Jaisalmer Accident: हिरण बचाने निकले 4 वन्यजीव रक्षकों की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत, इलाके में पसरा शोक

Jaisalmer Accident: राजस्थान के जैसलमेर जिले में वन्यजीवों की रक्षा के लिए समर्पित चार जांबाज़ों की रात को एक दिल दहला देने वाले सड़क हादसे में जान चली गई। लाठी थाना क्षेत्र में रात करीब 10 बजे एक ट्रक और कैंपर वाहन की आमने-सामने की टक्कर में राधेश्याम विश्नोई, श्याम प्रसाद, कंवराज सिंह भाटी और सुरेंद्र चौधरी की मौके पर ही मौत हो गई। ये सभी हिरणों के शिकार की सूचना पर जंगल की ओर जा रहे थे।

हादसा लाठी कस्बे में स्थित गैस एजेंसी के पास हुआ, जब सामने से आ रहे एक ट्रक ने उनकी गाड़ी को जबरदस्त टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयानक थी कि कैंपर गाड़ी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और चारों शव उसके अंदर फंस गए। बाद में क्रेन की मदद से वाहन को काटकर शवों को बाहर निकाला गया और पोकरण अस्पताल भिजवाया गया।

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'हिरणों के रक्षक' राधेश्याम का समर्पण

28 वर्षीय राधेश्याम विश्नोई को 'हिरणों के मसीहा' के रूप में जाना जाता था। उन्होंने 1,000 से अधिक हिरणों को रेस्क्यू कर नई ज़िंदगी दी थी। उन्हें सेंचुरी एशिया यंग नेचरिस्ट अवॉर्ड सहित कई सम्मानों से नवाजा गया था। वर्षों से वे जैसलमेर क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण में जुटे हुए थे।

साथी रक्षकों की प्रेरक कहानियां

श्याम प्रसाद विश्नोई भारतीय सेना से सेवानिवृत्त थे और वन्यजीव संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। कंवराज सिंह भाटी, भादरिया गोशाला में कार्यरत थे और वन्यजीवों के लिए प्रतिबद्ध थे। सुरेंद्र चौधरी, बालोतरा निवासी, हाल ही में वन रक्षक के पद पर लाठी रेंज में तैनात हुए थे। ये सभी बिना किसी स्वार्थ के, रात के अंधेरे में वन्यजीवों की रक्षा के लिए निकले थे।

प्रदेश भर में शोक की लहर

इस दर्दनाक हादसे ने पूरे राजस्थान को झकझोर कर रख दिया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, सालेह मोहम्मद और अन्य नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया। गजेंद्र सिंह शेखावत ने ब्राज़ील से ट्वीट करते हुए लिखा कि यदि वे भारत में होते तो परिजनों का दुख बांटने अवश्य पहुंचते।

शहीद का दर्जा देने की मांग

अखिल भारतीय जीव रक्षा विश्नोई सभा ने इस हादसे को "बलिदान" बताते हुए सरकार से चारों दिवंगतों को शहीद का दर्जा देने की मांग की है। सभा ने यह भी आग्रह किया है कि अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान से किया जाए, परिजनों को सरकारी नौकरी और मुआवजा दिया जाए, तथा मरणोपरांत उन्हें अमृता देवी विश्नोई पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया जाए। संगठन ने भविष्य में उनकी याद में शहीद स्मारक निर्माण की घोषणा भी की है।

शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद चारों के शव परिजनों को सौंपे गए और समाजिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। पूरे क्षेत्र में गमगीन माहौल है और वन्यजीव प्रेमियों की आंखें नम हैं।

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