'मिनिस्टर इन वेटिंग' क्या होते हैं, PM के आने पर क्यों नियुक्त किए जाते हैं कैबिनेट मंत्री, पढ़िए खबर
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जब भी देश के किसी हिस्से में जाते हैं तो वहां पर प्रदेश सरकार 'मिनिस्टर इन वेटिंग' नियुक्त करती है। इसमें सामान्यत: कैबिनेट मंत्री होते हैं। बहुत कम लोगों को ही इसका मतलब समझ आता है या इस व्यवस्था और परंपरा के बारे में जानते हैं। सामान्य व्यक्ति मिनिस्टर इन वेटिंग का अर्थ नहीं जानता है। आईए हम आपको बताते हैं क्या है यह प्रोटोकाल?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 अगस्त शनिवार को बुंदेलखंड के दौरे पर आ रहे हैं। उनके लिए राज्य सरकार ने तीन मंत्रियों को मिनिस्टर इन वेटिंग नामांकित किया है। प्रशासन द्वारा जानकारी साझा किए जाने के बाद अधिकांश लोगों के जेहन में यह सवाल रहा है कि मिनिस्टर इन वेटिंग का क्या मतलब हुआ, नामित किए गए मंत्री क्या काम करेंगे? बता दें कि देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान हवाई अड्डे, हेलिपेड पर राज्य सरकार मंत्रियों की नियुक्ति करती है। यह सरकार और मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि होते हैं।
ऐसे समझे 'मिनिस्टर इन वेटिंग'
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राष्ट्र अध्यक्ष के दौरे और कार्यक्रमों के लिए राज्य सरकारें सीनियर मंत्रियों को उनके स्वागत और विदाई के लिए नामित करती हैं। वरिष्ठ मंत्री राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं, ये एक निर्धारित प्रोटोकॉल भी है।
PM Modi के लिए शनिवार को यह तीन मंत्री मिनिस्टर इन वेटिंग नामित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 12 अगस्त को खजुराहो और सागर आएंगे। राज्य शासन ने तीन मंत्रियों को मिनिस्टर इन वेटिंग नामित किया है। इनमें खनिज संसाधन एवं श्रम मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह को खजुराहो एयरपोर्ट, वन मंत्री विजय शाह को बड़तूमा, सागर में भूमि पूजन स्थल और लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव को ढाना सागर सभा स्थल के लिए मिनिस्टर इन वेटिंग नामित किया गया है। इस संबंध में राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा परिपत्र जारी किया हैं।












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