अगर ‘नायक’ सोनू सूद पंजाब में सीएम उम्मीदवार बने तो क्या होगा ?

चंडीगढ़, 08 नवंबर। अगर सोनू सूद मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बन जाएं तो पंजाब की राजनीतिक तस्वीर क्या होगी ? कोरोना काल में उनकी लोकप्रियता जिस बुलंदी पर थी उसको देख किसी नेता और अभिनेता को ईर्ष्या हो सकती है। कुछ लोगों के लिए वे भगवान के बराबर हैं। अब इतने ऊंचे आदर्शों वाला व्यक्ति अगर राजनीति में दाखिल होगा तो जाहिर है अपनी शर्तों पर राजनीति करेगा। उन्होंने वायदा पूरा नहीं करने वाले नेताओं को इस्तीफा देने की नसीहत दे कर, अपनी राजनीति सोच को स्पष्ट कर दिया है।

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क्या आज की मौकापरस्त राजनीति में सोनू सूद फिट हो पाएंगे ? या फिर वे राजनीति में क्रांतिकारी बदलाव कर देंगे? चर्चा है कि कोरोना काल का यह मसीहा पंजाब में आम आदमी पार्टी का सीएम उम्मीदवार हो सकता है। हालांकि अरविंद केजरीवाल यह भी कह चुके हैं कि कोई सिख ही होगा आप का सीएम चेहरा।

लोकप्रियता की बुलंदी पर

लोकप्रियता की बुलंदी पर

अगर सोनू सूद आम आदमी पर्टी का सीएम उम्मीदवार बनते हैं और पार्टी जीत जाती है तो यह पंजाब की राजनीति के लिए ऐतिहासिक पल होगा। नवम्बर 1966 में हरियाणा, पंजाब से कट कर नया राज्य बना था। इसके बाद आज तक पंजाब में सिख समुदाय के नेता ही मुख्यमंत्री बनते रहे हैं। ऐसे में आप के लिए यह जोखिम भरा फैसला भी होगा। पंजाब की राजनीति में क्या केजरीवाल किसी गैरसिख को सीएम प्रोजेक्ट करने की हिम्मत दिखाएंगे ? सवाल तो कई हैं। लेकिन एक बात सोनू सूद को खास बना देती है। वह है उनकी लोकप्रियता। उनकी लोकप्रियता को भाषा और मजहब की दीवार भी नहीं रोक पायी। तेलुगू बोलने वाले तेलंगाना के लोग भी उनके उतने ही मुरीद जितने कि पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार और दूसरे प्रांतों के लोग। तेलंगाना के सिद्दीपेट जिले के डुब्बा टांडा गांव में लोग मंदिर बना कर सोनू सूद की पूजा करते हैं। वे पंजाब के मोगा शहर के रहने वाले हैं। इसलिए पंजाब में भी उनकी अपार लोकप्रियता है। इस लोकप्रियता के कारण ही तत्कालीन मुख्यनंत्री अमरिंदर सिंह ने अप्रैल 2021 में उन्हें कोरोना टीकाकरण के लिए के पंजाब का 'ब्रांड एम्बेसेडर' बनाया था। उन्होंने सोनू सूद को पंजाब के सबसे मशहूर हस्तियों में एक करार दिया था। गैरसिख और सिख, दोनों समुदाय के लोग उन्हें रीयल हीरो मानते हैं। जब जनता की नजर में सोनू रीयल हीरो हैं तो इस परसेप्शन को आम आदमी पार्टी भुना सकती है। 2017 के चुनाव में 20 सीटें जीत कर आप दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। अगर इस बार सोनू जैसे सितारे का नेतृत्व मिल जाए तो कमाल भी हो सकता है। सोनू के आने से आप में बिखराव भी रुक सकता है।

