पंजाब: चुनावी रण में हो सकती है एक और नई पार्टी की एंट्री, जानिए कैसे हो सकता है कांग्रेस को फ़ायदा ?
पंजाब में विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र आए दिन नए समीकरण बनते हुए नज़र आ रहे हैं। पंजाब के चुनावी रण में पहली बार शिरोमणि अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन कर साथ उतरी है।
चंडीगढ़, 13 नवम्बर 2021। पंजाब में विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र आए दिन नए समीकरण बनते हुए नज़र आ रहे हैं। पंजाब के चुनावी रण में पहली बार शिरोमणि अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन कर साथ उतरी है। वहीं अब पंजाब में दलित वोट बैंक में सेंधमारी करने के लिए एक और पार्टी चुनावी रण में उतर सकती है। अगर आज़ाद समाज पार्टी के पंजाब के चुनावी रण में उतरती है तो इसका सीधा फ़ायदा कांग्रेस को पहुंच सकता है। क्योंकि बहुजन समाज पार्टी और शिरोमणि अकाली दल गठबंधन में है, कहीं न कहीं आजाद समाज पार्टी के चुनावी रण में उतरने से दलित वोट में बंटवारा होगा, जिससे शिअद-बसपा के वोट बैंक बंटेगे और कांग्रेस को इसका फ़ायदा पहुंचेगा।

पंजाब के रण में नइ सियासी पार्टी
'आजाद समाज पार्टी (कांशीराम)' के चीफ़ चंद्रशेखर आजाद ने निर्वाचन आयोग से पार्टी के लिए चुनाव चिंह आवंटित करने के लिए याचिका दायर की है। दिल्ली उच्च न्यायालय को निर्वाचन आयोग ने बताया कि 5 राज्यों में आगामी लिधानसभा चुनाव के लिए चंद्रशेखर आज़ाद ने अपनी राजनीतिक पार्टी के लिए एक समान चुनाव चिन्ह के आवंटन के लिए आवेदन दिया है। इस आवेदन पर कानून के मुताबिक विचार किया जाएग। अपनी पार्टी 'आजाद समाज पार्टी (कांशीराम)' के लिए एक समान चुनाव चिन्ह के आवंटन के लिए 'भीम आर्मी' प्रमुख की याचिका पर सुनवाई कर रहे जस्टिस प्रतीक जालान से आयोग के वकील ने कहा कि चार राज्यों - उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर के लिए चुनाव चिन्हों के आवंटन के लिए आवेदनों पर अब विचार किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के लिए 14 नवंबर से प्रक्रिया शुरू होगी।

चुनाव चिन्ह लेने की तैयारी
निर्वाचन आयोग के रुख को ध्यान में रखते हुए, न्यायाधीश ने याचिका पर सुनवाई की। उन्होंने कहा कि आयोग की तऱफ़ से याचिकाकर्ता के आवेदन पर चुनाव चिन्ह के लिए लागू कानूनों के साथ इसकी प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। निर्वाचन आयोग की ओर से पेश हुए वकील सिद्धांत कुमार ने कहा कि हर विधानसभा चुनाव के लिए आवंटन की प्रक्रिया अलग-अलग होती है। गैर-मान्यता प्राप्त और पंजीकृत पार्टी के लिए एक तरह के चिन्ह के लिए याचिकाकर्ता की याचिका पर नियम के मुताबिक विचार किया जा सकता है। किसी एक चुनाव चिन्ह के लिए कोई दावेदारी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर एक राज्य के लिए मियम के मुताबिक काम करना होता है, चिन्हों का आवंटन आवेदक की तरफ़ से दिए गए सिम्बल पर निर्भर करता है।

'विधानसभा चुनाव में उतारेंगे उम्मीदवार'
निर्वाचन आयोग की ओर से पेश हुए वकील सिद्धांत कुमार ने कहा कि आवंटन के लिए आवेदन निर्धारित तरीक़ें से किया जाएगा। याचिकाकर्ता की तरफ़ से एक समान चुनाव चिन्ह के आवंटन के लिए पहले की गई बात वक्त से पहले हुई थी। वहीं याचिकाकर्ता के वकील एम एस आर्य ने कहा कि चुनाव चिन्हों के आवंटन के लिए आयोग द्वारा जारी नोटिस के बाबत आवेदन को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उनकी राजनीतिक पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने जा रही है और लगातार रैलियां आयोजित कर रही है। इसलिए आम जनता समान चुनाव चिन्ह को जानना चाहती है। याचिका में दावा किया गया है कि आजाद को कोई एक चुनाव चिन्ह नहीं होने की वजह से बहुत नुकसान हो रहा है इसलिए जल्द ही उनकी पार्टी को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दी जाए ताकि वह आगामी विधानसभा चुनाव में पांचों राज्यों में अपने उम्मीदवार उतार सकें।
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