खून से लथपथ शरीर, टूट गया विमान पर नहीं मानी हार! अभिमन्यु सिंह ने मौत के मुंह से कैसे बचाई साथी पायलट की जान?
IAF Group Captain Abhimanyu Singh: देश की रक्षा करने वाले जवानों की बहादुरी की कहानियां अक्सर लोगों को गर्व से भर देती हैं, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो दिल को छू जाती हैं। गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित गुलमोहर गार्डन सोसायटी में रहने वाले भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन अभिमन्यु सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
एक ऐसी रात, जब उड़ान के दौरान अचानक विमान में गंभीर तकनीकी खराबी आ गई, वह खुद घायल हो गए, उनके शरीर से लगातार खून बह रहा था, लेकिन उन्होंने अपने कर्तव्य से मुंह नहीं मोड़ा। उन्होंने न सिर्फ विमान को सुरक्षित संभाला, बल्कि ट्रेनी पायलट की जान बचाने के साथ एक संभावित बड़े हादसे को भी टाल दिया।

उनके इसी असाधारण साहस, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा को सम्मान देते हुए उन्हें देश के प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार 'शौर्य चक्र' से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति भवन में मिला यह सम्मान पूरे गाजियाबाद के लिए गर्व का विषय बन गया है।
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एक उड़ान, जिसने बदल दी जिंदगी
21 नवंबर 2024 की रात ग्रुप कैप्टन अभिमन्यु सिंह एक ट्रेनी पायलट की उड़ान का मूल्यांकन कर रहे थे। यह वायुसेना की नियमित प्रशिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा था। उड़ान सामान्य रूप से चल रही थी, लेकिन अचानक विमान की पिछली कैनोपी टूट गई। कुछ ही सेकंड में हालात पूरी तरह बदल गए। केबिन में तेज दबाव और तकनीकी समस्याएं पैदा हो गईं। टूटे हुए हिस्सों की वजह से अभिमन्यु सिंह को गंभीर चोटें आईं और उनके शरीर से काफी खून बहने लगा।
दर्द से ज्यादा जिम्मेदारी को दी अहमियत
ऐसी स्थिति में किसी भी व्यक्ति का ध्यान सबसे पहले अपनी जान बचाने पर जाता है, लेकिन अभिमन्यु सिंह ने अलग उदाहरण पेश किया। गंभीर चोटों और लगातार बढ़ते दर्द के बावजूद उन्होंने अपना ध्यान विमान और उसमें मौजूद ट्रेनी पायलट की सुरक्षा पर रखा। हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे, लेकिन उन्होंने घबराने के बजाय तेजी से फैसले लिए और विमान को नियंत्रित रखने में सफलता हासिल की।
आबादी वाले इलाके को बचाने के लिए लिया बड़ा फैसला
विमान में तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटना का खतरा बढ़ गया था। यदि विमान किसी रिहायशी इलाके में गिरता, तो बड़ा नुकसान हो सकता था। इस खतरे को समझते हुए अभिमन्यु सिंह ने विमान को आबादी वाले क्षेत्र से दूर मोड़ दिया। यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि उस समय वह खुद घायल थे और विमान को नियंत्रित रखना भी मुश्किल हो रहा था। इसके बावजूद उन्होंने धैर्य नहीं खोया और स्थिति को संभालते रहे।
सुरक्षित लैंडिंग कर टाल दिया बड़ा हादसा
लगातार चुनौतीपूर्ण हालात का सामना करते हुए ग्रुप कैप्टन अभिमन्यु सिंह ने आखिरकार विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई। उनकी सूझबूझ और बहादुरी की वजह से ट्रेनी पायलट सुरक्षित बच गया। साथ ही जमीन पर मौजूद लोगों की जान भी सुरक्षित रही। वायुसेना के अधिकारियों ने माना कि अगर उस समय उन्होंने साहस और समझदारी नहीं दिखाई होती, तो परिणाम काफी गंभीर हो सकते थे।
बहादुरी को मिला देश का सम्मान
देश के लिए जोखिम उठाने और असाधारण साहस दिखाने वाले सैनिकों को दिए जाने वाले प्रमुख वीरता पुरस्कारों में शौर्य चक्र का नाम शामिल है। अभिमन्यु सिंह को यह सम्मान उनके उसी साहसिक कार्य के लिए दिया गया, जिसमें उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। यह सम्मान उनके कर्तव्य के प्रति समर्पण और पेशेवर जिम्मेदारी का भी प्रतीक माना जा रहा है।
पिता बोले- बेटे ने बढ़ाया पूरे शहर का मान
अभिमन्यु सिंह के पिता तेजवीर सिंह ने कहा कि यह सम्मान केवल उनके परिवार की खुशी नहीं है, बल्कि पूरे गाजियाबाद के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने बताया कि अभिमन्यु बचपन से ही अनुशासित और मेहनती रहे हैं। देश सेवा का सपना उन्होंने बहुत पहले देख लिया था और आज उनकी बहादुरी को पूरे देश ने सम्मान दिया है। परिवार का कहना है कि यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करेगी।
वर्तमान में ग्रुप कैप्टन अभिमन्यु सिंह सिरसा एयरबेस पर तैनात हैं। परिवार के अनुसार अब उनका तबादला दिल्ली हो चुका है और वह जल्द ही नई जिम्मेदारी संभालेंगे।
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