रिटायर्ड शिक्षक लोकनाथ मिश्र ने बनाए दो रिकॉर्ड, इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज

मप्र सागर के एक रिटायर्ड शिक्षक व साहित्यकार ने अनूठी अमात्रिक शिव वंदना लिखी है। इसमें कहीं भी एक भी मात्रा का उपयोग नहीं किया गया। इसी प्रकार उन्होंने नारियल के खोल से छतरपुर के प्रसिद्ध बागेश्वरधाम में विराजे हनुमानजी महाराज की हूबहू प्रतिमा बनाई है। इन उपलब्धि के लिए उनका नाम इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दो दफा दर्ज किया गया है।

लोकनाथ मिश्र का इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज

सागर के बड़ा बाजार में मोहन नगर वार्ड निवासी व सीआर मॉडल स्कूल से रिटायर्ड शिक्षक, लेखक व सहित्यकार लोकनाथ मिश्र 'मीत' ने इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में एक हफ्ते में दो दफा अपना नाम दर्ज कराकर उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने अमात्रिक शिव वंदना लिखी है। अपने आप में अनूठी इस शिव वंदना में कहीं भी एक भी मात्रा का उपयोग नहीं किया गया है। इसी प्रकार लोकनाथ मिश्र ने अपनी रचनात्मक कला के माध्यम से नारियल के खोल से हनुमानजी की प्रतिमा बनाई हैं इसके लिए उनके नाम दो रिकॉर्ड कायम किए गए हैं।

धीरेंद्र शास्त्री को भेंट करेंगे हनुमानजी की प्रतिमा

लोकनाथ मिश्र का इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज

डॉ. लोकनाथ मिश्र ने बताया कि रिटायर्डमेंट के बाद वे साहित्य लेखन का कार्य करते हैंं। पूर्व में भी उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे नए-नए आइडियाज पर काम करते रहते हैं। इसी कारण उन्होंने नारियल के खोल से बागेश्वरधाम के हनुमानजी महाराज की प्रतिमा बनाई है। ये हूबहू बागेश्वर बालाजी की प्रतिमा जैसी है। इसे वे पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री को भेंट करेंगे।

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