Anurag Maloo: 6 हजार फीट से गिरने के बाद भी वीडियो बनाते रहे अनुराग मालू, मौत को मात देकर लौटे घर
Rajasthan News: राजस्थान के पर्वतारोही अनुराग मालू दुनिया की दसवीं सबसे ऊंची चोटी माउंट अन्नपूर्णा से उतरने के दौरान 17 अप्रैल को 6000 फीट की ऊंचाई से नीचे गिर गए थे। छह माह से एम्स दिल्ली में उपचार चल रहा था।
Rajasthan Latest News: माउंट अन्नपूर्णा की 6000 ऊंची चोटी से गहरी खाई में गिरने के बाद मैं होश में था...। 80 मीटर तक गिरने के बाद भी मैं सब कुछ देख व महसूस कर पा रहा था...। दो ट्रेंच में गिरा, लेकिन मुझे एक भी फ्रैक्चर नहीं हुआ था...। खाई में गिरने के बावजूद मैं अपने गोप्रो कैमरे से वीडियो बनाता रहा...। 12 घंटे बाद बेहोश हो गया था...। उसके बाद क्या हुआ कुछ भी याद नहीं...। अब डॉक्टरों ने मुझे नई जिंदगी दी। यह कहना है पर्वतारोही अनुराग मालू का।

दरअसल, राजस्थान के पर्वतारोही अनुराग मालू 'मौत को मात' देकर अब पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं। दिल्ली एम्स से अनुराग मालू को छुट्टी मिल गई है। ये दुनिया की दसवीं सबसे ऊंची चोटी नेपाल स्थित माउंट अन्नपूर्णा फतह करने चढ़ थे। 17 अप्रैल 2023 को माउंट अन्नपूर्णा से उतरते समय छह हजार फीट की ऊंचाई से एक गहरे गड्ढे में गिर गए थे, जिन्हें चमत्कारिक ढंग से बचा लिया गया था।
बता दें कि 34 वर्षीय अनुराग मालू राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ के रहने वाले पर्वतारोही हैं। कई ऊंची-ऊंची चोटियों पर चढ़ाई कर चुके हैं। इसी साल अप्रैल में माउंट अन्नपूर्णा पर चढ़ाई की थी। माउंट अन्नपूर्णा पर स्थित शिविर-3 से उतरने के दौरान 17 अप्रैल को करीब 6,000 मीटर की ऊंचाई से गिर गये थे और लापता हो गये थे।
काफी कोशिश करने पर तीन दिन बाद 70 मीटर गहरे गड्ढे में मिले थे। इन्हें 20 अप्रैल की सुबह उन्हें वहां से निकाला जा सका। अनुराग मालू को सबसे पहले स्थानीय चिकित्सा शिविर ले जाया गया और वहां पोखरा के मनिपाल अस्पताल लाया गया। बाद में मालू को काठमांडू के मेडिसिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 11 मई को हवाई मार्ग से एम्स दिल्ली के जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर लाया गया था।
बीते छह माह से दिल्ली एम्स में अनुराग मालू का उपचार चल रहा था। करीब 72 घंटे तक 80 मीटर बर्फ की मोटी परत में फंसे होने के कारण मालू के शरीर में इंफेक्शन फैल गया था। एम्स दिल्ली लाए गए तब अनुराग मालू मल्टीपल ऑर्गन फेलियर की समस्या से जूझ रहे थे। किडनी ने भी काम करना बंद कर दिया था। एम्स में 174 दिन उपचार चला। 44 दिन आईसीयू में रहे।
जयप्रकाश ट्रामा सेंटर एम्स से बर्न एंड प्लास्टिक विभाग के प्रमुख के डॉ. मनीष सिंघल ने बताया कि अनुराग को जब लाया गया तब वे ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे। डायलिसिस चल रहा था। सात सर्जरी के बाद अनुराग अपने पैरों पर खड़े हो सके।












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