Aaya Ram Gaya Ram: राजनीति में कैसे आया 'आया राम-गया राम'? इस नेता की वजह से फेमस हुई थी यह कहावत
Rajasthan Election 2023 aaya ram gaya ram: राजस्थान में विधानसभा चुनाव सिर पर है। राजस्थान में टिकट कटने के बाद दल बदल का सिलसिला शुरू हुआ था, जिसमें टिकट नहीं मिलने से नाराज कई नेताओं और प्रत्याशियों ने या तो पार्टी बदल ली या फिर निर्दलीय चुनावी मैदान में उतर गए। कांग्रेस और भाजपा के कई दिग्गज बगावत कर गए। जिसमें भाजपा में झोटवाड़ा सीट से राजपाल सिंह शेखावत, डीडवाना से यूनुस खान, चित्तौड़गढ़ से मौजूदा विधायक चंद्रभान सिंह आक्या बागी हुए।

वहीं, कांग्रेस में लक्ष्मणगढ़ से मौजूदा विधायक जौहरी लाल, बसेड़ी से वर्तमान विधायक खिलाड़ी लाल बैरवा, नोखा से कन्हैयालाल झंवर जैसे दिग्गत बगावत कर गए। इसी में दल बदलने वाले नेताओं के लिए 'आया राम- गया राम' का जुमला भी जगह- जगह सुनने को मिल रहा है। पर कम ही लोग जानते हैं कि इस जुमले का जन्म कैसे हुआ। अधिकतर लोग तो आया व गया शब्द को ही इस कहावत की उत्पत्ति का कारण मानते हैं। पर यकीन मानिए ये जुमला शब्द नहीं, गया राम नाम के एक नेता व उनकी दल बदल की रफ्तार की वजह से बना है। जिनके नाम 15 दिन में ही चार दल बदलने का अनूठा रिकॉर्ड है। आइए आज आपको उस पूरे घटनाक्रम के बारे में बताते हैं।
यूं बदलते गए दल
पंजाब से अलग होने के बाद हरियाणा में 1967 में हुए पहले चुनाव में हसनपुर विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिलने पर कांग्रेस नेता गया राम ने कांग्रेस छोडकऱ निर्दलीय चुनाव लड़ा था। वे चुनाव भी जीत गए। बहुमत कांग्रेस को मिलने पर इस चुनाव में भगवतदयाल शर्मा हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री बने। पर कुछ समय बाद ही दल -बदल से बहुमत जुटा संयुक्त मोर्चा के राव वीरेंद्रसिंह मुख्यमंत्री बन गए। इस दल बदल में गयाराम का दल बदलना भी शामिल रहा। लेकिन कुछ समय बाद ही गया राम फिर कांग्रेस में आकर 9 घंटे बाद ही फिर संयुक्त मोर्चा में शामिल हो गए। यही नहीं 15 दिन के भीतर ही वे कांग्रेस में फिर आ गए। बाद में भी उन्होंने आर्य सभा, लोकदल व 1977 में जनता पार्टी से चुनाव लड़ा। चुनाव जीतकर 1982 में उन्होंने फिर जनता पार्टी छोडकऱ निर्दलीय चुनाव लड़ा। इस तरह भारतीय राजनीति में गया राम ने दल बदलने का अनूठा रिकॉर्ड बनाया।
गया राम अब आया राम
संयुक्त मोर्चा में फिर शामिल होने के बाद राव विरेन्द्र सिंह गया राम को चंडीगढ़ ले गए थे। जहां उन्होंने एक जगह उनका परिचय कराते हुए कहा कि गयाराम अब आयाराम है। इसके बाद तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री वाई बी चह्वाण ने सबसे पहले संसद में दल -बदल के लिए 'आयाराम -गयाराम' जुमले का प्रयोग किया। जिसके बाद से भारतीय राजनीति में दल बदलुओं के लिए 'आयाराम- गयाराम' कहावत कही जाने लगी।












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