Statue of Peace : पीएम मोदी ने विजय वल्लभ की प्रतिमा का अनावरण किया, कौन थे विजय श्री महाराज?
पाली। राजस्थान के पाली स्थित विजय वल्लभ साधना केंद्र जैन तीर्थ में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जैनाचार्य श्रीमद विजय वल्लभ सूरीश्वरजी महाराज की करीब 151 इंच की प्रतिमा 'स्टेच्यू ऑफ पीस' का अनवारण किया।

विजय वल्लभ की 150वीं जयंती
पाली जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर सुमेरपुर पंचायत समिति के गांव जेतपुरा में राजमार्ग 162 पर स्थित केंद्र में विजय वल्लभ की 150वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमें गुजरात की धरती ने दो वल्लभ दिए हैं। राजनीति के क्षेत्र में सरदार वल्लभ भाई पटेल और धार्मिक क्षेत्र में जैन आचार्य विजय वल्लभ सूरीश्वर।

स्टेच्यू ऑफ लिर्बिटी के बाद स्टेच्यू ऑफ पीस के अनावरण का मौका
पीएम मोदी ने कहा कि दोनों ही वल्लभ में समानता है कि इन्होंने देश को एकता और भाईचारे का संदेश दिया है। मेरा सौभाग्य है कि दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टेच्यू ऑफ लिर्बिटी का लोकार्पण व अब जैनाचार्य विजय वल्लभ सूरीश्वर की प्रतिमा 'स्टेच्यू ऑफ पीस' के अनवारण का अवसर मिला है।

आचार्य विजय वल्लभ की जीवनी
बता दें कि वल्लभ सूरीश्वरजी का जन्म गुजरात के बड़ौदा में विक्रम संवत 1870 में हुआ था। मुम्बई में वर्ष 1953-54 में इन्होंने देवलोकगमन किया। इससे पहले आजादी के समय खादी स्वदेशी आंदोलन में भी इनका बड़ा सहयोग रहा। आचार्यश्री खुद खादी पहनते थे।

आचार्य विजय ने पाकिस्तान में किया था चातुर्मास
वर्ष 1947 में भारत विभाजन के समय आचार्यजी का पाकिस्तान के गुजरावाला में चातुर्मास हुआ था। उस समय सभी को हिंदुस्तान के लिए निकाला जा रहा था। तब जैनाचार्य ने कहा था कि जब तक एक भी जैन साहित्य, जैन मूर्ति व जैन लोग असुरक्षित हैं तब तक वो यहां से नहीं जाएंगे।

ब्रिटिश सरकार ने भेजा था विशेष विमान
ब्रिटिश सरकार ने उनको भारत लाने के लिए विशेष विमान भेजा था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। आखिर सितम्बर 1947 को पैदल विहार करते हुए अपने 250 अनुयायियों के साथ वे पाकिस्तान से हिंदुस्तान पहुंचे। गुरुदेव ने अपने साथ आए अनुयायियों का पुनर्वास सुनिश्चजित किया। समाज के लिए शिक्षा व चिकित्सा के क्षेत्र में भी बहुत काम किया। पंजाब व राजस्थान सहित कई राज्यों में शिक्षण संस्थाएं व अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं।
स्टेच्यू ऑफ पीस का वजन 13 सौ किलो
गुरुदेव ने अपने हाथों से 50 संस्थाओं की स्थापना की थी। बता दें कि विजय वल्लभ सूरीश्वर की 151 इंच की अष्ट धातु से बनी यह प्रतिमा जमीन से 27 फिट ऊंची है। इसका वजन 1300 किलो है। इस स्टेच्यू ऑफ पीस का नाम दिया गया है। सुबह दस बजे से शुरू हुए कार्यक्रम देशभर से बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।
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