नाथूला पोस्ट अब 'वीर सगत सिंह', इस राजस्थानी फौजी से क्यों कांपते थे 3 देश? चीन की बंदूक के आगे भी नहीं झुका
Sagat Singh Nathula Post: सिक्किम में भारतीय सेना की नाथूला सीमा बैठक चौकी (BPM) को अब वीर सगत सिंह राठौड़ के नाम से जाना जाएगा। राजस्थान के चूरू जिले से ताल्लुक रखने वाले लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह वो वीर योद्धा थे, जिनसे चीन, पाकिस्तान और पुर्तगाल तक की सेनाएं खौफ खाती थीं। सबसे पहले जानते हैं नाथूला पोस्ट के नामकरण की कहानी, फिर आपको बताते हैं जनरल सगत सिंह की वो वीरगाथा, जिसे सुनकर हर भारतीय का सीना गर्व से भर उठेगा।
नाथूला पोस्ट को वीर सगत सिंह नाम मिलने की कहानी
नाथूला चौकी का नाम बदलकर 'वीर सगत सिंह' रखने के अवसर पर सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने कहा, "एक राजस्थानी होने के नाते मेरे लिए यह गर्व का विषय है कि 1967 की लड़ाई में भारत को निर्णायक जीत दिलाने वाले योद्धा जनरल सगत सिंह के नाम पर इस ऐतिहासिक पोस्ट का नामकरण हुआ है।" इसी अवसर पर उन्होंने नाथू ला दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों की पहली बस को झंडी दिखाकर रवाना किया।

चीन क्यों डरता था सगत सिंह से?
भारत-चीन युद्ध 1962 में भारत को हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन 1967 में सिक्किम के नाथू ला दर्रे पर भारत-चीन सेनाएं फिर आमने-सामने आ गईं। यह युद्ध समुद्र तल से 14,140 फीट की ऊंचाई पर स्थित नाथू ला पर चार दिन तक चला।

चीन को लगा था कि 1962 की हार से भारतीय सेना डर चुकी है और वह आसानी से इस दर्रे पर कब्जा कर लेगा। लेकिन जनरल सगत सिंह जैसे अफसरों के अदम्य साहस ने ऐसा नहीं होने दिया। भारतीय सेना ने 300 से अधिक चीनी सैनिकों को मार गिराया।

दिल्ली से आदेश का इंतजार करने की बजाय जनरल सगत सिंह ने युद्ध क्षेत्र में तत्काल निर्णय लेते हुए भारतीय तोपों का मुंह चीन की ओर खुलवा दिया और चीनी सेना को करारा जवाब दिया।
नाथू ला खाली करने के आदेश के बावजूद सगत सिंह डटे रहे
मेजर जनरल वी.के. सिंह की किताब 'Leadership in the Indian Army' के अनुसार, चीन ने भारत को चेतावनी दी थी कि नाथू ला और जेलेप ला की चौकियां खाली कर दी जाएं। कोर मुख्यालय के जनरल बेवूर ने नाथू ला खाली करने का आदेश दे भी दिया था, लेकिन सगत सिंह ने इनकार कर दिया।
उनका तर्क था कि नाथू ला ऊंचाई पर स्थित है, जिससे चीनी गतिविधियों पर आसानी से नजर रखी जा सकती है। उन्होंने इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चौकी मानते हुए किसी भी हाल में खाली नहीं किया।

दूसरी ओर, जेलेप ला चौकी, जो 27 माउंटेन डिवीजन के अधिकार क्षेत्र में थी, उसे खाली कर दिया गया, जिस पर चीन ने तुरंत कब्जा कर लिया। यह क्षेत्र आज भी चीन के नियंत्रण में है। नाथू ला आज भी भारत के पास है, और इसका श्रेय जनरल सगत सिंह की दृढ़ता को जाता है।
पाकिस्तान क्यों खौफ खाता था सगत सिंह से?
1970 में सगत सिंह को लेफ्टिनेंट जनरल पद पर प्रोन्नत कर 4 कोर्प्स का जनरल ऑफिसर कमांडिंग बनाया गया। उस समय पूर्वी पाकिस्तान में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम शुरू हो चुका था।
बांग्लादेश युद्ध के दौरान उनकी एयरबोर्न ब्रिगेड की मदद से भारतीय सेना ने एक बड़ी नदी को पार कर अद्भुत सैन्य उपलब्धि हासिल की। यह भारतीय सेना के इतिहास में पहली बार हुआ था।
मेजर चंद्रकांत सिंह जैसे सैन्य इतिहासकार बांग्लादेश की आज़ादी का श्रेय सगत सिंह को देते हैं। उनके नेतृत्व और निर्णयों की बदौलत पाकिस्तान के जनरल नियाज़ी को 93,000 सैनिकों के साथ आत्मसमर्पण करना पड़ा और एक नया देश बांग्लादेश अस्तित्व में आया।
पुर्तगाल ने रखा था सगत सिंह पर इनाम
1961 से पहले गोवा पुर्तगाली शासन के अधीन था। गोवा को आज़ाद कराने के लिए भारत सरकार ने 'ऑपरेशन विजय' चलाया, जिसकी जिम्मेदारी सगत सिंह को दी गई।
उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने पुर्तगाली शासन को उखाड़ फेंका। वे 'गोवा के मुक्तिदाता' के रूप में प्रसिद्ध हुए। पुर्तगाल ने सगत सिंह को पकड़वाने के लिए 10,000 डॉलर का इनाम घोषित कर दिया था।

बीबीसी से बातचीत में जनरल वीके सिंह ने बताया कि एक बार अमेरिका से भारत घूमने आए कुछ पर्यटक सगत सिंह से मिले। जब उन्होंने नाम पूछा और पुष्टि हुई कि वह वही ब्रिगेडियर सगत सिंह हैं, तो पर्यटकों ने बताया कि वे पुर्तगाल से आ रहे हैं और वहां सगत सिंह के पोस्टर लगे हैं। उन्हें पकड़वाने वाले को 10,000 डॉलर का इनाम देने की बात कही गई थी।
सगत सिंह का जीवन परिचय (Sagat Singh Biography in Hindi)
जनरल सगत सिंह का जन्म 14 जुलाई 1919 को राजस्थान के चूरू जिले की रतनगढ़ तहसील के गांव कुसुमदेसर में हुआ था। उनके पिता ठाकुर बृजपाल सिंह बीकानेर स्टेट की सेना में थे और द्वितीय विश्व युद्ध में ईरान में सेवा दे चुके थे।
आज़ादी के बाद बीकानेर की सेना का भारतीय सेना में विलय हो गया और सगत सिंह ने अपनी सेवा जारी रखी। वे सेना में जनरल के पद तक पहुंचे और तीन देशों चीन, पाकिस्तान व पुर्तगाल को मुंहतोड़ जवाब दिया।
26 सितंबर 2001 को सगत सिंह का निधन हो गया। उनकी 100वीं जयंती पर सप्त शक्ति कमान की ओर से जयपुर व जोधपुर में उनकी प्रतिमाएं लगाई गईं। और अब 20 जून 2025 को नाथू ला चौकी को 'वीर सगत सिंह पोस्ट' नाम देकर उन्हें राष्ट्रीय श्रद्धांजलि दी गई है।
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