अब डॉक्टर पर बिना जांच नहीं होगी FIR, राजस्थान सरकार ने जारी की SOP
जयपुर, 30 मई। गहलोत सरकार ने डॉक्टर्स और मेडिकल वर्कर्स की पक्ष में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के गृहविभाग की ओर से एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर जारी किया गया है, जिसके तहत डॉक्टर-मेडिकल वर्कर्स पर बिना जांच एफआईआर दर्ज नहीं होगी। अगर किसी मरीज के दौरान इलाज के दौरान मौत हो जाती है तो सीधे तौर पर सबंधित डॉक्टर और मेडिकल वर्कर्स पर मुकदमा दर्ज नहीं हो पाएगा।

बल्कि इस मामले की जांच के लिए एक मेडिकल पैनल बनेगा, जो कि मामले की जांच करेगा और उसकी रिपोर्ट के बाद ही डॉक्टर्स और मेडिकल वर्कर्स के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत SP या कमिश्नर के आदेश के बिना किसी भी डॉक्टर या कर्मचारी को अरेस्ट नहीं किया जा सकता है।
अक्सर काफी केसों में देखा जाता है कि आधी-अधूरी जानकरी के एवज में मरीजों के रिश्तेदारों की ओर से डॉक्टर्स और मेडिकल वर्कर्स के खिलाफ एक्शन ले लिया जाता है। यहीं नहीं अक्सर इंटरनेट पर भी एक तरफा बात सुनकर डॉक्टर या मेडिकल वर्कर्स के खिलाफ केस भी दर्ज करा दिया जाता है, जिससे डॉक्टर या मेडिकल वर्कर्स को मानसिक स्ट्रेस से गुजरना पड़ता है और कई बार तो उनकी नौकरी पर भी सवाल खड़े हो जाते हैं।
मेडिकल बोर्ड जल्द से जल्द पैनल बनाए
सरकार की ओर से जो आदेश दिया गया है उसके मुताबिक मेडिकल बोर्ड जल्द से जल्द पैनल बनाए,मेडिकल नेगलिजेंस की शिकायत के मात्र तीन दिन के अंदर ही पैनल बनना चाहिए। इससे ज्यादा का समय नहीं लगना चाहिए। मेडिकल पैनल की जिम्मेदारी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल या सीएमएचओ की है। इस पैनल को 15 दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। अगर 15 दिन में रिपोर्ट नहीं बन पाती है तो 15 दिन की अवधि बढ़ाई जा सकती है लेकिन ये तभी होगा जब कारण वाजिब होगा।












Click it and Unblock the Notifications