एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: किसान नेता रामपाल जाट ने भारत सरकार के बजट को लेकर यह नसीहत क्यों दी ? पढ़िए सिर्फ यहां

Union Budget 2024: मोदी सरकार 3.0 का बजट आना वाला है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक बार फिर देश का बजट पेश करेंगी।

देश के साथ राजस्थान में चर्चा है कि क्या इस बार प्रदेश के लिए खास होगा। इस बजट में केंद्र सरकार देशवासियों का क्या-क्या सौगातें देगी और किन सौगातों का इंतजार है। साथ ही साथ प्रदेश को कितनी उम्मीदें है।

केंद्र सरकार के बजट को लेकर वन इंडिया हिंदी की टीम ने राष्ट्रीय किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट से खास बातचीत की। इस दौरान देश और राजस्थान के किसानों की समस्या और उनकी समाधान की चर्चा की।

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INTERVIEW RAMPAL JAAT: राष्ट्रीय किसान महापंचायत अध्यक्ष रामपाल जाट ने केंद्र सरकार के बजट को लेकर कई उम्मीदें जताई है साथ ही नसीहतें भी दी है। इन सबसे बड़ी नसीहत है कि विदेश निवेश के भरोसे काम करना बढ़ करे सरकार। योजनाएं ऐसी बनाई जाए कि लोग आकर्षित होकर निवेश करने आएं।

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    एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: किसान नेता रामपाल जाट ने भारत सरकार के बजट को लेकर यह नसीहत क्यों दी ?

    रामपाल जाट ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है और यह बजट भारत का है सबसे पहले तो कृषि प्रदान देश के अनुकुल यह बजट होना चाहिए। भारत सरकार यह मानती है कि 54 प्रतिशत से अधिक लोग कृषि पर सीधे रूप से निर्भर है।

    इसके अतिरिक्त जो सहायक धंधे है उससे यह संख्या पहुंची है 75 प्रतिशत। जाट ने केंद्र सरकार से बढ़ी मांग करते हुए सीधे तौर कहा है कि जितनी जनसंख्या है उसके अनुपात में बजट की राशि आवंटित की जानी चाहिए।

    अध्यक्ष रामपाल जाट ने बजट की दिशा कृषि को प्रगतिशील,समृद्धशाली बढ़ाने वाली होने की मांग की है। जाट ने कहा कि राष्ट्र और किसान में कोई फर्क नहीं है यदि किसान समृद्धशाली होगा तो राष्ट्र समृद्धशाली होगा।

    वहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष जाट ने भारत सरकार के पूर्व वित्त मंत्री अरूण जेटली पर पलटवार करते हुए कहा कि एक बात बात सातवें वेतन आयोग के लागू करने के दौरान पूर्व वित्त मंत्री अरूण जेटली ने यह बात कही थी कि वेतन आयोग इस वजह से दे रहे कि इससे क्रय शक्ति बढ़ेगी तो बाजार गुलजार होगा और यह जो जिनके कहा था यह है 5 प्रतिशत से भी कम यानी सरकारी कर्मचारी वर्ग ।

    हम यह कह रहे है कि यहीं वित्तीय शक्ति बढ़ जाए 75 प्रतिशत जनसंख्या की तो बाजार के पंख लग जाएंगे। बाजार के पंख लगाने वाली दशा होनी चाहिए इस बजट की।

    सातवें वेतन आयोग से कवर होने वाले लोग है सरकारी कर्मचारी। यह 5 प्रतिशत से भी कम है । जब सरकार मानती है कि अगर 5 प्रतिशत लोगों के पास ही पैसा आने से बाजार में रौनक आती है तो अगर 75 प्रतिशत लोगों के पास पैसा आएगा तो रौनक दौड़ेगी, खुशहाली आएगी।

    इसलिए यहां कि अर्थव्यवस्था को गति देने का काम तब होता जब किसान की जेब में पैसा आता है। जो पैसा बढ़े लोगों की जेब में आता है, धनपतियों की जेब में आता है,वो तिजोरी में जमा हो जाता है, बाजार में नहीं आता है और जो पैसा किसान की जेब में आता है, किसान अपनी जेब में पैसा आते ही तत्काल बाजार में जाता है, खरीद के लिए।

