सरिता गायकवाड़ ने फिर जीता देश के लिए गोल्‍ड, रफ्तार ऐसी कि लोग इन्‍हें कहते हैं 'डांग एक्सप्रेस'

राजकोट। गुजरात में डांग जिले के छोटे से गांव कराड़ीआंबा की रहने वाली सरिता गायकवाड़ ने फिर अपनी जीत का परचम लहरा दिया है। सरिता ने पोलैंड में आयोजित एथलेटिक्‍स चैंपियनशिप में 400 मीटर की दौड़ 54.21 सेकण्ड में पूरी की। इसके लिए उन्‍हें गोल्‍ड मैडल मिला। सरिता 'डांग एक्सप्रेस' के नाम से मशहूर हैं। वह एशियन गेम्स गेम्‍स भी खेल चुकी हैं। वह अभी 25 वर्ष की हैं और आदिवासी परिवार से ताल्‍लुक रखती हैं।

दौड़ करते हुए पौलेंड में जीता गोल्‍ड

दौड़ करते हुए पौलेंड में जीता गोल्‍ड

संवाददाता के अनुसार, जब गांव वालों को पता चला कि सरिता गायकवाड़ ने यूरोप में गोल्ड जीता है तो वे खुशियां मनाने लगे। उनके परिचित मानते हैं कि सरिता रिवॉल्वर से छूटी गोली की तरह से लक्ष्‍य की ओर भागती हैं। वर्ष 2017 में उन्‍होंने 400 मीटर सिम्पल और हर्डल में भी यूनिवर्सिटी को गोल्ड मैडल दिलाया था। जिसके बाद 2018 में हुए खेल महाकुंभ में गोल्ड मैडल जीता। फिर, उनकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने लगी।

माता-पिता करते हैं खेती, मजदूरी कर पढ़ाया

माता-पिता करते हैं खेती, मजदूरी कर पढ़ाया

सरिता गुजरात की ऐसी खिलाड़ी हैं, जिनके माता-पिता खेती करते हैं और मजदूरी कर परिवार का गुजारा करते हैं। परिवार में माता-पिता, एक बहन और एक छोटा भाई है। वह कहती हैं कि मैं जब छोटी थी, तब मेरे दादा दूरदर्शन पर खेल और खिलाड़ियों को देखकर कहते थे कि सरिता भी सानिया मिर्जा की तरह एक दिन जरूर नाम कमाएगी। उस समय मैं सिर्फ खो-खो खेलती थी। हमारे यहां गांव में साल में एक ही फसल ली जाती है, ऐसे में पेरेंन्‍टस बाकी दिनों में मजदूरी करते हैं।'

मेरीकॉम, दंगल, भाग मिल्खा भाग जैसी फिल्मों से मिली प्रेरणा

मेरीकॉम, दंगल, भाग मिल्खा भाग जैसी फिल्मों से मिली प्रेरणा

सरिता ने मेरीकॉम, दंगल, भाग मिल्खा भाग जैसी फिल्में देखीं और उनसे प्रेरित हुईं। वह कहती हैं कि खिलाड़ियों का यह दुर्भाग्य है कि निचले स्तर पर जब मदद की जरूरत होती है तो उस समय लोगों को प्रोत्साहन या सपोर्ट नहीं मिलता। राष्ट्रीय सफलता मिलने के बाद ही कोई मदद मिलती है।

कम उम्र में नहीं कर देनी चाहिए लडकियों की शादी

कम उम्र में नहीं कर देनी चाहिए लडकियों की शादी

हमारे क्षेत्र में कम उम्र में शादी कर दी जाती है। मगर, मेरा मानना है कि कम उम्र में लड़कियों की शादी रुके तो उनकी तरह राज्य से कई सरिता अपनी प्रतिभा दिखा सकती हैं। लड़कियों को भी अपने सपने साकार करने का हक है।

कहां हैं कराड़ीआंबा गांव?

कहां हैं कराड़ीआंबा गांव?

यह गांव डांग से 30 किलोमीटर अंतरियाल वन विस्तार में बसा है, जहां कुछ समय पहले तक न बिजली थी न कोई मोबाइल या यातायात की कनेक्टीविटी। फोटो में आप सरिता गायकवाड़ का घर देख रहे हैं, जिसमें उनके माता-पिता हैं।

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