दिल्ली छोड़कर क्यों चुना जयपुर एयरपोर्ट? फर्जी वीजा के साथ पकड़े गए 3 युवक, बढ़ी सुरक्षा एजेंसियों की टेंशन
Jaipur Airport Fake Visa Case: राजस्थान की राजधानी जयपुर के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर फर्जी वीजा के जरिए विदेश जाने की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। एयरपोर्ट पर जांच के दौरान तीन ऐसे युवक पकड़े गए, जो नकली टूरिस्ट वीजा के सहारे इराक जाने की तैयारी में थे। शुरुआती जांच में सामने आया कि तीनों के दस्तावेज संदिग्ध थे, जिसके बाद एयरपोर्ट प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
मामला सामने आते ही सुरक्षा एजेंसियों में हलचल मच गई। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आखिर इन युवकों तक फर्जी वीजा पहुंचा कैसे और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं। इराक जैसे संवेदनशील देश का नाम सामने आने के बाद जांच एजेंसियां इस मामले को काफी गंभीरता से देख रही हैं।

एयरपोर्ट जांच में खुला राज
जानकारी के मुताबिक, 12 मई को जयपुर एयरपोर्ट पर यात्रा से पहले दस्तावेजों की जांच की जा रही थी। इसी दौरान अधिकारियों को तीन यात्रियों के वीजा और कागजात पर शक हुआ। जब दस्तावेजों की गहराई से जांच की गई तो वीजा फर्जी निकले। इसके बाद एयरपोर्ट पुलिस को बुलाया गया और तीनों युवकों को मौके से हिरासत में ले लिया गया।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुरेश कुमार निवासी उत्तर प्रदेश और आलोक कुमार व रुपेश यादव निवासी बिहार के रूप में हुई है।
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BNS की धाराओं में केस दर्ज
जयपुर ईस्ट की डीसीपी रंजीता शर्मा ने बताया कि एयरपोर्ट प्रशासन की शिकायत के बाद तीनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है।
जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि फर्जी वीजा किस एजेंट या नेटवर्क ने तैयार किया था। इसके अलावा यह भी जांच हो रही है कि आरोपी इराक किस मकसद से जा रहे थे।
जयपुर एयरपोर्ट चुनने पर सवाल
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले इन युवकों ने विदेश जाने के लिए जयपुर एयरपोर्ट का ही इस्तेमाल क्यों किया। आमतौर पर ऐसे मामलों में दिल्ली जैसे बड़े एयरपोर्ट का इस्तेमाल ज्यादा होता है।
इसी वजह से पुलिस को शक है कि इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है, जो अलग-अलग राज्यों के लोगों को फर्जी दस्तावेज बनाकर विदेश भेजने का काम करता है।
मानव तस्करी एंगल की भी जांच
पुलिस अब इस मामले को मानव तस्करी और फर्जी वीजा रैकेट से जोड़कर भी देख रही है। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं आरोपी किसी बड़े नेटवर्क के झांसे में तो नहीं आए थे।
चूंकि मामला इराक जैसे देश से जुड़ा है, इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलू को भी ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। पुलिस की स्पेशल टीमें पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी हैं और कई अहम सुराग जुटाए जा रहे हैं।
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