    भारत सरकार भी मानती है कि देश की अर्थव्यस्था बढ़ाने के लिए रीढ है कृषि, कृषि में किसानों की आय बढ़ और आय बढ़ाने के लिए जरूरी है उनके खेतों को पानी मिले, फसल को दाम मिले और फसल को दाम के लिए जरूरी है जो भारत सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है, वो तो कम से कम किसानों को मिले। न्यूनतम ही नहीं मिलता तो न्यूनतम मिले इसके लिए खरीद की गारंटी का कानून बने।

    खरीद की गारंटी का कानून बनता जो भारत सरकार ने 2017 में मॉडल एक्ट बनाया था वो लागू हो, यह तो भारत सरकार का चिंतन है, उनका ही काम है वहीं लगातार कह रहे है हम किसान को उसकी जिंसों के लाभकारी मूल्य दिलाएंगे।

    और संसद में एक बार नहीं अनेक बार घोषणा की है1966 से लेकर आज तक भारत सरकार ने अनेक बार कहा है, उनकी समितियों, आयोगों ने कहा है कि किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाएंगे तो भारत समृद्ध होगा।

    समृद्ध भारत की कल्पना ही हमारे दिमाग में होना चाहिए। अभी तो पिछले बजट की दिशा ही भटकी हुई है। उसमें यह दिशा नहीं है उसमें तो गरीब को छप्पर दिलाएंगे। अरे भाई 75 वर्ष हो गए है, उसकों सक्षम क्यों नहीं बनाते कि वो खुद छप्पर बना ले।

    पेट्रोल डीजल के बढ़ते दामों और आय को दोगूना करने के दावे को लेकर बोले रामपाल जाट कहा कि कृषि में प्रयुक्त होने वाले जितने भी सामग्री और कच्चा माल है यदि वो महंगा होगा तो कृषि की लागत बढ़ेगी, इसलिए कृषि में काम आने वाली डीजल, बिजली, खाद, कीटनाशक, उपकरण, यह सब कम दामों पर हो लेकिन आपने तो कृषि पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगा रखी है वो समाप्त हो।

    ऐसी चीजों से खेती का खर्चा घटेगा और खर्चा घटने का अर्थ होता है वो आय बढ़ने वाले रूप में दिखता है। जो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना है जब सरकार इसे लेकर आई तब कहा कि वैसे तो सभी कामों में जोखिम है लेकिन सर्वाधिक जोखिम वाला कोई काम है तो वो है कृषि।

    रामपाल जाट ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि सरकार खेती में सर्वाधिक जोखिम को कवर करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लाई गई उससे किसानों को लाभ नहीं हो रहा है, आज तो सोच यह हो गई कि पैसा किसानों का, तंत्र सरकारों का और लाभ कम्पनियों का तो कम्पनी कमा रही है।

    क्या यह मॉडल होना चाहिए हमारा, इस सिस्टम को ठीक करना चाहिए। न्यूनतम समर्थन मूल्य खरीद की गारंटी के कानून में 22 फसल आती है इसके अलावा और भी फसलें है उनका भी भारत सरकार जो भी न्यूनतम समर्थन मूल्य समझे तो किसान को दे।

    तीसरा यह जो खेत को पानी देने की बात है उसमें भारत सरकार ने 30 लिंक परिजनाएं चिन्हित की है 1972 से एक अभियान शुरू हुआ उसका नाम है नदी जोड़ों अभियान, इस अभियान में राजस्थान की पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना ऐसे में जो नदीं जोड़ों योजना है इसके कारण से 30 लिंक परियोजनाएं पूरी हो जाती है तो सिंचाई बढ़ जाएगी। आज तो पूरे देश में जो सिंचित क्षेत्र है कुल कृषि योग्य भूमि का वो 40 प्रतिशत से कम है,तो इसकों आप 60 प्रतिशत से ऊपर लेकर आइए 75 तक ले जाओं, अपने आप खुशहाली आएगी।

    समृद्धि लाने के लिए खेत को पानी मिलता है वो जादू का काम करता है और फिर मिट्टी सोना उगलती है तो ऐसा काम यदि बजट में होता है तो सिंचाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    जिससे यह सारी सिंचाई योजनाएं पूरी हो और यह जो पेयजल योजनाएं है। गांव के लिए इनकों बढ़ाने की जरूरत नहीं है यदि सिंचाई परियोजना बनेगी तो पीने का पानी तो स्वत: ही मिल जाएगा और पीने के पानी की योजना से सिंचाई असम्भव है। जबकि सिंचाई योजना से पीने के पानी की योजनाएं सम्भव है तो दिशा ठीक करने की जरूरत है।

    हमारी सरकारें जो विदेशी निवेश है इसकों ऐसा मानती है जैसे इन्होने कोई विश्व विजय कर ली हो, यह दिशा ही गलत है, विदेशी पैसा कभी विकास करने नहीं आता है। चिड़िया चुगने आती है पूंछ कटाने आती है क्या ?

