्चे पर लिखी डिटेल का मिलान करने पर हुआ। जिसमें पता चला कि थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चे को ओ पॉजिटिव ब्लड ग्रुप की जरूरत थी और उसे ओ नेगेटिव ब्लड ग्रुप की थैली थमा दी गई। इसके बाद जब मरीज के परिजन मामले की शिकायत लेकर ब्लड बैंक पहुंचे तो तत्काल स्टाफ ने थैली बदल दी। इतना ही नहीं बीएमसी के नर्सिंग स्टाफ की समझदारी से न सिर्फ थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चे की जान बची, बल्कि जिस मरीज के ब्लड से थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चे के ब्लड की अदला-बदली हुई थी, आनन-फानन में उसे भी ब्लड चढ़ने से रोका गया और बाद में सही ब्लड ग्रुप की थैली दी गई।

जानकारी के अनुसार 15 वर्षीय पुष्पेंद्र सिंह को बचपन से थैलेसीमिया नाम की बीमारी है। जिसमें उसे हर दो से तीन माह में ब्लड की आवश्यकता होती है। पुष्पेंद्र को उनके परिजनों ने 13 जून को ब्लड चढ़वाने के लिए बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया। जहां से ब्लड सैंपल के साथ उसकी रिपोर्ट जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में भेजी गई। पुष्पेंद्र का ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव था, इसलिए उसे ओ पॉजिटिव ब्लड ग्रुप दिया जाना था, लेकिन जब परिजन ब्लड की थैली लेकर बीएमसी पहुंचे तो उस पर ओ नेगेटिव ब्लड ग्रुप लिखा था, वहीं बैच नंबर से लेकर सारी जानकारी क्रॉस मैच पर्चे से अलग थी, जिसके बाद नर्सिंग स्टाफ ने ब्लड चढ़ाने से मना कर दिया और परिजनों को वापस ब्लड बैंक भेजा।
जिला अस्पताल के एचडीयू में भर्ती महिला को भी पहुंचा गलत ब्लड
परिजन जब ब्लड की थैली लेकर ब्लड बैंक पहुंचे तो यहां मौजूद स्टाफ गड़बड़ी देखकर हक्का-बक्का रह गया। इसके बाद पता चला कि बच्चे की ब्लड की थैली जिला अस्पताल के एचडीयू में भर्ती महिला की थैली से बदल गई है। जिसके बाद तत्काल स्टाफ से एक कर्मचारी एचडीयू पहुंचा और महिला को ब्लड चढ़ाने से रोक दिया। फिर आनन-फानन में दोनों मरीजों के ब्लड की थैली बदलकर उन्हें सही ब्लड ग्रुप दिया गया।
साल 2019 में हुई थी महिला की मौत
ब्लड ग्रुप बदलकर देने का यह कोई पहला मामला नहीं है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में पहले भी ऐसी गड़बड़ियां सामने आ चुकी हैं। वर्ष 2019 में एक प्रसूता को सीजर के बाद गलत ग्रुप का ब्लड चढ़ाने से उसकी मौत हो गई थी। मामले की जांच में सामने आया कि महिला का ब्लड ग्रुप ओ पॉजीटिव था, लेकिन उसे बी पॉजीटिव ग्रुप का ब्लड चढ़ाया गया। इसके बाद भी ब्लड ग्रुप की गड़बड़ी के कई मामले सामने आ चुके हैं।
मामले की जांच कराऊंगी
यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। स्टाफ से पूछताछ करने पर पता चला कि बीएमसी में भर्ती मरीज के परिजन जल्दबाजी में गलत ब्लड ग्रुप की थैली लेकर चले गए। बाद में उन्हें फोन करके बुलाया था, जिसके बाद उन्हें सही ब्लड ग्रुप दिया गया। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है, इसकी जांच कराई जाएगी। यदि स्टाफ की गलती सामने आई तो उन पर कार्रवाई करूंगी।
- डॉ. ज्योति चौहान, सिविल सर्जन जिला अस्पताल












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