Rajasthan New Districts: अशोक गहलोत ने राजस्थान में इस फायदे के लिए बनाए थे नए जिले? पढ़ें इनसाइड स्टोरी
Rajasthan Districts Cancel: राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने 28 दिसंबर 2024 को 7 नए जिले और 3 नए संभाग पाली, सीकर व बांसवाड़ा के गठन का निरस्त कर दिया है। यह फैसला शनिवार दोपहर को आयोजित राजस्थान सरकार मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया है। इन जिलों को बनाने की घोषणा अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल 2018-2023 में हुई थी। अब अपने बनाए जिलों को निरस्त करने के भजनलाल शर्मा सरकार के फैसले को पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने राजनीतिक बदला बताया है।
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सवाल उठता है कि आखिर अशोक गहलोत सरकार ने राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 से ठीक पहले एक साथ इतनी बड़ी संख्या में जिलों का गठन क्यों किया था? आईए जानते हैं कि अशोक गहलोत सरकार द्वारा बनाए गए 19 नए जिले व 3 संभाग के उस वक्त के सियासी मायने। हालांकि जिलों का गठन करने के बावजूद अशोक गहलोत सरकार विधानसभा चुनाव हार गई थी।
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राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अक्सर यह कहते नजर आते हैं कि 'आप मांगते-मांगते थक जाओगे, मैं देते-देते नहीं थकूंगा...' 17 मार्च 2023 को राजस्थान में नए जिलों के गठन में यह बात सच साबित हो गई। चुनावी साल में सीएम अशोक गहलोत ने एक साथ 19 जिले व 3 संभाग बना दिए, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। अब राजस्थान में जिलों की संख्या कुल 50 व संभाग 10 हो गए। हर जिले का भूगोल, राजनीति व विकास का ढांचा भी बदल गया है। जयपुर व जोधपुर को शहरी व ग्रामीण हिस्सों में बांटा है। ऐसे में नए जिलों की संख्या 17 भी कही जा रही है।

राजस्थान में रातभर जश्न का माहौल
शु्क्रवार को 19 जिले व 3 संभाग की घोषणा के बाद राजस्थान के लोग जश्न में डूब गए। नए बनाए गए जिलों में लोगों ने आतिशबाजी व मिठाई बांटकर खुशियां मनाईं। सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं का दौर चला। जश्न की तस्वीरें व वीडियो भी खूब वायरल हुए। आईए जानते हैं कि राजस्थान के 19 नए जिले बनाने का सियासी गणित और राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 कांग्रेस को फायदा होगा या नहीं?

