Rajasthan : साल 2021 में पश्चिम से उगेगा तरक्की का सूरज, मुम्बई को पछाड़कर बाड़मेर बनेगा नंबर वन
बाड़मेर। हर दिन सूरज पूर्व से उगता है, मगर नए साल 2021 में राजस्थान की तरक्की का सूरज पश्चिम से उगेगा। यानी प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र बाड़मेर की धरती से देश के लिए उम्मीदों की नई कहानी लिखी जा रही है। बाड़मेर तेल-गैस के मामले में दुबई की राह पर चल पड़ा है।
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कभी नमक के लिए फेमस था पचपदरा
उम्मीदें परवान चढ़ी तो बॉम्बेहाई तेल क्षेत्र को पीछे छोड़कर बाड़मेर को भारत का सबसे बड़ा तेल क्षेत्र बनते देर नहीं लगेगी। बता दें कि राजस्थान में जोधपुर और बाड़मेर के ठीक बीच स्थित पचपदरा में सदियों से नमक का उत्पादन हुआ था। खारवाल जाति इस काम के लिए पचपदरा को पहचान दिलाए हुए थी। पचपदरा के नमक के लिए ही अंग्रेजों ने यहां रेल पहुंचाई थी।

पचपदरा में अत्याधुनिक रिफाइनरी
अब बाड़मेर के पचपदरा की इसी क्षारीय जमीन पर 4500 एकड़ में एचपीसीएल राजस्थान की बहुप्रतीक्षित रिफाइनरी का सपना साकार होता जा रहा है। पचपदरा की अत्याधुनिक रिफाइनरी देश की बाकी तेल रिफाइनरी से अलग होगी, क्योंकि इसमें क्रूड ऑयल को साफ करने की 9 रिफाइनरी व 4 पेट्रोकेमिकल कांप्लेक्स के साथ 13 प्राेसेसिंग यूनिट भी बन रही हैं।

बाड़मेर रिफाइनरी प्रोजेक्ट
करीब 45 हजार करोड़ के बाड़मेर रिफाइनरी प्रोजेक्ट में अब तक 23 हजार करोड़ के कार्य आदेश हो चुके हैं। 4800 करोड़ के काम पूरे भी कर लिए गए हैं। बाड़मेर रिफाइनरी राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ड्रिम प्रोजेक्ट में से एक है। इसलिए गहलोत सरकार के कार्यकाल के अंत तक इसका काम पूरा होने की उम्मीद है।

गैस प्लांट रागेश्वरी डीप बनकर तैयार
बाड़मेर में देश का सबसे बड़ा जमीनी तेल और गैस भंडार है। गुड़ामालानी इलाके में 3 ट्रिलियन यानि तीन खरब घन फीट गैस का भंडार है। नए साल 2021 में राजस्थान के इस पश्चिमी क्षेत्र की ताकत और बढ़ने वाली है। क्योंकि प्रदेश का तीसरा गैस प्लांट रागेश्वरी डीप तैयार हो चुका है। इससे रोज 75 करोड़ घनफीट का उत्पादन होगा और सप्लाई स्थानीय स्तर पर होगी।

गुड़ामालानी क्षेत्र में 3 खरब घनफीट का गैस भंडार
दरअसल, बाड़मेर-सांचौर बेसिन के गुड़ामालानी बेल्ट में कुछ साल पहले 3 ट्रिलियन अर्थात 3 खरब घनफीट का गैस भंडार खोजा जा चुका है। गैस मिलने के बाद वेदांता कंपनी ने यहां रागेश्वरी गैस टर्मिनल प्लांट बनाया और गैस उत्पादन करने लगी।

बाड़मर में रेअर अर्थ का भी खजाना
तेल और कोयले के बूते देश की खनिज की आर्थिक राजधानी बन रहे राजस्थान के बाड़मेर जिले में एक और बड़े खजाने के संकेत कुछ साल पहले मिले हैं। भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग ने यहां रेअर अर्थ (दुर्लभ खनिज ) का बड़ा भंडार होने के प्रमाण दिए थे। यह भारत का पहला टेरिस्टीअल यानी कि जमीन पर पाए जाने वाले खनिज का बड़ा भण्डार है।

चीन की मॉनोपोली भी तोड़ेगा
पूरे विश्व में रेअर अर्थ का 97 प्रतिशत निर्यात चीन करता है। बताते हैं कि तीन प्रतिशत खजाना मलेशिया, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और भारत में है। बाड़मेर में मिला यह भण्डार न केवल भारत को सक्षम बनाएगा, बल्कि चीन की मॉनोपोली भी तोड़ेगा। जानकारों के मुताबिक करीब 900 अरब से भी ज्यादा का रेअर अर्थ यहां मौजूद है।

बाड़मेर में 15 प्रकार के रेअर अर्थ
बता दें कि बाड़मेर के भूगर्भ में गैलेनियम, रूबीडियम, इप्रीयम, थोरियम, यूरेनियम, जर्मेनियम, सीरियम, टिलूरियम, यूरेनियम सहित करीब 15 प्रकार के खनिज हैं, जो भू-वैज्ञानिकों के मुताबिक लेंथोनोइट ग्रुप के हैं।

बाड़मेर में कोयले से बिजली उत्पादन
बाड़मेर लिग्नाइट माइनिंग कंपनी लिमिटेड पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में स्थापित पहली विद्युत उत्पादन कंपनी है, जिसकी स्थापना सन 2009 में की गई थी। यह राजस्थान सरकार के उपक्रम राजस्थान स्टेट माइंस एण्ड मिनरल्स लिमिटेड - RSMM तथा निजी क्षेत्र के उद्यम राज वेस्ट पॉवर लिमिटेड - RWPL की साझेदारी की कम्पनी है।

बाड़मेर के भादरेश गांव में आठ इकाइयां
135 -135 मेगावाट की लिग्नाईट तापीय विद्युत उत्पादन परियोजना के अंतर्गत आठ इकाइयाँ बाड़मेर जिले के भादरेश गाँव में स्थापित की गई है। इनमें कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 1080 मेगावाट है। इनमें बाड़मेर जिले की कपूरड़ी और जालिपा लिग्नाइट माइंस से निकाला गया तथा आयातित कोयला काम में लिया जा रहा है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों को इसमें रोजगार मिला हैं साथ ही भविष्य के भी इसके वृहद विस्तार की संभावना हैं।

सूर्य बनेगा बाड़मेर की बड़ी ताकत
राजस्थान की गहलोत सरकार सौर ऊर्जा को लेकर भी गम्भीर हैं। पश्चिमी राजस्थान में सबसे बड़ा भड़ला सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट है। बाड़मेर भी सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नए साल 2021 में बेहतरीन काम करने वाला है। जानकार बताते हैं कि आगामी 10 साल में बाड़मेर सौर ऊर्जा के मामले में देश को 1 नम्बर पर पहुंचा सकता है।

पवन ऊर्जा के पंखे गति पकड़ने लगे
पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर में वर्ष पर्यंत तेज आंधियां और हवा चलती रहती हैं। पवन ऊर्जा उत्पादन के लिए मुफीद इलाके हैं। जैसलमेर में कई साल पहले पवन ऊर्जा उत्पादन का काम शुरू हो चुका था और अब पिछले कुछ साल से बाड़मेर के शिव क्षेत्र के आगे तक सैकड़ों की संख्या में पवन ऊर्जा के पंखे नजर आने लगे हैं। आगामी समय में इसमें और ज्यादा निवेश होगा और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में भी बाड़मेर का नाम अग्रणी होगा।
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