मुख्यमंत्री रुपाणी के होमटाउन से किसे उतारेगी कांग्रेस-भाजपा, PM मोदी ने यहीं से लड़ा था पहला चुनाव

Gujarat News in Hindi, राजकोट। सौराष्ट्र के मुख्य शहर और मुख्यमंत्री रुपाणी के होमटाउन राजकोट को भाजपा का गढ़ माना जाता है। खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी अपना पहला चुनाव यहां से लड़कर उस समय मुख्यमंत्री बने थे। आगामी लोकसभा चुनाव में भी बनारस के अलावा यहां से भी उनके चुनाव लड़े जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, यदि इस बार मोदी यहां से पर्चा नहीं भरते हैं तो वर्तमान सांसद मोहन कुंडारिया का फिर से उतरना तय है।

कांग्रेस पाटीदार उम्मीदवार ही खड़ा करना चाहती है

कांग्रेस पाटीदार उम्मीदवार ही खड़ा करना चाहती है

गुजरात भाजपा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अगर किसी वजह से कुंडारिया रिपीट नहीं होते हैं तो नगर निगम वित्त बोर्ड (Municipal Finance Board) के चेयरमेन धनसुख भंडेरी को मौका मिल सकता है। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस भी राजकोट में पाटीदार वोटर्स को देखते हुए कोई पाटीदार उम्मीदवार ही खड़ा करना चाहती है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस द्वारा पाटीदारों की सबसे बड़ी संस्था खोड़लधाम के प्रमुख नरेश पटेल या उनके पुत्र शिवराज को मैदान में उतारने की कोशिशें की जा रही है। हालांकि नरेश पटेल राजनीति से दूर रहने की बात करते हैं। लेकिन शिवराज विधानसभा चुनावों में भी खुलकर कांग्रेस के उमीदवारों का समर्थन कर चुके हैं। जिसके चलते कांग्रेस की यह कोशिश कामयाब होने की संभावना नकारी नहीं जा सकती है।

दूसरी तरफ अगर कांग्रेस नरेश पटेल या शिवराज को मनाने में सफल नहीं होती है, तो टंकारा के विधायक ललित कगथरा के नाम पर महोर लगने की प्रबल संभावना है। लेकिन नरेश पटेल या उसके बेटे के अलावा कोई भी उम्मीदवार होने पर भाजपा का गढ़ होने के नाते कांग्रेस की जीत के आसार कम दिखाई दे रहे हैं।

राजकोट लोकसभा सीट और कुंडारिया की पकड़

राजकोट लोकसभा सीट और कुंडारिया की पकड़

इस सीट पर लेउवा और कड़वा पाटीदारों का प्रभुत्व है। कुंडारिया भी पाटीदार समाज के हैं, 2014 में पहली बार सांसद का चुनाव लगभग ढाई लाख वोटों से जीतते ही उनको केन्द्रीय मंत्री मंडल में स्थान दे दिया गया। राजकोट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट, ऐम्स जैसी सुविधाएं दिलाने में भी उनका बड़ा योगदान माना जाता है। राजकीय रुप से कुंडारिया एक निर्विवाद व्यक्तित्व है। हालांकि, पिछली बार भी उन्हें आंतरिक विरोध का सामना करना पड़ा था। इस चुनाव में भी उनका पत्ता काटने की काफी कोशिश की गई, लेकिन मोदी के अत्यंत नजदीक होने के कारण ऐसे छोटे-मोटे विवादों से उनको कोई खास फर्क पड़ पा रहा।

इधर, शिवराज के राजनीति में आने की संभावना बढ़ी

इधर, शिवराज के राजनीति में आने की संभावना बढ़ी

इधर, शहर के बड़े उद्योगपति होने के साथ-साथ पाटीदारों की आस्था के केन्द्र बने खोड़लधाम का निर्माण नरेश पटेल द्वारा किया गया है। न सिर्फ राजकोट बल्कि सौराष्ट्र और गुजरात के पाटीदारों में भी नरेश पटेल की एक साफसुथरी छबि है। उनके सामने अगर कोई भी उम्मीदवार खड़ा कर दिया जाए, नरेश पटेल को हराना नामुमकिन के बराबर है। वैसे तो नरेश पटेल राजनीति से दूर रहने की बात करते है। लेकिन हाल ही में एक सामाजिक कार्यक्रम में उन्होंने समाज को आगे बढ़ाने के लिए समाज के लोगो को राजनीति में आने की सलाह दी थी। ऐसेमें उनके या उनके बेटे शिवराज के राजनीति में आने की संभावना बढ़ी है।

भाजपा का गढ़, कांग्रेस की जीत के आसार कम?

भाजपा का गढ़, कांग्रेस की जीत के आसार कम?

राजकोट सीट के लिए अगर कांग्रेस नरेश पटेल या शिवराज को मनाने में सफल नहीं होती है, तो टंकारा के विधायक ललित कगथरा के नाम पर मोहर लगने की प्रबल संभावना है। नरेश पटेल या उसके बेटे के अलावा कोई भी उम्मीदवार होने पर भाजपा का गढ़ होने के नाते कांग्रेस की जीत के आसार कम दिखाई दे रहे हैं।

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