Diwali 2022: गोबर से बने प्राकृतिक पेंट की बढ़ी डिमांड, Raipur की महिला समूह ने किया कमाल

CM Bhupesh Baghel के निर्देश के बाद गोबर से अब सिर्फ वर्मी कम्पोस्ट ही नहीं बल्कि प्राकृतिक पेंट का निर्माण भी हो रहा है। छत्तीसगढ़ के कई गौठानो पेंट बनाने का काम शुरू किया गया है। दिवाली का त्योहार नजदीक है ऐसे में घरों में पेंटिंग के लिए पेंट की खरीदी की जा रही। रायपुर जिले के ग्राम जरवाय के गौठान में गोवर्धन स्व सहायता समूह की महिलाओं ने इसी बात को ध्यान में रखकर गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने का काम शुरू किया हैं। गौठान में बने प्राकृतिक पेंट की मांग भी मार्केट में बनी हुई है।

इस तरह चुना गोबर से पेंट बनाने का काम

इस तरह चुना गोबर से पेंट बनाने का काम

गोवर्धन स्व सहायता समूह जरवाय की अध्यक्ष धनेश्वरी रात्रे बताती है कि महिलाओं ने स्वयं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए समूह का गठन किया। उनके समूह में 22 महिलाएं काम करती हैं। और बहुत से स्वरोजगार की जानकारी प्राप्त की। जिसमें कुछ नया करने का सोच कर सबने गोबर से पेंट बनाने का काम शुरू किया। गोबर से पेंट बनाने के लिए महिलाओं को नगर निगम रायपुर एवं जिला पंचायत के माध्यम से प्रशिक्षण व सहयोग भी दिया गया।

अब तक तीन हजार लीटर पेंट का निर्माण

अब तक तीन हजार लीटर पेंट का निर्माण

गौठान में महिला समुह द्वारा पेंट बनाने की शुरुआत अप्रैल 2022 से हुई। पेंट उत्पादन क्षमता के अनुसार यूनिट में अब तक तीन हजार लीटर पेंट बनाकर समूह की महिलाएं बेंच चुकी हैं। जिससे महिलाओ की आय में वृद्धि हुई है। नगर निगम रायपुर की बिल्डिंग की पुताई के लिए 500 किलो पेंट का उपयोग किया गया था। सरकारी भवनों के अलावा आम लोगों के बीच भी इस पेंट की मांग बढ़ रही है. अंबिकापुर में 120 लीटर और कोरबा में 70 लीटर पेंट का उपयोग स्थानीय लोगों ने किया है। वहीं राजधानी में भी बहुत से लोग इस पेंट से अपने घरों की पुताई कर चुके हैं.गोबर से निर्मित पेंट आधा लीटर, एक, चार, और दस लीटर के डिब्बों में उपलब्ध है।

केमिकल पेंट और प्राकृतिक पेंट में है अंतर

केमिकल पेंट और प्राकृतिक पेंट में है अंतर

अगर गोबर से बने पेंट और बाजार में बिकने वाले केमिकल युक्त पेंट में अंतर की बात करें तो बाजार मिलने वाले ब्रान्डेड पेंट में कैमिकल और अप्राकृतिक पदार्थ होते जो हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं गोबर से निर्मित पेंट प्राकृतिक पदार्थों से मिलकर बनता है। इसलिए इसे प्राकृतिक पेंट भी कहते हैं। केमिकल युक्त पेंट की कीमत 350 रुपए प्रति लीटर से शुरू होती है, पर गोबर से निर्मित प्राकृतिक पेंट की कीमत 150 रुपए तक है. गोबर से बने होने के कारण यह पेंट एंटीबैक्टीरियल है।

ऐसे तैयार होता है गोबर से प्राकृतिक पेंट

ऐसे तैयार होता है गोबर से प्राकृतिक पेंट

गोबर से पेंट बनाने की विधि को लेकर मन में उत्सुकता जरूर होती है कि आखिर यह बनता कैसे होगा। तो आपको बता दें इसके लिए पहले गोबर को मशीन में पानी के साथ अच्छे से मिलाया जाता है। फिर इस घोल से गोबर के फाइबर और तरल पदार्थ को डी-वाटरिंग मशीन के मदद से अलग किया जाता है। इस तरल को 100 डिग्री में गर्म कर, उसका अर्क बनता है, जिसे पेंट के बेस की तरह इस्तेमाल किया जाता है। जिसके बाद इसे प्रोसेस कर पेंट तैयार होता है।

प्राकृतिक पेंट में सीएससी का होता है इस्तेमाल

प्राकृतिक पेंट में सीएससी का होता है इस्तेमाल

गोबर से प्राकृतिक पेंट के निर्माण का मुख्य घटक कार्बोक्सी मिथाइल सेल्यूलोज (CMC) होता है,100 किलो गोबर से लगभग 10 किलो सूखा CMC तैयार होता है. कुल निर्मित पेंट में 30 प्रतिशत मात्रा CMC की होती है. गोवर्धन स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा निर्मित यह पेंट महिलाओं की आय का जरिया तो है ही साथ ही महिलाओं की अलग पहचान बना रहा है। यह पेंट गुणवत्ता के मामले में बाजार के पेंट से कम नहीं है।

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