पंजाब: SAD ने शुरू की प्रत्याशियों के नाम की घोषणा, कोर कमेटी की बैठक नहीं बुलाने से दिग्गज नाराज़

सियासी गलियारों में ये हलचल है कि शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल सियासी समीकरणों के चलते मोगा शहर विधानसभा सीट से हिंदुत्ववादी चेहरे की तलाश में हैं।

चंडीगढ़, अगस्त 31, 2021। पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने प्रत्याशियो के नाम की घोषणाएं शुरू कर दी हैं। वहीं प्रत्याशियों के नाम की घोषणा को लेकर शिरोमणि अकाली दल के कुछ नेताओं में नाराज़गी भी है। पूर्व विधायक जोगिदर पाल जैन और अकाली नेता जत्थेदार तोता सिंह परिवार के बीच काफ़ी दिनों से दूरियां चली आ रही थी। 11 महीनें पहले दोनों परिवारों के बीच सुलह हुआ था लेकिन अब 11 महीने बाद 2022 विधानसभा चुनाव की वजह से इस सियासी दोस्ती में दरारें आने लगी हैं।

sukhbir singh badal nw

टिकट की दावेदारी पर सवालिया निशान
सियासी गलियारों में ये हलचल है कि शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल सियासी समीकरणों के चलते मोगा शहर विधानसभा सीट से हिंदुत्ववादी चेहरे की तलाश में हैं। इसके लिए उन्होंने ने पूर्व मेयर अक्षित जैन के नाम पर लगभग मुहर लगा दी थे लेकिन अकाली नेता तोता सिंह ग्रुप ने मेयर आरक्षित जैन के नाम सहमती ज़ाहिर नहीं की। तोता सिंह ग्रुप बरजिदर सिंह बराड़ को ही मोगा सीट के लिए प्रत्याशी के तौर पर देखना चाहते हैं। वहीं खुद जत्थेदार तोता सिंह धर्मकोट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। टिकट की इसी खींचतान की वजह से SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल का 100 दिन 100 हलके की मुहिम का समीकरण पहली बार मोगा में टूटने की कगार पर है।

SAD अध्यक्ष के कार्यक्रमों में बदलाव
सूत्रों के मुताबिक शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के पहले प्लान के मुताबिक मोगा विधानसभा क्षेत्र हिदू संगठनों के साथ बैठक और पूरे दिन के कार्यक्रम भी तय हो गए थे। सुखबीर सिंह बादल को अपना तय कार्यकर्म तोता सिंह ग्रुप की वजह से बदलना पड़ा। अब शिअद अध्यक्ष 2 सितंबर को सुबह 10 बजे मोगा की नई दाना मंडी में अकाली कार्यकर्ताओं की रैली को संबोधित करेंगे। नई दाना मंडी के बाद वह दोहपहर 2 बजे धर्मकोट में रैली करेंगे। 17 सितंबर को फिर से आधा दिन मोगा और आधा दिन धर्मकोट विधानसभा का दौरा करेंगे।

पूर्व विधायक जैन भी हुए सक्रिय
अकाली दल के जत्थेदार तोता सिंह के समर्थक पूर्व विधायक जोगिदर पाल जैन के निवास पर बैठके कर रहे हैं तो वहीं अकाली दल से कांग्रेस का रुख कर चुके कुछ कांग्रेस नेताओं के साथ भी पूर्व विधायक जैन की बैठकें हो चुकी हैं और कुछ नेताओं की बैठक होनी हैं। कुछ दिनों से पूर्व विधायक जोगिंदर पाल की तबियत नासाज़ चल रही है लेकिन इसके बावजूद उनके आवास पर हो रही बैठकों ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। पूर्व विधायक जोगिदर पाल जैन का बारे में पॉलिटिकल एक्सपर्ट का मान्ना है कि वह स्थानीय राजनीति का रुख कभी भी मोड़ देने की हैसियत रखते हैं।