    इस बजट में सरकार पैसों वालों के पिछे दौड़ना छोड़ दे और यह कहे कि हम स्वयं के आधार पर यह सारी योजनाएं तय करेंगे जिसकों जरूरत होगी वो पैसा लगाएंगा, हम मना नहीं करेंगे।

    राजस्थान में पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान के सवालों पर बड़ी बेबाकी से जवाब देते हुए वन इंडिया हिंदी की टीम का धन्यवाद जताते हुए कहा कि सहीं बात है कि एक ही प्रदेश में दो प्रदेश बस रहे है।

    राजस्थान फल, फूल, मसाला, औषधि, फसलें,बाजार, सरसों मूंग जौ इसमें हम देश में प्रथम है। जो किन्नू, अमरूद,संतरा, सीताफल, बैर वो भारत में किसी के पास नहीं है।

    यदि हम कहे कि प्राकृतिक संशाधनों की दृष्टि से राजस्थान धनी होते हुए भी निर्धन प्रदेश है, तो राजस्थान की निर्धनता को दूर करे,जो प्राकृतिक संशाधन हमारे पास है उसका उपयोग ले। आज भी यदि राजस्थान की जमीन को पानी मिल जाए।

    अभी जैसे पश्चिमी राजस्थान की बात करे तो इंदिरा गांधी नहर परियोजना ,गंग नहर परियोजना आने से वहां का दृष्य बदल गया। वहां के बाजारों में रौनक अलग ढंग की है और पूर्वी राजस्थान के बाजारों में वो रौनक नहीं है जहां सिंचाई नहीं है।

    इसलिए यदि यह काम ह जाए तो पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी राजस्थान दोनों को भी हम भौगोलिक दृष्टि से इनमें जो भिन्नता है उनकी भिन्नताओं के आधार पर काम करे,

    आज गोदाम की बात करे यदि पश्चिमी राजस्थान में हम गोदाम बनाए तो पूरे भारत का अनाज हम रख सकते है। उससे हमारी पैदा भी दोगूनी होगी, अनाज का संग्रहण भी हो जाएगा, यह जो काम है इस काम के लिए जरूरी है हम सब मिलकर पूर्वी राजस्थान की विशेषताओं का उपयोग करे। पश्चिमी राजस्थान की विशेषताओं का उपयोग करे।

    सिंचाई,कृषि बीमा, मंडिया जैसे आधार भूत सुविधाएं हो जाए तो हम पूरे देश में नम्बर वन हो जाए । इनकों यह विचार करते हुए राजस्थान की समृद्धि के बारे में सोचना चाहिए। राजस्थान की समृद्धि का मतलब है पूरे देश की समृद्धि।

    सबसे बड़ा भू भाग आज भी राजस्थान के पास है ऐसे राजस्थान में अगर हम इनकी सम्भावनाओं को तलाशे तो भरपूर सम्भावनाएं है, उन सम्भावनाओं को तलाशते हुए उनपर आगे बढ़ना यदि यह काम बजट करता है तो यह समृद्धि की ओर बढ़ने वाला होगा अन्यथा यह खानापूर्ति होगी जो अब तक होती रही है फिर तो रूटिन का बजट हो जाएगा।

    हम कहते है कि रूटिन से हटकर चलों केवल 5 वर्ष फिर आपकों दृष्य दिख जाएगा समृद्ध राजस्थान का, हिंदुस्तान हमकों कैसा चाहिए तो विजन के साथ आगे बढ़ों विजन के लिए जरूरत है नई दिशा की,नई स्फूर्ति की, नई योजनाओं की, घिसी पिटी, रटी पिटी की नहीं उनकों हटाओ ।

    यह जो विदेशी निवेश का जो चश्मा चढ़ा रखा है इस चश्मे को उतारों तो विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए काम मत किजिए काम ऐसा करो कि स्वयं आकर्षित होकर आ जाए , हमे कहने की जरूर नहीं पड़े, हाथ जोड़ने की जरूरत नहीं पड़े, यह जो काम है यदि हम यह काम करेंगे तो हम सबके लिए अच्छा होगा।

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