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Nikki Bhati के बाद अब मां-बेटी दहेज की आग में जलकर मौत, पिता ने कहा- दरिंदों ने लाडली को मार डाला

Sanju Bishnoi Daughter Yashasvi Death: ग्रेटर नोएडा में निक्की भाटी की दहेज के लिए हत्या के बाद अब राजस्थान के जोधपुर से दिल दहलाने वाली खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया है। 22 अगस्त 2025 को 22 वर्षीय स्कूल लेक्चरर संजू बिश्नोई और उनकी 3 साल की मासूम बेटी यशस्वी को दहेज की लालच ने आग की लपटों में झोंक दिया।

संजू ने अपनी बेटी के साथ खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली, जिसमें यशस्वी की मौके पर ही मौत हो गई, और संजू ने 23 अगस्त को अस्पताल में दम तोड़ दिया। छानबीन में पुलिस को पता चला कि मरने से पहले संजू ने एक नोट में पति दिलीप बिश्नोई, सास, ससुर, ननद, और एक अन्य व्यक्ति गणपत सिंह पर उत्पीड़न का सनसनीखेज आरोप लगाया हैं।

Sanju Bishnoi Daughter Yashasvi Death

'मेरी बेटी छीन लिया', पिता का छलका दर्द

संजू के पिता ओमाराम बिश्नोई ने आंसुओं में डूबकर बताया, 'मेरी बेटी छीन लिया।' सुसाइड नोट में संजू ने लिखा कि पति दिलीप, सास, ससुर, ननद, और गणपत सिंह ने उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। नोट में गणपत सिंह का जिक्र खास तौर पर है, जो कथित तौर पर दिलीप के साथ मिलकर संजू को सताता था।

क्या हुआ जोधपुर में?

22 अगस्त की दोपहर करीब 3:00 बजे, डांगियावास थाना क्षेत्र के सरनाडा गांव में संजू अपने घर पर अकेली थीं। पति दिलीप और ससुराल वाले घर पर नहीं थे। स्कूल से लौटने के बाद संजू ने अपनी बेटी यशस्वी को गोद में लिया और पेट्रोल डालकर आग लगा ली। पड़ोसियों ने घर से धुआं और चीखें सुनीं, लेकिन जब तक वे पहुंचे, यशस्वी की मौत हो चुकी थी। संजू को गंभीर हालत में जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल ले जाया गया, जहां 23 अगस्त की सुबह उनकी मौत हो गई। पड़ोसी रामलाल ने बताया, 'हमने धुआं देखा और दौड़े, लेकिन सब खत्म हो चुका था। संजू की चीखें और मासूम यशस्वी का जलना देखकर हमारा दिल टूट गया।'

पुलिस की कार्रवाई: सुसाइड नोट और सबूत जब्त

डांगियावास थाना पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर शवों को कब्जे में लिया। फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम ने पेट्रोल की बोतल, कपड़े, और अन्य सबूत इकट्ठे किए। संजू का मोबाइल फोन भी जब्त किया गया। सुसाइड नोट में लिखे आरोपों के आधार पर पुलिस ने पति दिलीप बिश्नोई, सास, ससुर, और ननद के खिलाफ IPC की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 498A (दहेज उत्पीड़न) के तहत मामला दर्ज किया। गणपत सिंह की तलाश जारी है, जो कथित तौर पर दिलीप का दोस्त है।

थाना प्रभारी महेंद्र सिंह ने बताया, 'प्रारंभिक जांच में पता चला कि संजू को दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। गणपत सिंह और दिलीप की भूमिका की जांच की जा रही है। जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।'

परिवार का गुस्सा: 'हत्यारों को कोई दया नहीं'

संजू की मौत के बाद उनके माता-पिता और ससुराल वालों के बीच शव को लेकर तनाव पैदा हो गया। आखिरकार, पोस्टमॉर्टम के बाद संजू और यशस्वी का शव माता-पिता को सौंपा गया, और मां-बेटी का अंतिम संस्कार एक साथ किया गया। संजू के पिता ने गुस्से में कहा, 'इन दरिंदों ने मेरी बेटी को मार डाला। दहेज की लालच और प्रताड़ना ने उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर किया। इन्हें फांसी से कम कुछ नहीं चाहिए।' संजू की मां बिलखते हुए बोलीं, 'मेरी बेटी एक शिक्षिका थी, उसका सपना अपनी बेटी को पढ़ाने का था। लेकिन इन कसाइयों ने सब छीन लिया। CM भजन लाल , इंसाफ दो।'

संजू की कहानी: शिक्षिका से दहेज की शिकार तक

संजू बिश्नोई जोधपुर के फिटकासनी गांव की रहने वाली थीं और एक स्कूल में लेक्चरर थीं। उनकी शादी 2020 में दिलीप बिश्नोई से हुई थी। शुरू में सब ठीक था, लेकिन जल्द ही ससुराल वालों ने दहेज की मांग शुरू कर दी। संजू ने कई बार अपने माता-पिता को बताया कि उसे सताया जा रहा है, लेकिन सामाजिक दबाव के कारण वह ससुराल में रुकी रहीं। उनकी 3 साल की बेटी यशस्वी उनकी जिंदगी का सहारा थी, लेकिन दहेज की लालच ने दोनों को निगल लिया।

दहेज की आग: निक्की से संजू तक

संजू की हत्या ने ग्रेटर नोएडा के निक्की भाटी हत्याकांड की याद ताजा कर दी, जहां निक्की को दहेज के लिए जिंदा जला दिया गया था। दोनों मामलों में दहेज की लालच और पारिवारिक हिंसा की समानता समाज पर सवाल उठाती है। NCRB के अनुसार, भारत में हर साल 6,000 से ज्यादा दहेज-संबंधी मौतें होती हैं।

क्या मिलेगा इंसाफ?

संजू और यशस्वी की दर्दनाक मौत ने दहेज प्रथा की क्रूरता को फिर उजागर किया है। सुसाइड नोट और पुलिस की कार्रवाई से परिवार को इंसाफ की उम्मीद है, लेकिन गणपत सिंह की तलाश और आरोपियों की सजा का इंतजार बाकी है। क्या यह मामला दहेज के खिलाफ सख्त कानूनों और सामाजिक बदलाव की मांग को बल देगा? यह सवाल हर उस माता-पिता के मन में है, जिन्होंने अपनी बेटी को दुल्हन बनाकर विदा किया था।

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