तोता सिंह खेमे की उड़ी नींद
पूर्व विधायक जोगिदर पाल जैन की सक्रियता के चलते जत्थेदार तोता सिंह खेमे में भी खलबली देखी जा रही है, पूर्व मेयर अभी तक अकाली दल के हलका प्रभारी बरजिदर सिंह बराड़ के साथ किसी बैठक में भी नहीं देखे गए हैं। हालांकि बराड़ गुट लगातार पूर्व मेयर अक्षित जैन से मिलने की कोशिश कर रहा है। ताकि शहरी क्षेत्र में उनके बलबूते ये दिखा सकें की दोस्ती कायम है। लेकिन अंदर खाते की खिचड़ी पकने से जत्थेदार तोता सिंह खेमे की नींद उड़ गई है। कांग्रेस के दिग्गज राजनीति के इस खेल पर निगाह गड़ाए बैठे हैं क्योंकि अकाली दल की इस गुटबाजी का असर सीधे कांग्रेस के चुनाव पर पड़ना तय है।

'जैन ने पलट दी थी जीती बाज़ी'
पिछले चुनाव में भी अकाली दल के वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाए थे कि कांग्रेस के डा. हरजोत कमल की जीत में जोगिदर पाल जैन की वजह से हुई थी। उन्होंने अकाली प्रत्याशी की जीती बाज़ी पलट दी थी। ग़ौरतलब है कि अभी भी जैन का प्रभाव स्थानीय राजनीति में कम नहीं है। जैन के लिए कोई दल कभी मायने नहीं रहा वह अपने दम पर राजनीति की दिशा को मोड़ते रहे हैं, ऐसे में दोबारा 2022 के चुनाव से पूर्व उनकी सक्रियता राजनीति खेमे में खलबली मचाए हुए है।

SAD नेताओं में नाराज़गी
शिरोमणि अकाली दल (SAD) की तरफ़ से आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा शिअद के वरिष्ट नेताओं के खेमे में नाराज़गी है। शिरोमणि अकाली दल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि बिना कोर कमेटी के मशवरे से उम्मीदवार घोषित किए जा रहे हैं। फिलहाल, कोई भी नेता इस मुद्दे पर आन रिकार्ड बोलने के लिए तैयार नहीं है लेकिन पार्टी के अंदर सुगबुगाहट चलनी शुरू हो गई है। शिअद की तरफ़ से इस चुनाव से पहले जितने भी चुनाव हुए हर बार चुनाव में कोर कमेटी के साथ बैठक करने के बाद में प्रत्याशियों की सूची तैयार की जाती थी। इसको घोषित करने का फैसला पार्टी प्रधान को दे दिया जाता था।

'कोर कमेटी की बैठक नहीं बुलाई गई'
इस बार कोर कमेटी की बैठक नहीं बुलाई गई और बिना कोर कमेटी के मशवरे से उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की जा रही है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि इस बार शिरोमणि अकाली दल कोर कमेटी की कोई बैठक नहीं हुई और किसी वरिष्ठ नेता के साथ भी कोई चर्चा नहीं की गई। पहले जिला स्तर पर भी नेताओं से इस बारे में चर्चा की जाती थी। पहले चुनाव से पहले प्रत्याशी घोषित करने होते थे तो प्रकाश सिंह बादल पार्टी की कोर कमेटी सीनियर नेताओं के साथ बैठक किया करते थे। उनके साथ चर्चा करने के बाद ही प्रत्याशियों की लिस्ट बनाई जाती थी और फिर सभी नेता पार्टी प्रधान को प्रत्याशियों की घोषणा करने के अधिकार दे देते थे।इस बार ऐसा बिलकुल भी नहीं हुआ। यहां तक कि पूर्व मंत्रियों को नहीं पूछा गया। डेरा बस्सी के विधायक एनके शर्मा ने ही राजपुरा के उम्मीदवार की घोषणा कर डाली। वहीं बठिंडा शहरी हलके से पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद हरसिमरत कौर बादल ने उम्मीदवार की घोषणा कर दी। इस चुनाव में प्रत्याशियों की लिस्ट जारी करने के बारे में किसी के साथ कोई चर्चा नहीं की गई।

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