Rajasthan: रामगढ़ विधानसभा सीट के उपचुनावों का इतिहास, इस बार किसका होगा गढ़ पर कब्जा ?
Rajasthan By Election: राजस्थान की 7 विधानसभा सीटों पर उपचुनावों की तारीखों का ऐलान हो गया है। अब चर्चा शुरू हो गई है कि इन विधानसभा सीटों पर किसका कब्जा होगा। इनमें से अलवर जिले में रामगढ़ विधानसभा सीट की चर्चा ज्यादा हो रही है।
अलवर जिले की रामगढ़ विधानसभा सीट अब तक कांग्रेस का गढ़ रही है लेकिन विधायक जुबेर खान के निधन के बाद इस सीट पर उपचुनाव होने है।
अलवर की रामगढ़ विधानसभा चुनाव में उपचुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही क्षेत्र में राजनीति उबाल जोर मारने लगी है। टिकट के दावेदार अपने दलों के बड़े नेताओं से सम्पर्क साधने में जुटे हैं। वहीं प्रमुख राजनीतिक दल अभी कार्यकर्ताओं एवं क्षेत्रीय लोगों से फीडबैक लेने और सर्वे में जुटे हैं।

राजस्थान में उपचुनाव की यह है तारीख
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने राजस्थान उपचुनाव की घोषणा कर दी है। राजस्थान की 7 सीटों पर 13 नवंबर को मतदान होगा वहीं 23 नवंबर को मतगणना होगी। बता दें कि राजस्थान में होने वाले उपचुनावों के लिए 20 नवंबर तक नामांकन भरे जाएंगे।
कांग्रेस का गढ़ है रामगढ़
रामगढ़ में कांग्रेस जहां अपने गढ़ को बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती तो वहीं भाजपा भी कांग्रेस के गढ़ को फतेह करने के लिए तमाम सिसायी दांव पेंच लगाने में जुटी है। हालांकि भाजपा में दावेदारों की लंबी कतार होने के से नेताओं की माथापच्ची ज्यादा हो रही है।
रामगढ़ विधायक रहे जुबेर खां के निधन के चलते रामगढ़ विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना है। कांग्रेस व भाजपा में उपचुनाव को लेकर हलचल दिखाई पड़ रही है, तीसरे मोर्चे के दलों ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
इन दलों की निगाह कांग्रेस व भाजपा के टिकट बंटवारे पर टिकी है। दोनों प्रमुख दल मजबूत उम्मीदवार की तलाश में जुटे हैं।
कांग्रेस में जहां प्रत्याशी चयन को लेकर ज्यादा मारामारी दिखाई नहीं दे रही है तो वहीं भाजपा में दावेदारों की लिस्ट लम्बी होने से जद्दोजहद कुछ ज्यादा ही हो रही है। कांग्रेस खेमे के लिए सबसे बड़ी वजह यह भी है कि इस सीट पर पिछले दो दशक से ज्यादा समय से कांग्रेस की ओर से जुबेर खां या उनके परिवार के सदस्य चुनाव लड़ते रहे हैं।
जुबेर खां के आकस्मिक निधन के बाद क्षेत्र में उनके प्रति उपजी सहानुभूति का लाभ उठाने के लिए कांग्रेस इस बार भी जुबेर खां के परिवार के किसी सदस्य पर दांव लगाने की तैयारी में है।
कांग्रेस के कौन हो सकता दावेदार
अभी जुबेर खां के छोटे पुत्र आर्यन के रामगढ़ सीट पर उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी होने की उम्मीद ज्यादा है। जुबेर खां की पत्नी साफ़िया खां का शोक के चलते अभी घर से बाहर निकलना संभव नहीं हो पा रहा है, इस कारण आर्यन को इस बार उपचुनाव में कांग्रेस की ओर से उतारने की पूरी तैयारी है।
भाजपा के कितने दावेदार
रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव के लिए भाजपा में टिकट के दावेदारों की लंबी कतार है। हालांकि भाजपा में ज्ञानदेव आहूजा भी इस सीट पर डेढ़ दशक से ज्यादा समय से सक्रिय रहे हैं और चुनाव लड़े हैं।
वो यहां से कई बार भाजपा के विधायक भी रहे हैं। इस कारण उपचुनाव में भी भाजपा की ओर से ज्ञानदेव आहूजा पर फ़िर से दांव लगाने की चर्चा जोरों पर है।
वहीं ज्ञानेदव आहूजा के भतीजे जय आहूजा भी 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर से भाग्य आजमा चुके हैं, लेकिन वे ज्ञानदेव आहूजा की तरह क्षेत्र में प्रभाव कायम नहीं कर पाए और तीसरे नम्बर पर लुढ़क गए।
रामगढ़ सीट पर सुखवंत सिंह का दावा भी मजबूत माना जा रहा है। वो 2018 में यहां से भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं, हालांकि सुखवंत यहां से जीत नहीं सके, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी साफ़िया खां को कड़ी टक्कर देने में कामयाब रहे थे।
वहीं 2023 के विधानसभा चुनाव में सुखवंत सिंह को भाजपा का टिकट नहीं मिलने पर वे बागी होकर असपा से चुनाव लड़े और दूसरे नम्बर पर रहकर कांग्रेस को टक्कर देते दिखे। इस कारण सुखवंत सिंह दावेदारी को लेकर चर्चा में हैं।
इसके अलावा पूर्व विधायक बनवारीलाल सिंघल ने इस बार रामगढ़ से उपचुनाव में भाजपा टिकट पर दावेदारी जताई है। हालांकि वो दो बार अलवर शहर से भाजपा टिकट पर चुनाव जीते, लेकिन बाद में पिछले दो विधानसभा चुनाव में उन्हें पार्टी ने कहीं से भी टिकट नहीं दिया।
सिंघल भी इस बार रामगढ़ उपचुनाव में भाजपा टिकट पर अपना दावा जता रहे हैं। इसके अलावा भी रामगढ़ सीट पर भाजपा टिकट के कई और दावेदार हैं, लेकिन वे बायोडाटा तक सीमित हैं, चर्चा में ज्यादा नहीं है












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