राजस्थान नए जिलों की इनसाइड स्टोरी
1. अनूपगढ़ जिला राजस्थान
श्रीगंगानगर से अलग होकर अनुपगढ़ नया जिला बना है। श्रीगंगानगर में विधानसभा की छह सीट हैं, जिनमें से 2 कांग्रेस, 3 भाजपा व एक निर्दलीय विधायक है। अनूपगढ़ की श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय से दूरी करीब 125 किलोमीटर है।
2. जोधपूर पूर्व, जोधपुर पश्चिम व फलोदी जिला राजस्थान
राजस्थान सीएम अशोक गहलोत का गृह जिला जोधपुर है। फलोदी की जोधपुर जिला मुख्यालय से दूरी 144 किलोमीटर है। जोधपुर को दो नगर निगम की तर्ज पर जोधपुर पूर्व व जोधपुर पश्चिम जिले में बांटा गया है। यहां पर दस सीटों में से सात पर कांग्रेस, दो पर भाजपा व एक अन्य पार्टी का विधायक है।
3. नीमकाथाना जिला राजस्थान
सीकर जिला मुख्यालय से करीब 90 किलोमीटर दूर नीमकाथाना को जिला बनाया है। सीकर कांग्रेस का गढ़ है। यहां पर आठ में से 7 विधायक कांग्रेस के हैं। एक सीट पर निर्दलीय है।
4. खैरथल जिला राजस्थान
अलवर जिले को तोड़कर खैरथल नया जिला बनाया गया है। नए जिले की मांग करने वाले बहरोड़ को जयपुर से टूटकर नए बने जिले कोटपूतली में मिला दिया। खैरथल से बसपा विधायक दीपचंद खैरिया कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
5. डीग जिला राजस्थान
भरतपुर से टूटकर नया जिला बना डीग राजस्थान सरकार में मंत्री विश्वेंद्र सिंह का क्षेत्र है। राजस्थान कांग्रेस सियासी संकट में विश्वेंद्र सिंह ने सचिन पायलट का साथ दिया था। यहां पर सात में कांग्रेस के पास 6 व आरएलडी के पास एक सीट है।
6. बालोतरा जिला राजस्थान
सरहदी जिले बाड़मेर से टूटकर नया जिला बना बालोतरा में कांग्रेस विधायक मदन प्रजापत ने आंदोलन शुरू कर रखा था। बालोतरा के जिला नहीं बनने तक जूते चप्पल त्याग रखे थे। यहा सात में छह पर कांग्रेस व एक सीट पर भाजपा है।
7. सांचौर जिला राजस्थान
जालौर से टूटकर नया जिला बनने वाले सांचौर की जिला मुख्यालय से दूरी 135 किलोमीटर है। यहां पांच में से कांग्रेस के खाते में महज एक सीट आई जबकि चार पर भाजपा है।
8. डीडवाना-कुचामन जिला राजस्थान
नागौर से टूटकर नया जिला बने डीडवाना-कुचामन की जिला मुख्यालय से दूरी 100 किलोमीटर से ज्यादा है। यहां पर दस में से कांग्रेस के पास सात, आरएलडी के पास दो व भाजपा के पास एक सीट है।
9. सलूंबर जिला राजस्थान
उदयपुर जिले को तोड़कर सलूंबर नया जिला बनाया गया है। आदिवासी बाहुल सलूंबर जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर था। सीएम अशोक गहलोत के करीब रघुवीर मीणा यहीं से चुनाव लड़ते हैं। यहां आठ में से दो सीटों पर कांग्रेस व छह पर भाजपा है।
10. शाहपुरा जिला राजस्थान
भीलवाड़ा जिले से अलग होकर शाहपुरा नया जिला बना है। भाजपा के कैलाश मेघवाल यहां से रिकॉर्ड 75 हजार वोटों से जीते हैं। अब टिकट की दौड़ से बाहर होने का फायदा उठाना चाहेगी कांग्रेस। यहां सात में से पांच पर भाजपा व दो पर कांग्रेस है।
11. ब्यावर व केकड़ी जिला राजस्थान
अजमेर जिले को तोड़कर दो नए जिले ब्यावर व केकड़ी बनाए गए हैं। ब्यावर भाजपा का गढ़ है। वर्षों से नया जिला बनने की मांग उठ रही थी। केकड़ी में पूर्व चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा को मजबूत करने की कोशिश है। यहां आठ में से कांग्रेस के पास सिर्फ दो सीट हैं। पांच पर भाजपा व एक पर निर्दलीय है।
12. गंगापुर सिटी जिला राजस्थान
सवाई माधोपुर से अलग करके गंगापुर सिटी को नया जिला बनाया है। यह क्षेत्र सीएम के सलाहकार व निर्दलीय विधायक रामकेश मीणा का है। यहां चार में से तीन सीटों पर कांग्रेस है। एकपर निर्दलीय है।
13. जयपुर उत्तर, जयपुर दक्षिण, दूदू व कोटपूतली जिला
जयपुर को दो हिस्सों में बांटकर जयपुर उत्तर व जयपुर दक्षिण नाम से नए जिले बनाए हैं। इनके अलावा दूदू व कोटपूतली को भी जिले का दर्जा मिला है। जयपुर जिले की 19 में से कांग्रेस के पास 10, भाजपा के पास छह व अन्य के पास 3 सीट हैं।

नए जिले बनाने पर राजस्थान सीएम अशोक गहलोत क्या बोले?
17 मार्च 2023 को 19 जिले व 3 संभाग सीकर, बांसवाड़ा और पाली की घोषणा करने के बाद सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि राजस्थान में बढ़ती आबादी व बड़ा क्षेत्रफल को देखते हुए नए जिले बनाए जाने की आवश्यकता महसूस हो रही थी। राज्य में जिलो के पुनर्गठन से प्रगति की गति अब दोगुनी होगी। राजस्थान बजट 2023 में जन भावनाओं के अनुरूप ही फैसले लिए गए हैं। जनता के लिए बचत, राहत व बढ़त का सिलसिला जारी रहेगा।

नए जिले बनाने राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे क्या बोलीं?
राजस्थान में 19 नए जिले व 3 संभाग बनाए जाने की घोषणा पर भाजपा ने कांग्रेस सरकार को आड़े हाथों लिया है। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया ने कहा कि राजस्थान बजट 2023 में नई घोषणाएं अपने व्यक्तिगत राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति करने का प्रयास है। एक साथ इतने जिलों की घोष्णाएं करके कांग्रेस सरकार ने राजस्थान के पूरे आर्थिक तंत्र को दांव पर लगा दिया है। नए जिले बनाने में महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया है। वहीं, इस मामले में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि सीएम अशोक गहलोत ने विधायकों के दबाव में आकर 19 जिलों की घोषणा की है। बिना किसी वित्तीय प्रावधान व तैयारी के घोषणा कर दी गई है। बड़ा सवाल यह है कि नए जिलों के गठन से इतना पैसा कहां से आएगा?
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