Rajasthan Districts: भजनलाल शर्मा सरकार ने राजस्थान के 9 नए जिले व 3 संभाग निरस्त कर दिए, देखें सूची
Rajasthan Districts: राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने 28 दिसंबर 2024 को कैबिनेट बैठक में 9 नए जिलों और 3 संभाग सीकर, पाली और बांसवाड़ा को निरस्त करने का फैसला लिया है। राजस्थान के ये वो नए जिले और संभाग हैं, जिनकी घोषणा अशोक गहलोत सरकार ने राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 से पहले की थी। शनिवार को भजनलाल कैबिनेट द्वारा नए जिले निरस्त करने के बाद राजस्थान में जिलों की कुल संख्या 41 और संभाग 7 रह गए हैं। नए जिले निरस्त करने पर अशोक गहलोत ने भी प्रतिक्रिया दी है।
शनिवार को जयपुर में आयोजित भजनलाल शर्मा सरकार कैबिनेट की बैठके बाद संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और खाद्य मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने विधानसभा चुनाव 2023 से ठीक पहले नए जिलों और संभागों की घोषणा की थी। गहलोत सरकार ने कई ऐसे नए जिले व संभाग भी बना दिए थे, जो जिले व संभाग बनने के मापदंड भी पूरे नहीं कर रहे थे। ऐसे में अब उनको भजनलाल शर्मा सरकार ने निरस्त करने का फैसला लिया है।
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राजस्थान में भाजपा भजनलाल शर्मा सरकार ने कांग्रेस के अशोक गहलोत सरकार में बनाए गए 17 में से 9 जिलों व तीनों संभागों को निरस्त कर नए जिलों में से सिर्फ आठ जिलों को ही यथावत रखने का फैसला किया है। पहले वाले सभी 7 संभागों को पूर्व की तरह ही बने रहेंगे। अशोक गहलोत सरकार ने राजस्थान में जिलों की कुल संख्या 33 से बढ़ाकर 50 कर दी थी। जयपुर व जोधपुर जिले के दो हिस्सों शहर व ग्रामीण में बांट दिया था। संभाग को 7 से बढ़ाकर 10 कर दिया था।
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राजस्थान के ये 9 नए जिले हुए निरस्त
दूदू, केकड़ी, शाहपुरा, नीमकाथाना, गंगापुर सिटी , जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण, अनूपगढ़, मालपुरा, सुजानगढ़ और कुचामन और सांचौर नए जिले को खत्म कर दिया गया है। अब ये जिले नहीं माने जाएंगे बल्कि पूर्व में जिस जिले का हिस्सा हैं। उसी में रहेंगे।
राजस्थान के ये 8 नए जिले रहेंगे यथावत
बालोतरा, खैरथल-तिजारा, ब्यावर, कोटपूतली-बहरोड़, डीडवाना-कुचामन, फलोदी, डीग और संलूबर जिले यथावत रहेंगे।
राजस्थान में 9 जिले खत्म करने पर अशोक गहलोत की प्रतिक्रिया
राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार द्वारा 9 जिले खत्म किए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 'हमारी सरकार द्वारा बनाए गए नए जिलों में से 9 जिलों को निरस्त करने का भाजपा सरकार का निर्णय अविवेकशीलता एवं केवल राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण है। हमारी सरकार के दौरान जिलों का पुनर्गठन करने के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रामलुभाया की अध्यक्षता में 21 मार्च 2022 को समिति बनाई गई थी जिसको दर्जनों जिलों के प्रतिवेदन प्राप्त हुए। इन्हीं प्रतिवेदनों का परीक्षण कर समिति ने अपनी रिपोर्ट दी जिसके आधार पर नए जिले बनाने का निर्णय किया गया।
