जब मुरादाबाद में ससुराल तो प्रियंका गांधी ‘पंजाबन बहू’ कैसे ?
चंडीगढ़, 20 फरवरी। क्या प्रियंका गांधी पंजाबन बहू हैं ? उनकी शादी मुरादाबाद में जन्मे रॉबर्ट बाड्रा के साथ हुई है तो फिर वे पंजाबन बहू कैसे हुई ? नौ दिन पहले पहले प्रियंका गांधी ने मुरादाबाद को ससुराल बताया था और बहू के नाम पर कांग्रेस के लिए वोट मांगा था। लेकिन अब प्रियंका गांधी को पंजाब की बहू बताया गया। क्या वोट के लिए ऐसा किया गया ?

प्रियंका गांधी चार दिन पहले चुनाव प्रचार के लिए पंजाब गयी हुईं थीं। रूपनगर में सभा थी। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी भी उनके साथ थे। इस सभा में चन्नी ने कहा, "ओ भई ! सच्ची पंजाबन हैं प्रियंका गांधी। ये पंजाबियों की बहू हैं।" चन्नी की इस बात पर प्रियंका गांधी ने ताली बजानी शुरू कर दी। गोया वे खुद की पंजाबन वाली बात की तस्दीक कर रही थीं। आखिर प्रियंका गांधी पंजाबन बहू कैसे हैं ?

रॉबर्ट वाड्रा के दादा पाकिस्तानी पंजाब से आये थे
रॉबर्ट बाड्रा के वशंजों का संबंध पाकिस्तानी पंजाब से रहा है। तो क्या सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने प्रियंका गांधी के पाकिस्तानी पंजाब के कनेक्शन की बात की ? रॉबर्ट वाड्रा के दादा हुकुम राय पाकिस्तान के सियालकोट में रहते थे। वे पंजाबी खत्री थे। भारत की आजादी के सात साल बाद हुकुम राय पाकिस्तान से भारत आ गये। उन्होंने पहले बेंगलुरु में ठिकाना बनाया। रोजगार जमा नहीं तो मुरादाबाद आ गये। मुरादाबाद पीतल के नक्काशीदार बर्तनों के लिए सदियों से मशहूर है। कहा जाता है कि शाहजहां के शासनकाल में यहां पीतल की शिल्पकारी को बढ़ावा मिला था। उसके बाद मुरादाबाद पीतल नगरी के नाम से मशहूर हो गया। सियालकोट से आने वाले हुकुम राय ने भी घर- गृहस्थी चलाने के लिए पीतल के बर्तनों का कारोबार शुरू किया। हुकुम राय के पुत्र राजेन्द्र वढेरा (वाड्रा) ने स्कॉटलैंड की मॉरीन मैकडोनॉफ से शादी कर ली। मॉरीन ईसाई धर्म की अनुयायी थीं। राजेन्द्र और मॉरीन को तीन संतान हुईं । दो पुत्र रॉबर्ट, रिचर्ड और बेटी मिशेल। रॉबर्ट वढेरा (वाड्रा) का जन्म मुरादाबाद में हुआ था। 1997 में रॉबर्ट वाड्रा की शादी प्रियंका गांधी से हुई। चूंकि रॉबर्टवाड्रा के दादा पाकिस्तानी पंजाब (सियालकोट) के रहने वाले थे। इसलिए चन्नी ने रॉबर्ट वाड्रा को पंजाबी और प्रियंका गांधी को पंजाब की बहू कह कर जनता से वोट मांगा।

