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दौसा लोकसभा सीट पर हार का मंथन कर रही भाजपा, सामने आई बड़ी वजह

Rajasthan Lok Sabha Election 2024: राजस्थान में 25 लोकसभा सीटों पर चुनाव हुए । भाजपा ने तीसरी बार हैट्रिक के साथ क्लीन स्वीप करने का दावा ठोका। लेकिन 4 जून को नतीजों ने सारे दावों पर पानी फेर दिया।

राजस्थान में 25 लोकसभा सीटों में से 14 सीटों पर ही भाजपा जीत हासिल कर पाई और 11 सीटों पर कांग्रेस ने सहयोगी दलों के साथ जीत हासिल कर भाजपा का किला भेद दिया।

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प्रदेश में सबसे ज्यादा चर्चित सीटों में से एक दौसा सीट इसलिए अहम मानी गई कि यहां मीना समाज के कद्दावर नेता और मंत्री किरोड़ी लाल मीना ने अपनी सांख दांव पर लगा दी ।

मंत्री किरोड़ी लाल मीना लगातार इस सीट पर जीत के दावे ठोकते रहे और हार पर अपना मंत्री पद त्यागने का ऐलान कर सियासी हलके में हलचल बढ़ाते रहे है।

दौसा लोकसभा सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोड़ शो किया तो मुख्यमंत्री भजनलाल भी खासे एक्टिव नजर आए। लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी यह सीट भाजपा हार गई और कांग्रेस के मुरारी लाल मीना जीत गए।

लेकिन अब इस सीट पर हार को लेकर भाजपा मंथन कर रही है। कि आखिर क्यों इस लोकसभा सीट पर हार का सामना करना पड़ा।

दौसा से नवनिर्वाचित सांसद मुरारी लाल मीणा की जीत के बाद भाजपा खेमे में छाई मायूसी के चलते अब बाजार में कन्हैया लाल की हार के कारणों का पता लगाया जा रहा है । हालांकि जितने मुंह उतनी बातें होना तय हैं जिसके चलते चर्चाओं का बाजार गर्म है ।

बताया जा रहा है कि 2023 में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के टिकट पर शंकर शर्मा को दौसा से जिस टीम ने मिलकर चुनाव हरवाने की देहलीज तक पहुंचाया था।

वही टीम एक लोकसभा चुनाव में फिर सक्रिय होकर दौसा से भाजपा लोकसभा उम्मीदवार कन्हैयालाल मीणा के साथ लगी । जहा ऐसा चक्रव्यूह रचा कि जिसे खुद कन्हैया लाल भी समय रहते नहीं पहचान पाए । और जब परिणाम तक पहुंचे तक आंखें फटी की फटी रह गई ।

उधर इस बीच 19 अप्रैल मतदान दिवस और 4 जून मतगणना दिवस के बीच कन्हैया लाल को चुनाव जिताने के लिये रोज नए जोड़ बाकी गुणा भाग लगाते हुए परिणाम से पहले ही नई संसद तक पहुंचा दिया था।

लेकिन इसे सीधे साधे सरल व्यक्तित्व के धनी कन्हैयालाल मीणा का दुर्भाग्य कहें या कुछ और लेकिन समय की होनी के साथ एक बार फिर 5 महीने बाद ही दौसा में भाजपा की को दौसा लोकसभा से करारी हार मिली ।

बात जो भी हो लेकिन मतगणना के परिणाम मे कन्हैया लाल स्पष्ट रूप से बुरी तरह चुनाव हार चुके हैं। हालांकि तत्कालीन हार के बाद विधानसभा चुनाव 2023 मे बीजेपी उम्मीदवार शंकर लाल शर्मा ने भाजपा के नामजद नेताओं के नाम हार का ठीकरा फोड़ा था।

इतना होने के बावजूद फिर वही टीम लोकसभा चुनाव में कन्हैया लाल मीणा के साथ मिलकर सक्रिय हुई क्योंकि उनका आंकलन था ।

दौसा से दो बार भाजपा लोकसभा उम्मीदवार हरीश मीना और जसकौर मीना चुनाव जीत चुके थे । इसीलिए इस बार भी बीजेपी की जीत को कोई रोकने वाला नहीं है। जिसके चलते धरातल पर मेहनत करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

लोगों में हवा के झोंकों से भी तेज चर्चा इस बात की चल पड़ी कि शंकर लाल शर्मा को जिस टीम ने मिलकर चुनाव हराया वहीं टीम साथ आखिर क्यों नहीं छोड़ पा रहे ।

वहीं पूरी चौकड़ी कन्हैयालाल मीना के सामने सच्चाई आने ही नहीं दी। यही वजह रही जिसके चलते सीधे-साधे व्यक्तित्व के धनी कन्हैया लाल मीणा 2 लाख 37 हजार 340 मतों से कांग्रेस उम्मीदवार मुरारी लाल मीणा से लोकसभा चुनाव हार गए ।

हालांकि हार के बाद भाजपा लोकसभा उम्मीदवार कन्हैयालाल मीणा ने खुद दौसा आ कर अपने मतदाताओं सहित उस पूरी सक्रिय टीम जिन्होंने विधानसभा चुनाव में शंकर लाल शर्मा को चुनाव हराया था,उनको भी धन्यवाद किया है ।

जो उनका बड़प्पन माना जाएगा। लेकिन शर्म की बात यह है कि जिन स्थानीय नेताओं ने जीत की जिम्मेदारी दौसा लोकसभा क्षेत्र से उठाई थी वही टीम एक बार फिर भाजपा की हार का कारण बनी ।

इस सारे मामले में मजे की बात तो यह भी है कि दौसा लोकसभा के आठ विधानसभा क्षेत्रों में से पांच विधायक भाजपा के हैं जिन्होंने करीब 5 महीने पहले ही अच्छे खासे मतों से जीत हासिल की थी।

दौसा लोकसभा क्षेत्र के लिए कन्हैया लाल को टिकट मिलने पर पार्टी ने उनसे कम से कम खुद की जितनी जीत हुई थी,उतनी उम्मीद करते हुए जिम्मेदारी भी दी थी।

लेकिन खुद के जीतने के बाद बीजेपी के वो विधायक कन्हैयालाल को जिताने में असमर्थ रहे । जो भजनलाल के साथ मिलकर बीजेपी की बड़ी जीत का दावा कर रहे थे।

कमी पार्टी के कार्यकर्ताओं की कही जाए जिनका बूथ मैनेजमेंट भी अच्छे स्तर का नहीं था, या भाजपा अपना एजेंडा मतदाताओं तक नहीं पहुंच पाई, जो भी हो , लेकिन भाजपा के 10 वर्ष के किले को कांग्रेस पार्टी की एक जुटता ने ध्वस्त कर दिया।

इधर जीतने के बाद नवनिर्वाचित सांसद मुरारी लाल मीणा ने भाजपा की हार की वजह बेरोजगारी , आरक्षण का मुद्दा , बिजली, पानी सहित झूठे वादे करने को बताया है।

हालांकि यह बात तो कांग्रेस पार्टी कर रही है और हो सकता है यह सही भी हो , लेकिन सही मायनों में भाजपा अपने मतदाताओं को समय रहते अपना एजेंडा नहीं समझा पाई और उधर शंकर लाल की हार के लिए जिम्मेदार ठीकरो ने कन्हैयालाल को चुनाव हारने पर मजबूर कर दिया।

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