पंजाब: चुनाव से पहले अकाली-बसपा गठबंधन में पड़ तो नहीं रही दरार, जानिए क्या है पूरा मामला ?
पंजाब विधानसभा चुनाव के दिन जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं वैसे-वैसे सियासी पार्टियों में रूठने मनाने का सिलसिला भी शुरू होते जा रहा है।
चंडीगढ़, अक्टूबर 6, 2021। पंजाब विधानसभा चुनाव के दिन जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं वैसे-वैसे सियासी पार्टियों में रूठने मनाने का सिलसिला भी शुरू होते जा रहा है। पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शिरोमणि अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी ने गठबंधन कर साथ चुनाव लड़ने का ऐलान किया। शिरोमणि अकाली दल के साथ किए गए समझौते के तहत मिली सीटों को लेकर बहुजन समाज पार्टी कार्यकर्ताओं के निशाने पर है। उनकी तरफ़ से सीट आवंटन को लेकर काफ़ी नाराज़गी देखने को मिल रही है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बहुजन समाज पार्टी की तरफ से समझौते के तहत उन सीटों को छोड़ दिया गया है, जिन पर बहुजन समाज पार्टी जीत दर्ज कर सकती थी।

टिकट बंटवारे को लेकर नाराज़गी
बहुजन समाज पार्टी की तरफ़ से टिकट बंटवारे के समझौते को लेकर कार्यकर्ताओं में काफ़ी नाराज़गी है। इसका साफ़ असर देखने को भी मिल रहा है, सीटों के बंटवारे को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं और विरोध भी जताया जा रहा है। पहले आदमपुर, फिर जालंधर स्थित पार्टी कार्यालय और उसके बाद फिल्लौर में बसपा कार्यकर्ताओं की तरफ से बहुजन समाज पार्टी के नेतृत्व का पुरज़ोर विरोध किया जा रहा है। जालंधर पार्टी कार्यालय में प्रदेश प्रभारी रणधीर सिंह बेनीवाल और राज्य अध्यक्ष जसवीर सिंह गढी की मौजूदगी में ही कार्यकर्ताओं ने विरोध करना शुरू कर दिया। हालांकि पार्टी नेतृत्व की तरफ से इस विरोध को दबाने की ही कोशिश की जा रही है। टकसाली बसपाईयों का कहना है कि चाहे हाईकमान कैडर के विरोध को दबाने में लगा हुआ है, लेकिन नतीजे सबके सामने होंगे। उनहोंने कहा कि समझौते के तहत जो सीटें बहुजन समाज पार्टी ने ली हैं उनमें से ज़्यादातर सीटों पर जीत दर्ज कर पाना मुमकिन नहीं है। यह बरसों की मेहनत को खराब करने वाली बात है।

BSP आलाकमान ने की कार्रवाई
बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी आलाकमान को इस मामले पर ध्यान देना चाहिए और उन सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए जिन पर बहुजन समाज पार्टी का आधार है। वहीं अमृतसर नार्थ विधानसभा की अकाली-बसपा गठजोड़ के दौरान बसपा को अलाट सीट दोबारा अकाली दल को आवंटित करने पर भी विवाद गहरा गया है। मामल इतना बढ़ गया कि लिखित शिकायतें बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो तक पहुंच गई हैं। मुद्दे पर विवाद बढ़ता देखकर विवाद को खत्म करने के लिए पार्टी आलाकमान ने सख़्त संज्ञान लिया। बहुजन समाज पार्टी के पंजाब नेतृत्व ने इस मुद्दे को उठाने वाले बसपा के अमृतसर शहरी जिला अध्यक्ष तरसेम सिंह भोला को अध्यक्ष पद से हटा दिया है। उनकी जगह पर ताराचंद भगत को जिला शहरी इकाई की जिम्मेदारी सौंप दी गई।

जिला कार्यकारिणी कमेटियों की नहीं हुई बैठक
तरसेम सिंह भोला ने कहा कि अमृतसर नार्थ की बहुजन समाज पार्टी को मिली सीट को रद्द करके अकाली दल को सौंप दी गई। इसकी जगह दोआबा की एक सीट बहुजन समाज पार्टी को दी गई है। अमृतसर नार्थ सीट पर अकाली दल ने भाजपा से निष्कासित किए और शिरोमणि अकाली दल में शामिल हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी को उम्मीदवार बनाया है। लेकिन इस सीट को शिरोमणि अकाली दल के साथ ट्रांसफर करने के लिए बहुजन समाज पार्टी के संविधान को पूरी तरह से नज़रअंदाज किया गया है। यहां तक के सीट बदलने को लेकर जिला कमेटियों और जिला कार्यकारिणी के साथ कोई भी सलाह मशवरा नहीं किया गया। जबकि नियमों के मुताबिक इस बाबत जिला कमेटियों से प्रस्ताव पारित करवाया जाता है।

'कई सीटों पर BSP का जनाधार नहीं'
तरसेम सिंह भोला ने कहा कि पंजाब में जो 20 सीटें बसपा को अकाली-बसपा समझौता के तहत अलाट की गई है उनमें से बहुत सारी सीटों पर बहुजन समाज पार्टी का जनाधार ही नहीं है। उनहोंने कहा कि जिस सीटों पर बहुजन समाज पार्टी का वोट बैंक था, उन सीटों को शिरोमणि अकाली दल ने बहुजन समाज पार्टी को दी ही नहीं है। बहुजन समाज पार्टी को आवंटित की गई 20 सीटों में से 50 प्रतिशत सीटों पर बहुजन समाज पार्टी का कोई जनाधार नहीं है। तरसेम सिंह भोला ने कहा कि समझौता के की वजह से ये हो सकता है कि जिन सीटों पर अकाली दल के उम्मीदवार खड़े हैं वहां शिरोमणि अकाली दल बसपा की वोट तो हासिल कर लेगा। लेकिन जिन सीटों पर बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार होंगे वहां कभी भी शिरोमणि अकाली दल का वोट बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवारों को नहीं जाएग।

'विचार-विमर्श से लिए गए फ़ैसले'
तरसेम सिंह भोला ने कहा कि जब 20 सीटों का लेन-देन किया गया तो तब भी पंजाब की हाईकमान ने जिला कार्यकारिणी कमेटियों से कोई भी बैठक नहीं की और न ही कोई सुझाव लिया गया। जिस तरह से समझौते के तहत गठजोड़ में सीटें बहुजन समाज पार्टी को अलॉट की गई हैं वहां पर बहुजन समाज पार्टी का वोट बैंक नहीं के बराबर है। उन सीटों पर शिरोमणि अकाली दल भी कमज़ोर है। उन्होंने कहा कि सारा मामला हाईकमान को भेजा जा चुका है। पार्टी प्रमुख मायावती को भी पत्र भेजा जा चुका है। उन्हें इस बाबत संज्ञान लेना चाहिए। वहीं इस मुद्दे पर बहुजन समाज पार्टी के पंजाब अध्यक्ष जसबीर सिंह गढ़ी ने कहा कि सीटों सबंधी सारे फैसले वर्करों की राय से ही हाईकमान ने लिए हैं। आगामी चुनाव में इसके सकारात्मक परिणाम दिखेंगे।
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