चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले पंजाब के नए डीजीपी बने वीरेश कुमार भवरा
चंड़ीगढ़, 08 जनवरी: यूपीएससी से प्राप्त पैनल के विचार के आधार पर आईपीएस वीरेश कुमार भवरा को पंजाब का नया डीजीपी नियुक्त किया गया है। पंजाब के नए डीजीपी वीके भावरा 1987 बैच के आइपीएस अफसर हैं। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने आज चुनाव आचार संहिता लागू होने से कुछ घंटे पहले ही उनके नाम पर मुहर लगाई। शुक्रवार रात सीएम चन्नी और गृह सचिव के बीच चली मीटिंग में वीके भवरा के नाम पर मुहर लगी।

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संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने चार जनवरी को पंजाब में नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के लिए तीन आईपीएस अधिकारियों के नाम राज्य सरकार को सौंपे थे। तीन नामों में दिनकर गुप्ता, वीके भावरा और प्रबोध कुमार के नाम शामिल थे। इन नामों में मौजूदा डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय का नाम शामिल नहीं था। शुरु से ही वीरेश कुमार भवरा का इस रेस में सबसे आगे चल रहा था। लगभग माना भी जा रहा था कि, वीके भवरा राज्य के नए डीजीपी होंगे।
वीके बावरा 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और इस समय डीजीपी होमगार्ड तैनात हैं। वे विजिलेंस चीफ के तौर पर भी काम कर चुके हैं। यूपीएससी को भेजे गए पैनल में उनका नाम सबसे ऊपर रहा है। वह 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग द्वारा पूरे प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए थे। इस बार भावरा की डीजीपी पद पर नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है, जब राज्य में विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है।
यूपीएससी की ओर दिए गए तीन नामों में से एक दिनकर गुप्ता गृह विभाग को पहले ही पत्र लिखकर बता चुके थे कि वह डीजीपी बनने के इच्छुक नहीं हैं, इसलिए वीके भावरा पहले से ही डीजीपी रेस में सबसे आगे थे। वहीं दूसरी प्रबोध कुमार बेअदबी कांड की जांच में शामिल होने और इस पर कोई कार्रवाई न कर पाने को लेकर वे राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिद्धू के निशाने पर थे। जिसके चलते साफ था कि सरकार उन्हें इस रेस से बाहर कर देगी। यही नहीं दिनकर गुप्ता की तरह प्रबोध कुमार ने भी अपना केंद्रीय डेपुटेशन पर जाने की इच्छा व्यक्त की थी।












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