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NRDA नहीं चुका सका 317.79 करोड़ का कर्ज, बैंक ने किया "नवा रायपुर" की जमीन पर कब्ज़ा

रायपुर ,18 जनवरी। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद मौजूदा रायपुर शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर नई राजधानी बसाने के लिए नया रायपुर बनाया गया था। आज दो दशकों बाद भी यहां बसाहट नहीं हो सकी है। नया रायपुर के विकास के लिए नया रायपुर विकास प्राधिकरण का गठन किया गया था। क्योंकि अब नया रायपुर का नाम नवा रायपुर अटल नगर हो चुका है। इसलिए प्राधिकरण का नाम भी नवा रायपुर विकास प्राधिकरण हो चुका है। इन सबसे अलग यह जानना जरूरी है कि नई राजधानी का नाम बदला लेकिन काम नही बदला जा सका, क्योंकि विकास के नाम पर छत्तीसगढ़ सरकार ने केवल कर्ज ही बढ़ाया है, नौबत यहां तक आन पड़ी है कि बैंक का कर्ज ना चुका पाने के कारण नया रायपुर की जमीन पर भी अब बैंक का कब्जा है।

बैंक के नोटिस से हुआ खुलासा

बैंक के नोटिस से हुआ खुलासा

छत्तीसगढ़ की नई राजधानी बसाने और उसके प्रबंधन के लिए काम करने वाला अटल नगर नवा रायपुर विकास प्राधिकरण कर्ज के भंवर में फंसता हुआ नजर आ रहा है। प्राधिकरण ने यूनियन बैंक के 317.79 करोड़ रुपए का कर्ज चुकाया है। नतीजन बैंक ने एनआरडीए की 2.659 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा कर लिया है।

दरसअल मामले का खुलासा अखबारों में जारी एक विज्ञापन से सार्वजनिक होने पर हुआ, जब यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की मिड कॉर्पोरेट शाखा ने नवा रायपुर विकास प्राधिकरण को 2 अगस्त 2021 को एक डिमांड नोटिस जारी करके बैंक ने 317 करोड़ 79 लाख 62 हजार 793 रुपयों के साथ ब्याज और लीगल फीस देने की मांग की थी।

कर्जदार एनआरडीए को बैंक की राशि चुकाने के लिए 60 दिनों का समय दिया था, लेकिन तय अवधि के भीतर बैंक को वह रकम नहीं चुकाई जा सकी। समय सीमा निकल जाने पर 12 जनवरी को नवा रायपुर अटल नगर के कयाबांधा और बरोडा गांव की 2.659 हैक्टेयर जमीन को बैंक ने अपने कब्जे में ले लिया है। फिलहाल बैंक का यह कब्जा प्रतीकात्मक है।

एनआरडीए सरकारी मदद और कर्ज के भरोसे

एनआरडीए सरकारी मदद और कर्ज के भरोसे

दरअसल नई राजधानी बसाने के लिए छत्तीसगढ़ मे पूर्व की सभी सरकारों ने कर्ज लेकर विश्वस्तरीय सुविधाएं देने के सपने दिखाए, काम भी हुआ लेकिन इससे प्राधिकरण पर करोड़ों का कर्ज का भार बढ़ गया। नया रायपुर मे बसाहट नहीं हो पाने से उस निवेश को बढ़ावा नहीं मिल सका, इससे प्राधिकरण की आय पर भी फर्क पड़ा। स्थिति यह है कि एनआरडीए सरकारी मदद और कर्ज के भरोसे है। इधर भूपेश सरकार ने भी अपने तीन साल के कार्यकाल मे 51 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज ले लिया है। सरकार की जितनी आय नही है, उससे कहीं अधिक कर्जभार है। बघेल सरकार के सत्ता पर आने से पहले रमन सरकार ने 41 हजार करोड़ रुपए का कर्ज छोड़ा था, जो बढ़कर 51 करोड़ पहुंच गया है।

पूर्व सीएम डॉ रमन ने ट्वीट पर साधा निशाना

पूर्व सीएम डॉ रमन ने ट्वीट पर साधा निशाना

पूर्व सीएम डॉ रमन सिंह ने एनआरडीए के कर्जे पर भूपेश सरकार को आड़े हाथो लेते हुए ट्वीट किया कि आज कर्ज न चुकाने पर बैंक नया रायपुर की सरकारी संपत्तियों को कब्जे में ले रहा है। कल भूपेश बघेल सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन और कर्ज लो घी पियो की आदत से विधानसभा, मंत्रालय, चौक-चौराहे के साथ छत्तीसगढ़ महतारी गिरवी हो जाएगी।

कांग्रेस प्रवक्ता ने ट्वीट पर दिया जवाब

कांग्रेस प्रवक्ता ने ट्वीट पर दिया जवाब

15 साल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे डॉ रमन सिंह के ट्वीट पर कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर में जवाब देते हुए लिखा कि रमन सिंह जी आपको थोड़ा याद दिला देता हूँ। कि आपके कमीशनखोरी का पाप है ,सन 2014-180 करोड़ का लोन ,सन 2016- 200 करोड़ का लोन एनआरडीए की जमीन को यूनियन,बैंक में गिरवी रख कर लिया गया लोन है।
कुल 380 करोड़ लोन जिसमे अभी 317 करोड़ बकाया है। बहरहाल पक्ष विपक्ष की सियासत के बीच यह बात तो सच है कि नवा रायपुर के विकास को लेकर जो सरकारी नुकसान के जो तथ्य सामने आ रहे है, वह चिंताजनक है।

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