अशोक गहलोत ने आगे लिखा कि मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ के अलग होने के बाद राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य बन गया परन्तु प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्गठन उस अनुपात में नहीं हुआ था। राजस्थान से छोटा होने के बाद भी मध्य प्रदेश में 53 जिले हैं। नए जिलों के गठन से पूर्व राजस्थान में हर जिले की औसत आबाादी 35.42 लाख व क्षेत्रफल 12,147 वर्ग किलोमीटर था (हालांकि त्रिपुरा राज्य का क्षेत्रफल 10,492 वर्ग किलोमीटर, गोवा राज्य का क्षेत्रफल 3,702 वर्ग किलोमीटर, दिल्ली केन्द्र शासित प्रदेश का क्षेत्रफल 1,484 वर्ग किलोमीटर है) जबकि नए जिले बनने के बाद जिलों की औसत आबादी 15.35 लाख व क्षेत्रफल 5268 वर्ग किलोमीटर हो गया था।
अशोक गहलोत ने यह भी लिखा कि 'जिले की आबादी व क्षेत्र कम होने से शासन-प्रशासन की पहुंच बेहतर होती है एवं सुविधाओं व योजनाओं की बेहतर डिलीवरी सुनिश्चित हो पाती है। छोटी प्रशासनिक इकाई होने पर जनता की प्रतिवेदनाओं का निस्तारण भी शीघ्रता से होता है।
भाजपा सरकार द्वारा जिन जिलों को छोटा होने का तर्क देकर रद्द किया है वो भी अनुचित है। जिले का आकार वहां की भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर होता है। हमारे पड़ोसी राज्यों के जिले जैसे गुजरात के डांग (2 लाख 29 हजार), पोरबंदर (5 लाख 85 हजार) एवं नर्बदा (5 लाख 91 हजार), हरियाणा के पंचकुला (5 लाख 59 हजार) एवं चरखी दादरी (लगभग 5 लाख 1 हजार), पंजाब के मलेरकोटला (लगभग 4 लाख 30 हजार), बरनाला(5 लाख 96 हजार) एवं फतेहगढ़ साहिब (6 लाख) जैसे कम आबादी वाले जिले हैं।
कम आबादी वाले जिलों में सरकार की प्लानिंग की सफलता भी ज्यादा होती है। छोटे जिलों में कानून व्यवस्था की स्थिति को बहाल रखना भी आसान होता है क्योंकि वहां पुलिस की पहुंच अधिक होती है। परिस्थितियों के आधार पर जिलों की आबादी में भी अंतर होना स्वभाविक है जैसे उत्तर प्रदेश में प्रयागराज जिले की आबादी करीब 60 लाख है जबकि चित्रकूट जिले की आबादी 10 लाख है। परन्तु सरकार के लिए प्रशासनिक दृष्टि से छोटे जिले ही बेहतर लगते हैं।
सरकार की तरफ से एक तर्क यह दिया जा रहा है कि एक जिले में कम से कम 3 विधानसभा क्षेत्र होने चाहिए जबकि भाजपा द्वारा 2007 में बनाए गए प्रतापगढ़ मे परिसीमन के बावजूद भी केवल दो विधानसभा क्षेत्र हैं। सरकार द्वारा जहां कम दूरी का तर्क दिया जा रहा है वो भी आश्चर्यजनक है क्योंकि डीग की भरतपुर से दूरी केवल 38 किमी है जिसे रखा गया है परन्तु सांचौर से जालोर की दूरी 135 किमी एवंअनूपगढ़ से गंगानगर की दूरी 125 किमी होने के बावजूद उन जिलों को रद्द कर दिया गया।
हमारी सरकार ने केवल जिलों की घोषणा ही नहीं की बल्कि वहां कलेक्टर, एसपी समेत तमाम जिला स्तरीय अधिकारियों की नियुक्ति दी एवं हर जिले को संसाधनों के लिए बजट भी दिया। हम भाजपा सरकार द्वारा उठाए गए इस अदूरदर्शी एवं राजनीतिक प्रतिशोध के कारण लिए गए निर्णय की निंदा करते हैं।
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