Deraj Ram Duger : लालटेन की रोशनी में पढ़कर RAS बने देराज राम दुगेर, 2019 में हुआ विद्युत कनेक्शन

बाड़मेर, 14 जुलाई। बचपन से बेइंतहा गरीबी देखी...। पेट भरने के लिए भेड़-बकरियां चराई...। हॉकर भी बना...। लालटेन-चिमनी की रोशनी में पढ़ाई की...। तमाम मुश्किल हालात बुलंद हौसलों के सामने बौने साबित हुए और नतीजा यह है कि जिस शख्स की हम बात कर रहे हैं वो आज आरएएस अधिकारी बन गया है। नाम है देराज राम दुगेर।

मुक्ता राव ने हासिल किया प्रथम स्थान

मुक्ता राव ने हासिल किया प्रथम स्थान

राजस्थान लोक सेवा आयोग अजमेर (आरपीएससी) ने आरएएस परीक्षा 2018 का परिणाम मंगलवार देर रात जारी किया है। झुंझुनूं के चिड़ावा की रहने वाली मुक्ता राव ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है। टॉपर्स में दूसरे स्थान पर टोंक के मनमोहन शर्मा व तीसरी स्थान पर जयपुर की शिवाक्षी खांडल ने बाजी मारी है।

 कानोड़ के रहने वाले हैं देराज राम दुगेर

कानोड़ के रहने वाले हैं देराज राम दुगेर

RAS परीक्षा 2018 में 302वीं प्राप्त करने वाले देराज राम दुगेर मूलरूप से राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर के बायतु इलाके कानोड़ के रहने वाले हैं। यहां दूर-दूर तक रेत का समंदर है। मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। इसी सुदूर इलाके से निकलकर देराज राम दुगेर ने आरएएस अधिकारी बनने का सपना पूरा किया है।

 देराज राम दुगेर का इंटरव्यू

देराज राम दुगेर का इंटरव्यू

वन इंडिया हिंदी से बातचीत में देराज राम दुगेर ने अपने संघर्ष के दिनों के साथ-साथ कामयाबी की पूरी कहानी बयां की। दुगेर ने बताया कि कभी उन्हें बकरियां चरानी पड़ती थी। अखबार के लिए सर्वे करना पड़ा और आज वे आरएएस बन गए हैं।

 आरएएस अधिकारी देराज राम दुगेर का परिवार

आरएएस अधिकारी देराज राम दुगेर का परिवार

बता दें कि देराज राम दुगेर कानोड़ मगाराम व केसी देवी के घर जन्मे पांच भाई बहनों में तीसरे नंबर के हैं। बड़ा भाई जेठाराम संविदाकर्मी है। जोगाराम घर ही रहते हैं। छोटी बहन मूली बीएसटीसी की पढ़ाई कर चुकी है। छोटा भाई मानाराम बीटेक करके यूपीएससी की तैयारी कर रहा है।

सौलर पैनल से भी की पढ़ाई

देराज राम दुगेर का गांव कानोड़ बाड़मेर जिला मुख्यालय से 38 किलोमीटर दूर है। गांव कानोड़ के चुनिंदा घरों में बिजली थी। देराज लालटेन व चिमनी की रोशनी में पढ़ा करते थे। कुछ समय बाद 28 सौ व तीन हजार रुपए में सौलर लालटेन ले आए थे। देराज राम के घर साल 2019 में बिजली कनेक्शन हुआ था।

 तीसरे प्रयास में मिली सफलता

तीसरे प्रयास में मिली सफलता

देराज राम दुगेर को तीसरे प्रयास में आरएएस में सफलता मिली है।

सबसे पहले साल 2013 में परीक्षा दी, जिसमें इंटरव्यू तक पहुंच पाए। दूसरी बार साल 2016 में भाग्य आजमाया और इसमें भी फेल हो गए। साल 2018 में तीसरे प्रयास में 302वीं रैंक प्राप्त की।

पटवारी व शिक्षक के पद पर भी नौकरी लगे

पटवारी व शिक्षक के पद पर भी नौकरी लगे

बतौर आरएएस देराज राम दुगेर की यह तीसरी नौकरी होगी। इससे पहले साल 2011 में देराज ने राजस्थान पटवारी भर्ती परीक्षा पास की थी। पटवारी की ट्रेनिंग की दौरान ही देराज का चयन साल 2012 में तृतीय श्रेणी शिक्षक पद पर हो गया था।

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