एक्टर जो मसीहा बन गया

एक्टर जो मसीहा बन गया

कोरोना संकट के समय सोनू सूद ने तकलीफ में फंसे लोगों की जिस ईमानदारी से मदद की वह सरकार भी नहीं कर सकी। जुलाई 2020 में लॉकडाउन के दौरान किर्गिस्तान में करीब 1500 छात्र फंस गये थे। सोनू ने उन्हें भारत लाने के लिए चार्टेड प्लेन का इंतजाम किया। इसी तरह मास्को में फंसे करीब एक सौ भारतीय छात्रों को घर लाने के लिए उन्होंने चार्टेड फ्लाइट की सुविधा मुहैया करायी। मुम्बई में फंसे हजारों प्रवासी मजदूरों को घर भेजने के लिए उन्होंने बस, स्पेशल ट्रेनों और हवाई जहाज का किराया दिया। उनकी दानशीलता और परोपकार की अनगिनत सच्ची कहानियां हैं। मई 2020 से अगस्त 2021 के आसपास तक उनकी लोकप्रियता आसमान छू रही थी। कई नेता उनकी मकबूलियत से डरने लगे थे। जब वे महाराष्ट्र में फंसे प्रवासी मजदूरों को घर भेजने में मदद कर रहे थे तो उद्ध्व ठाकरे सरकार को ये बात खटक गयी थी। शिवसेना ने उस समय सोनू सूद को भाजपा का प्यादा कहा था। शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा था, भाजपा सोनू सूद का इस्तेमाल उद्धव सरकार पर हमला करने के लिए कर रही है। उन्होंने कटाक्ष किया था, लॉकडाउन के दौरान अचानक सोनू सूद के नाम से एक महात्मा तैयार हो गया।

क्या है सोनू सूद की राजनीति ?

क्या है सोनू सूद की राजनीति ?

शिवसेना ने तो पहले सोनू पर भाजपाई होने का आरोप लगाया। लेकिन जब उनके खिलाफ इनकम टैक्स की रेड पड़ी तो वह सोनू के समर्थन में आ गयी। तब यह आरोप लगने लगा कि भाजपा ने सोनू सूद को परेशान करने के लिए आयकर का छापा डलवाया है। दो महीना पहले जब आटी रेड पड़ी थी तब सोनू के एक करीबी ने जो बताया था उससे भाजपा पर उंगलियां उठने लगीं थी। उन्होंने कहा था, भाजपा ने सोनू को पद्मश्री देने का प्रस्ताव दिया था लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया था। यानी सोनू ने भाजपा में कोई रुचि नहीं दिखायी। क्या कांग्रेस भी सोनू सूद में रुचि ले रही थी ? अगस्त में एक खबर ने सुर्खियां बटोरी थीं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र कांग्रेस के स्ट्रेट्जी डॉक्यूमेंट में सोनू सूद की चर्चा मुम्बई मेयर पद के भावी उम्मीदवार के रूप में की गयी थी। मुम्बई महानगरपालिका (बीएमसी) का चुनाव 2022 में होना है। कांग्रेस इस चुनाव में मजबूती के साथ उतरना चाहती है। इसलिए उसने सोनू सूद जैसी चर्चित हस्ती को अपने साथ जोड़ना चाहा था। लेकिन सोनू ने इस खबर का खंडन कर दिया था। जब सोनू अमरिंदर सिंह से मिले थे तब उनके और उनकी बहन मालविका सूद सच्चर के कांग्रेस में जाने की चर्चा चली थी।

“राजनीति में कुछ बड़ा करना है”

“राजनीति में कुछ बड़ा करना है”

लेकिन अब सोनू सूद अरविंद केजरीवाल के करीब हैं। उनकी नजर में अरविंद केजरीवाल एक विजनरी नेता हैं। अरविंद केजरीवाल की तरह सोनू सूद ने भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। केजरीवाल सरकार ने छात्रों के मार्गदर्शन के लिए एक योजना शुरू की है जिसका नाम है 'देश का मेंटॉर कार्यक्रम'। सोनू सूद इस कार्यक्रम के ब्रांड एम्बेसेडर हैं। वे शनिवार को पंजाब के मोगा स्थित अपने पैतृक घर पहुंचे। घर आने से एक दिन पहले उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट डाली जिसके बाद पंजाब की सियासत में खलबली मच गयी है। उन्होंने लिखा है, जो नेता अपने चुनाव घोषणापत्र में किये वादे को तय समय में पूरा नहीं कर पाता है उसे इस्तीफा दे देना चाहिए। वायदा पूरा नहीं करने वाले नेता अपने पद पर रहने के योग्य नहीं हैं। राजनीति में जब यह परम्परा शुरू होगी तभी समाज में बदलाव आ सकता है। सोनू के इस इंस्टाग्राम पोस्ट के बाद माना जा रहा है कि वे कुछ बड़ा के इरादे से राजनीति में आने वाले हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि वे पंजाब चुनाव में आप का सीएम चेहरा हो सकते हैं।

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