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Rajasthan News: सचिन पायलट ने लंदन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में की लंबी चर्चा,जानिए क्या बोले ?

Sachin Pilot in Oxford University: राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम और कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने शुक्रवार को लंदन की प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में भारत के लोकतंत्र और लोकसभा चुनाव 2024 पर लंबी चर्चा की

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की इस चर्चा में पायलट ने भाजपा की नीतियों की जमकर आलोचना की। साथ ही उन्होंने कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों की पूरजोर वकालत भी की। आपकों बताते है पायलट के स्पीच की एक- एक कर पूरी खास बातें।

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सचिन पायलट ने कहा कि भाजपा को इस बार बहुमत नहीं मिला है। NDA की सीटें कम हुई जबकि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन मज़बूत विपक्ष के रूप में खड़ा हुआ है।

यह इस वजह से है कि देश में भाजपा सरकार ने पिछले 10 सालों में जो तानाशाही रवैया अपनाया था, जिस तरह से एकतरफ़ा फ़ैसले लिए थे, नोटबंदी GST जैसे निर्णय जनता पर थोपे और सबसे बड़ी बात इस चुनाव में 400 का नारा दिया था, उससे जनता में ग़लत संदेश गया।

जबकि कांग्रेस ने महंगाई, बेरोज़गारी, रोज़गार और संविधान को मज़बूत करने जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा ने देश को एक सूत्र में पिरोने का काम किया है।

यही वजह है कि कांग्रेस ने पिछले 2 चुनावों के मुक़ाबले इस बार बहुत बेहतर प्रदर्शन किया है." उक्त बातें शुक्रवार को कांग्रेस के महासचिव सचिन पायलट ने लंदन की प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में दिए लंबे भाषण में कहा।

सचिन पायलट ने कहा कि रूलिंग पार्टी ने इस बार चुनावों में देश के वोटर्स को टेकन फॉर ग्रांटेड ले लिया, बीजेपी की ओर से प्रचार में 370, 400 पार के नारे बोले गए, जिसमें एक अजीब सा एरोगेंस झलका।

जिसका सबक वोटर्स ने सिखाया। सचिन पायलट ने आगे यह भी कहा कि अब देश में गठबंधन की सरकार है लेकिन ये कितने दिन चलेगी इस पर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है।

उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री जदयू नेता नीतीश कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि वो कुछ महीनों पहले तक इंडिया गठबंधन में थे।

सचिन पायलट ने कहा भारत के चुनाव ने साबित कर दिया कि देश में लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी है। दुनिया के कई ऐसे देश हैं जहाँ मतदान तो होता है लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था को मज़बूत बनाने में उनका कोई योगदान नहीं है।

भारत में जिस तरह 90 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने सात चरणों में अपने मतों का प्रयोग किया वो ये बताने और समझाने के लिए काफ़ी है कि देश की जनता संवैधानिक मूल्यों के प्रति कितनी सजग है।

सचिन पायलट ने यह भी कहा कि पिछले 10 सालों में देश की संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने के लिए प्रयास हुए हैं।

किसी भी देश में लोकतंत्र को मज़बूत करने के लिए सवाल पूछने का अधिकार होना चाहिए संसद में डिबेट चलनी चाहिए एकतरफ़ा फ़ैसले और थोपें गए निर्णय जनता के हित में नहीं होते हैं।

सचिन पायलट ने कहा कि भाजपा सरकार ने 10 साल में डेटा को छिपाने का काम किया है रोज़गार और बेरोज़गारी के सही आंकड़े जनता के सामने नहीं रखे गए। सदन के भीतर तानाशाही रवैया अपनाते हुए विपक्ष के सांसदों को बाहर निकालने का फ़ैसला इसकी एक बानगी था।

सचिन पायलट ने कहा भारत की जनता ये समझ चुकी है कि पिछले 10 साल में जिस तरह से BJP ने एक नेरेटिव सेट करने की कोशिश की।

एक के बाद एक केंद्रीय एजेंसियों की मदद से विपक्ष के नेताओं को टारगेट किया गया। 96 फ़ीसदी ED की कार्रवाई विपक्षी नेताओं के ख़िलाफ़ हुई. इससे जनता में आक्रोश नज़र आया।

सचिन पायलट ने हरियाणा उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्य का ज़िक्र करते हुए कहा कि इन राज्यों में भाजपा बहुत मज़बूती थी राजस्थान जैसे राज्यों में चार महीने पहले BJP सत्ता में आयी थी लेकिन लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन ने 11 सीटें जीती है जो दर्शाता है कि भाजपा पर जनता को भरोसा ख़त्म हो रहा है।

सचिन पायलट ने कहा कि भारत में भाजपा में आंतरिक लोकतंत्र जैसी व्यवस्था नहीं है वहाँ ग़लत नीतियों की आलोचना नहीं की जाती जबकि कांग्रेस में हर मुद्दे पर बोलने का अधिकार है। अपनी बात कहने और आलोचना करने का अधिकार है यही फ़र्क कांग्रेस को दूसरी पार्टियों से अलग बनाता है।

इस बार के चुनाव में धार्मिक मुद्दों पर बात करते हुए सचिन पायलट ने कहा कि भाजपा ने इस बात की असल मुद्दों की बजाय सांप्रदायिक मुद्दों पर चुनाव लड़ने की कोशिश की।

राम मंदिर के ज़रिए जनता से वोट माँगे गए लेकिन जनता ने इन मुद्दों को नकार दिया। जहाँ राम मंदिर बना वहाँ पर भाजपा का हारना ये बता रहा है कि देश की जनता कितनी समझदार है।

सचिन पायलट ने आगे कहा कि पिछले दस सालों में कई एजेंसियों की मदद के सहारे भाजपा ने राहुल गांधी की छवि बिगाड़ने की कोशिश की गई।

लेकिन राहुल तमाम दुष्प्रचार के बावजूद मज़बूत नेता बनकर उभरे हैं। इस बार राहुल गांधी के साथ देश की जनता खड़ी दिखाई दी संविधान को बचाने के प्रयास और जिस तरह से उन्होंने जो संवेदनशील मुद्दे चुनाव में उठाए जनता ने उनकी सराहना की है।

राहुल गांधी के चुनावी भाषणों में युवाओं के रोज़गार, अग्निवीर स्कीम, अमीर ग़रीब के बीच बढ़ती खाई किसानों की आय बढ़ाने के मुद्दों ने चुनावी एजेंडा सेट करने का काम किया था।

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