पंजाब: लखीमपुर खीरी कांड से 'सियासी माइलेज' लेने की तैयारी में SAD, बढ़ाई CM चन्नी की मुश्किलें
विधानसभा चुनाव की तैयारियों में सभी सियासी पार्टियां जुटी हुई हैं। वहीं लखीमपुर खीरी कांड ने विपक्षी पार्टियों को भारतीय जनता पार्टी को घेरने का एक बड़ा मुद्दा दे दिया है।
चंडीगढ़, अक्टूबर 8, 2021। पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों में सभी सियासी पार्टियां जुटी हुई हैं। वहीं लखीमपुर खीरी कांड ने विपक्षी पार्टियों को भारतीय जनता पार्टी को घेरने का एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। सभी राजनीतिक दल लखीमपुर खीरी कांड के ज़रिए ख़ुद की सियासी ज़मीन मज़बूत करने की कोशिश कर रही है। इसी कड़ी में शिरोमणि अकाली दल ने भी इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश की। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने लखीमपुर खीरी कांड में मृतक के परिजनों को दिए गए मुआवज़े को मुद्दा बनाया है। उनका कहना है कि जिस तरह से उत्तर प्रदेश में पीड़ितों को मुआवजे के लिए ऐलान किया गया उसी तर्ज़ पर पंजाब में भी घोषणाएं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब में सभी परिजनों को नौकरी नहीं दी जा रही हैं। 900 के क़रीब पीड़ित परिवारों को भी 50 लाख मुआवज़ा देने के साथ नौकरी भी दी जाए।

सीएम चन्नी की बढ़ी मुश्किलें
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि पंजाब में कपास की फ़सल का भी काफी नुकसान हुआ है। सरकार जल्द से जल्द हुए नुकसान की गिरदावरी करवाए और किसानों को उचित मुआवज़ा दिया जाए। पंजाब में सरकार मुआवज़ा दे नहीं रही है और दूसरे राज्यों में सियासत कर रही है। आपको बता दें कि लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए किसानों के लिए सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने बड़ा एलान किया है। उन्होंने घोषणा की है कि लखीमपुर हादसे में मारे गए किसानों और पत्रकार के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। उन्होंने कहा कि हम मारे गए किसानों के परिवारों के साथ खड़े हैं। पंजाब सरकार की ओर से मैं मारे गए पत्रकार सहित किसानों के परिवारों को 50-50 लाख रुपये देने की घोषणा करता हूं।

तिकुनिया गांव में हुई थी हिंसा
आपको बताते हैं किस तरह से लखीमपुर खीरी में यह हादसा हुआ। दरअसल यह हिंसा तिकुनिया गांव में हुई थी जो कि लखीमपुर ज़िला मुख्यालय से 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हिंसा और आगज़नी में 4 किसान के अलावा 4 अन्य लोगों की मौत हुई। चार अन्य लोगों में दो भाजपा कार्यकर्ता और दो ड्राइवर शामिल थे। वहीं क़रीब 15 लोग भी घायल हुए। हालांकि प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों और प्रशासन के बीच समझौता हो गया है। दरअसल किसानों ने चार मांगें प्रशासन के आगे रखी थीं, जिनमें से कुछ मांगों पर सहमति बनी। इनमें मृतक किसानों के आश्रितों को नौकरी, 8 दिन में आरोपियों की गिरफ़्तारी, मृतक के परिजनों को 45 लाख रुपये और घायलों को 10 लाख रुपये का मुआवज़ा और घटना की न्यायिक जांच पर समझौता हो गया है।

किसान नेताओं ने लगाए आरोप
संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं का आरोप है कि गाड़ियों ने भीड़ को रोंधना शुरू कर दिया, जिसमें चार किसान कुचल कर मर गए और लगभग एक दर्जन लोग घायल हो गए। तमाम वायरल वीडियो में एक-दो किसानों के शव सड़क के किनारे दिख रहे हैं। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि मंत्री के पुत्र आशीष मिश्रा भी उस वक़्त गाड़ी में मौजूद थे और उन्होंने एक किसान को गोली भी मारी। प्रदर्शन में शामिल और हादसे के चश्मदीद संयुक्त मोर्चा के सदस्य ने बताया कि क़रीब ढाई बजे अजय मिश्र का बेटा कुछ गुंडों के साथ आया और अपने झंडे लेकर घूम रहे किसानों पर अपनी गाड़ी चढ़ा दी और गोली भी चलाई। हालांकि अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्र ने इन आरोपों से सिरे से ख़ारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए सबूत भी देंगे।
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