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RJS Result 2024: शादी के 12 साल बाद पहले ही प्रयास में सफलता, डॉक्टर से मजिस्ट्रेट बन गईं परमा चौधरी

Rajasthan Judiciary Result 2024: राजस्थान जूडिशियल सर्विस (RJS) भर्ती-2024 के परिणाम जारी हो गए हैं। आरजेएस के रिजल्ट घोषित होने के बाद सफल उम्मीदवारों के घर में दीवाली की खुशियां दोगुनी हो चुकी हैं। परिवार में उत्सव का माहौल है। इसी के साथ कई ऐसे अभ्यर्थी भी हैं, जिनकी कायमाबी की कहानी प्रेरणादायक है। इन्हीं में से एक हैं चूरू की परमा चौधरी, जिन्होंने अपने पहले ही प्रयास में 187 अंक हासिल करते हुए ना सिर्फ जज बनीं बल्कि राजस्थान में तीसरा स्थान पाने में सफलता हासिल की।

राजस्थान न्यायिक सेवा परीक्षा के घोषित नतीजो में 90 प्रतिशत सफल उम्मीदवार महिलाएं हैं। इनमें चूरू की परमा चौधरी ने भी खासा नाम कमाया है। राजस्थान में तीसरा स्थान प्राप्त करते हुए वह 187 अंक प्राप्त करके अपने पहले ही प्रयास में जज बन गईं। परमा अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार के अटूट सहयोग और अपनी अथक मेहनत को देती हैं।

Churu parma chaudhary

परमा की सफलता की यात्रा

2010 में बीडीएस पूरा करने वाली परमा चौधरी ने 2012 में चुरू के सुमित लांबा से शादी की। दो बच्चों की मां होने के बावजूद, उन्होंने दृढ़ संकल्प और परिवार के समर्थन के साथ अपने सपने को पूरा किया। शादी से पहले जज बनने की ख्वाहिश रखने वाली परमा ने सुमित के साथ प्रैक्टिस करते हुए कानूनी क्षेत्र में ही रहने का फैसला किया। उनके ससुराल वालों ने उनके सपनों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई।

परिवार से समर्थन

परमा के ससुराल वालों का कानूनी पेशे से गहरा नाता है। उनके चाचा बीरबल सिंह लांबा चूरू कोर्ट में 56 साल के अनुभव वाले एक प्रतिष्ठित वकील हैं। उनके ससुर सुरेंद्र सिंह लांबा भी वकील हैं। ऐसे में कानून की किताबों और चर्चाओं से घिरी परमा को गंभीरता से कानून का अध्ययन करने की प्रेरणा मिली।

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शैक्षिक गतिविधियां

परमा ने चूरू में रहकर अपनी शिक्षा पूरी की है। उन्होंने कोटपूतली के डेंटल कॉलेज और चूरू में एलएलबी के दौरान टॉप किया था।

2020 में परमा ने चूरू लॉ कॉलेज में दाखिला लिया और बिना किसी कोचिंग के उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कॉलेज टॉपर बन गईं। चार साल की उनकी लगन का नतीजा यह हुआ कि उन्होंने राजस्थान न्यायिक सेवा परीक्षा में तीसरा स्थान हासिल किया। यह उपलब्धि जज बनने के उनके सपने को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई।

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परमा चौधरी की कहानी दृढ़ता और दृढ़ संकल्प की कहानी है। परिवार के समर्थन और व्यक्तिगत दृढ़ संकल्प के साथ, उसने अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए चुनौतियों पर काबू पा लिया। उनकी सफलता कई महत्वाकांक्षी व्यक्तियों के लिए प्रेरणा का काम करती है जो अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल करना चाहते हैं।

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