kumher kand Rajasthan: भरतपुर में 32 साल पहले सिनेमा हॉल से 16 मौतों तक कैसे पहुंचा कुम्हेर कांड?
Bharatpur Kumher Mass Murder Case 9 Accused Given Life : राजस्थान में भरतपुर कोर्ट ने कुम्हेर कांड 1992 के नौ दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए 41 आरोपियों को बरी किया है। जानिए कुम्हेर कांड भरतपुर की पूरी कहानी।
kumher Hatyakand Bharatpur Rajasthan: राजस्थान में भरतपुर जिले के कुम्हेर कांड 1992 में 32 साल बाद 30 सितंबर 2023 को कोर्ट का फैसला आया है। विशिष्ट न्यायाधीश अनुसूचित जाति-जनजाति न्यायालय भरतपुर ने शनिवार को कुम्हेर नरसंहार के 9 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। 41 आरोपी बरी कर दिए गए हैं।
दरअसल, भरतपुर जिले में तीन दशक पुराना कुम्हेर हत्याकांड एक तरह से जातीय संघर्ष था। इसमें जाट व दलित समुदाय के जाटव आमने-सामने हो गए थे और 16 लोगों की जान चली गई थी। कई घरों को आग हवाले कर दिया था। आज फैसले की घड़ी पर कुम्हेर के लोगों के जेहन में इस कांड की यादें फिर ताजा हो गईं।

एडवोकेट राजेंद्र श्रीवास्तव के अनुसार छह जून 1992 को भरतपुर जिले के कुम्हेर कस्बे में दो समाजों के बीच आपसी कहासुनी को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि इसमें 16 लोगों की मौत थी। 44 लोग घायल हो गए थे। 16 मृतकों में से 11 की तो ठीक से शिनाख्त तक नहीं हो पाई थी। इस मामले में दो एफआईआर दर्ज हुई थी।
कुम्हेर हत्याकांड में क्या हुआ था?
forwardpress नाम की एक वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार 1 जून 1992 में एक सिनेमा हॉल में फिल्म देखने आए जाटव (दलित) जाति के चार लड़कों को कथित रूप से जमीन पर बैठने को कहा गया था। इस बात को लेकर उनकी कहासुनी हो गई थी। तब सिनेमा हॉल में जाट समुदाय के कर्मचारियों ने दबंगई दिखाते हुए जाटव युवकों की पिटाई कर दी थी।

कहते हैं कि सिनेमा हॉल में जाटव युवकों के साथ मारपीट की घटना के दो दिन बाद कुम्हेर में यह खबर फैल गई थी कि जाट समाज की एक युवती का 'उत्पीड़न' हुआ है। वारदात को जाटवों के लड़कों ने अंजाम दिया है।
मामला तूल पकड़ता गया और 6 जून 1992 को कुम्हेर के चामुंडा देवी मंदिर परिसर में जाट पंचायत हुई, जिसमें करीब 10 हजार लोग एकत्रित हुए थे। कहा जाता है कि जाट पंचायत में मौजूद एकमात्र जाटव नत्थी सिंह की हत्या कर दी गई और उसके खून का टीका लगाकर लोगों को जाटव समाज के खिलाफ भड़काया गया।

बाद में भीड़ ने कुम्हेर के जाटव मोहल्ले और दलितों की बस्तियों पर हमला बोल दिया। लोगों के घरों को आग के हवाले कर दिया। घरों में मौजूद लोगों को बाहर निकलने तक का मौका नहीं दिया। 16 लोग मारे गए। कई जगहों पर मौतों की संख्या 17 भी बताई जाती है।
जून 1992 को कुम्हेर (भरतपुर) में दलितों के नरसंहार में न केवल महिला, पुरुष व बच्चे मारे गए थे बल्कि बड़ी संख्या में पशुधन भी जिंदा जल गया था। घटना के तीन बाद ही सीबीआई कुम्हेर पहुंच गई थी और पहली एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
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संवाद सूत्र-विजय रिंकू एलीज़ा, भरतपुर, राजस्थान












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