मेरा घर वाला पंजाबी है- प्रियंका गांधी
चन्नी की बात क्या करें ? प्रियंका गांधी ने तीन साल पहले खुद अपने पति रॉबर्ट वाड्रा को पंजाबी बताया था। 2019 के लोकसभा चुनाव के समय प्रियंका गांधी ने बठिंडा की चुनाली सभा में कहा था, मेरा घर वाला पंजाबी है। उन्होंने पंजाबी में दो लाइनें बोल कर स्थानीय जनता से जुड़ने की कोशिश की। लेकिन इसका कोई फायदा नहीं मिला था। बठिंडा लोकसभा सीट पर अकाली दल की हरसिमरत कौर ने कांग्रेस उम्मीदवार को हरा दिया था। राहुल गांधी सितम्बर 2021 में जम्मू-कश्मीर गये थे। वहां उन्होंने कहा था, मैं भी कश्मीरी पंडित हूं। मेरा परिवार भी कश्मीरी पंडित है। हम आपकी मदद करेंगे। 2018 में राजस्थान विधानसभा चुनाव के समय राहुल गांधी प्रसिद्ध पुष्कर मंदिर में पूजा करने गये थे। वहां उन्होंने पुजारी को बताया कि वे कौल (कश्मीरी) ब्राह्मण हैं और उनका गोत्र दत्तात्रेय है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव शुरू होने के पहले प्रियंका गांधी ने खुद बनारस में माथे पर त्रिपुंड तिलक लगा कर सभा की थी। तीन दिन पहले की बात है। संत रविदास जयंती के मौके पर प्रियंका और राहुल गांधी ने बनारस के मंदिर में सामुदायिक रसोई (लंगर) परोसी थी। चुनाव में वोट के लिए कौम और धर्म की पहचान भुनाने से नेता बाज नहीं आते। कांग्रेस खुद को धर्मनिरपेक्ष कहती है। लेकिन वह भी इस होड़ में शामिल है।

पिता का अपमान ! लेकिन पंजाबी पहचान चाहिए ?
प्रियंका गांधी से शादी के पांच साल बाद, 2002 में रॉबर्ट वाड्रा ने अखबार में इश्तेहार दे कर अपने पिता और भाई से संबंध तोड़ लिया था। रॉबर्ट वाड्रा के पिता राजेन्द्र वाड्रा पर आरोप लगा था कि उन्होंने उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी में नौकरी लगवाने के नाम पर पैसे लिये कई लोगों को धोखा दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हंसराज भारद्वाज के पुत्र अरुण भारद्वाज ने जनवरी 2002 में टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार में एक सूचना प्रकाशित करायी गयी थी। इसमें रॉबर्ट वाड्रा के पिता राजेन्द्र वाड्रा, भाई रिचर्ड वाड्रा पर पैसा लेकर नौकरी दिलाने और धोखा देने का आरोप लगाया था। इस सूचना में इस बात का भी उल्लेख था कि राजेन्द्र वाड्रा और रिचर्ड वाड्रा अब भविष्य में रॉबर्ट वाड्रा के नाम का इस्तेमाल नहीं करेंगे। राजेन्द्र वाड्रा और उनके परिवार पर यह भी आरोप लगा था कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री और बड़े अफसरों से अपने काम के लिए सिफारिश की थी। कहा जाता है कि सोनिया गांधी इस बात से नाराज हो गयीं थीं। वे गांधी परिवर के नाम के गलत इस्तेमाल से खफा थीं। इसलिए रॉबर्ट बाड्रा ने खुद को निष्पक्ष दिखाने के लिए अपने पिता और भाई से संबंध तोड़ लिया था। अखबार का यह इश्तेहार, एक पिता के लिए बहुत अपमानजन था। जब पुत्र ही अपने पिता को धोखेबाज कहेगा, तो पिता पर क्या गुजरेगी ? दुर्भाग्य से राजेन्द्र वाड्रा और रिचर्ड वाड्रा अब इस दुनिया में नहीं हैं। इसलिए रॉबर्ट वाड्रा के नाम के गलत इस्तेमाल का अब कोई सवाल नहीं। लेकिन इसके उलट प्रियंका गांधी अपने ससुर की पंजाबी पहचान का चुनावी फायदा उठाने की लगातार कोशिश करती रही हैं। जब रॉबर्ट वाड्रा ने अपने पिता से रिश्ता ही तोड़ लिया तो वे फिर वह उनकी पहचान और विरासत का फायदा कैसे उठा सकते हैं ? लेकिन राजनीति में फायदे के लिए उसूल तोड़ना, कोई नयी बात नहीं।
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