ताजपोशी के बाद लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का पहला इंटरव्यू, शेयर किया पिता-बहन का रुला देने वाला किस्सा
Lakshyaraj Singh Mewar: राजस्थान में मेवाड़ राजवंश की गद्दी पर 77वें संरक्षक के तौर पर ताजपोशी (2 अप्रैल 2025) के बाद लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का पहला मीडिया इंटरव्यू सामने आया है। उन्होंने अपने पिता अरविंद सिंह मेवाड़ व बहन का वो किस्सा शेयर किया, जिससे उनका गला रुंध गया और आंखें भर आईं।
महाराणा प्रताप के वंशज अरविंद सिंह मेवाड़ का निधन 16 मार्च 2025 को हुआ है। इसके बाद उनके विरासत बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने संभाली है। उन्होंने यूट्यूब चैनल Zindagi with Richa की ऋचा अनिरुद्ध से बातचीत में पिता के चले जाने के बाद उन्हें जो बदलाव महसूस हो रहे, उन पर भी चर्चा की।

लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने बताया कि मेवाड़ राजवंश के प्रिंस के बाद संरक्षक बनने के बाद जिम्मेदारी बढ़ गई है। कर्म और व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया है। मुझे मेरे नाम से बुलाना ज्यादा पसंद है।
पिता अरविंद सिंह मेवाड़ के चले जाने के बाद यह बात समझ आई कि जब हमारे किसी चाहने वाले के माता-पिता गुजर जाते थे तो उनके दिल में क्या बीत रही होती थी। अब अहसास होता है कि पिता के गुजरने के बाद जो जीवन में जो खोखलापन आता है, वो किसे कहते हैं?
जब पिता को बहन को ससुराल के लिए विदा करते...
लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने बताया कि मेरी बहन भी हमारी घर से अपने ससुराल के लिए जाती थी तो मेरे पिता अरविंद सिंह मेवाड़ बेटी को विदा करने की हर रस्म निभाते थे। हम छोटे तो बहन की विदाई पर इतना ध्यान ही नहीं देते थे। हम सोचते थे बहन जा रही है। इतनी क्या रस्म निभाना। थोड़े दिन बाद वापस आ जाएगी।

लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने बताया कि इस बार बड़ी बहन आई तब पिता जिंदा थे और जब वो वापस गई तब पिता का निधन हो चुका था। इस बार जब उसकी विदाई का मौका आया तो मन में बस एक ही ख्याल आ रहा था कि बहन को पिता के निधन के बाद यह कतई नहीं लगना चाहिए कि यह उसका घर नहीं है। उसे पिता की कोई कमी महसूस नहीं हो।
बहन अपने ससुराल से मायके आए तो उसे दो बार नहीं सोचना पड़े कि मैं अपने भाई के घर जाऊं या नहीं? उसके मन के अंदर वो हिचकिचाहट नहीं रहे कि अब वो उसका घर नहीं है। पिताजी हमेशा कहा करते थे कि भाई भले ही छोटा हो, मगर होता बड़ा ही है। पिता के निधन के बाद यह बात समझ आई।
अंतिम यात्रा में कह गया कोई काम की बात
लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने बताया कि जब पिताजी को अंतिम विदाई दी जा रही थी। उस दौरान एक शख्स आया और काम में बोला कि 'देखो अब ध्यान राख्ज्यो। एक चीज समझ जायज्यो। पिताजी पधार जाय है आखिरी धाम। पर जाते-जाते भी इतो देग्या। उसे संभाल लो वो ही बहुत।' पता भी नहीं वो शख्स कौन था।
अरविंद सिंह मेवाड़ का जन्म 13 दिसंबर 1944 व निधन 16 मार्च 2025
अरविंद सिंह मेवाड़ का जन्म 13 दिसंबर 1944 को उदयपुर में मेवाड़ घराने के महाराणा भगवत सिंह मेवाड़ और शुशीला कुमारी के घर हुआ। वे परिवार में दूसरे पुत्र थे। प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही प्राप्त करने के बाद, उन्हें वर्ष 1957 में मेयो कॉलेज, अजमेर भेजा गया जहाँ से उन्होंने 1961 में सीनियर कैम्ब्रिज परीक्षा उत्तीर्ण की। महाराणा भूपाल कॉलेज, उदयपुर से अंग्रेज़ी साहित्य, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र विषयों में स्नातक किया। होटल प्रबंधन की पढ़ाई के लिए उन्होंने यूके के मेट्रोपॉलिटन कॉलेज, सेंट एल्बंस से कोर्स किया और फिर अमेरिका के शिकागो में भी अनुभव प्राप्त किया।
अरविंद सिंह मेवाड़ एचआरएच ग्रुप ऑफ़ होटल्स के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक थे, जिसकी स्थापना उनके पिता ने 1963 में की थी। उन्होंने उदयपुर स्थित सिटी पैलेस में पर्यटकों के लिए क्रिस्टल गैलरी और विंटेज कार संग्रहालय खोला, जो विश्वभर के पर्यटकों को आकर्षित करता है। वे 1981 से 1984 तक अपने पिता के निजी सचिव रहे और लेक पैलेस होटल के महाप्रबंधक भी रहे। शिकागो में भी उन्होंने व्यवसायिक अनुभव प्राप्त किया।
अरविंद सिंह मेवाड़ के दो बेटी व एक बेटी
वर्ष 1972 में अरविंद सिंह मेवाड़ का विवाह कच्छ के शाही परिवार की विजयराज कुमारी से हुआ। उनके तीन बच्चे हुए - दो बेटियाँ, भार्गवी कुमारी और पद्मजा कुमारी, और एक पुत्र, लक्ष्यराज सिंह मेवाड़। 16 मार्च 2025 को, 80 वर्ष की आयु में उदयपुर स्थित अपने निवास स्थान पर उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद 16-17 मार्च को सिटी पैलेस पर्यटकों के लिए बंद रखा गया। 17 मार्च को उनकी अंतिम यात्रा शंभू निवास से शुरू हुई और महासती श्मशान स्थल पर उनका अंतिम संस्कार हुआ, जिसमें उनके पुत्र लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने मुखाग्नि दी।
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