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Rajasthan News: अजमेर शरीफ में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का 813वां उर्स शुरू, जन्नती दरवाजा 6 दिन के लिए खुला

Rajasthan News: सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का 813वां उर्स भव्यता और गहन श्रद्धा के साथ शुरू हो गया है। इस पवित्र आयोजन में देशभर से लाखों जायरीन अजमेर पहुंच रहे हैं। यह उर्स न केवल धार्मिक भक्ति का प्रतीक है। बल्कि यह संत की शिक्षाओं और उनकी स्थायी विरासत को समर्पित एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव भी है।

जन्नती दरवाज़ा का खुलना और उसकी महत्ता

इस आयोजन का मुख्य आकर्षण जन्नती दरवाजा का खुलना है। जो बुधवार सुबह विधिवत खोला गया। इस दरवाज़े से गुजरने की मान्यता है कि यह दिव्य आशीर्वाद प्रदान करता है और भक्तों की मुरादें पूरी होती हैं। साल में केवल चार बार खुलने वाले इस दरवाजे के महत्व को देखते हुए श्रद्धालु भक्ति और स्मरण के अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में उमड़े हैं।

ajmer dargah

संदल का वितरण और उसकी मान्यता

उर्स के अवसर पर दरगाह पर संदल का वितरण किया गया। जिसे ख्वाजा साहब की दरगाह पर चढ़ाया जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस पवित्र संदल का पानी में मिलाकर सेवन करने से बीमारियां दूर होती हैं। यह परंपरा संत की कृपा और आशीर्वाद में श्रद्धालुओं की गहरी आस्था को दर्शाती है।

छड़ियों का जुलूस, भक्ति और एकता का प्रतीक

बुधवार को दोपहर छड़ियों का जुलूस निकाला जाएगा। जो उर्स की एक अन्य महत्वपूर्ण रस्म है। यह जुलूस दोपहर 3 बजे गंज के उस्मानी चिल्ला से शुरू होकर ऋषि घाटी की ओर बढ़ेगा और अंततः सज्जादा नशीन हजरत इनाम हसन गुदड़ी शाह बाबा पंचम के नेतृत्व में दरगाह शरीफ पहुंचेगा। देशभर से आए तीर्थयात्री और मलंग इस जुलूस का हिस्सा बनेंगे। प्रतिभागी अपनी-अपनी छड़ियाँ और झंडे लेकर इस यात्रा में शामिल होंगे। जो उनकी सामूहिक आस्था और भक्ति का प्रतीक है।

चंदन की परंपरा और चांद देखने की रस्म

दरगाह पर मंगलवार की रात एक अनूठी परंपरा देखने को मिली। जहां जायरीन पवित्र चंदन प्राप्त करने के लिए बड़ी संख्या में एकत्र हुए। उर्स का औपचारिक आरंभ रजब के चांद के दिखने पर होगा। जिसे बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा। चांद दिखने की पुष्टि हिलाल समिति की बैठक के बाद की जाएगी। अगर चांद बुधवार को दिखाई देता है तो उर्स की रस्में उसी रात से शुरू होंगी अन्यथा ये रस्में गुरुवार से प्रारंभ होंगी।

कलंदरों का स्वागत और उनकी आध्यात्मिक यात्रा

उर्स के दौरान कलंदरों का आगमन एक विशेष आकर्षण है। ये आध्यात्मिक यात्री संत के संदेश को फैलाने के लिए लंबी यात्रा कर अजमेर आते हैं। सर्वधर्म एकता समिति के अध्यक्ष सैयद खुश्तर चिश्ती ने गगवाना में कलंदरों का स्वागत किया। इनकी यात्रा ख्वाजा साहब के चिल्ला तक जाती है। जो उनकी अटूट भक्ति और संत की शिक्षाओं की व्यापकता को दर्शाती है।

उर्स की आध्यात्मिकता और महत्व

अजमेर में आयोजित यह उर्स न केवल आध्यात्मिक चिंतन का समय है। बल्कि यह श्रद्धालुओं के लिए शांति और सद्भाव का संदेश भी लेकर आता है। जन्नती दरवाजा का खुलना, छड़ियों का जुलूस और चंदन की पवित्रता इस आयोजन की आध्यात्मिकता और परंपरा को और गहरा बनाती हैं।

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की शिक्षाएं और उनके अनुयायियों की आस्था शांति, सद्भाव और मानवता के लिए एक कालातीत प्रेरणा बनी हुई हैं। लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति इस आयोजन को न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी अद्वितीय बनाती है।

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