पंजाब: कांग्रेस को मिल सकता है बसपा के बाग़ियों का साथ, टिकट बंटवारे को लेकर पड़ रही है पार्टी में दरार
पंजाब विधानसभा चुनाव में पहली बार भारतीय जनता पार्टी से अलग होकर शिरोमणि अकाली दल ने बहुजन समाज पार्टी के साथ चुनावी रण में उतरने का फ़ैसला लिया है।
चंडीगढ़, नवम्बर 2, 2021। पंजाब विधानसभा चुनाव में पहली बार भारतीय जनता पार्टी से अलग होकर शिरोमणि अकाली दल ने बहुजन समाज पार्टी के साथ चुनावी रण में उतरने का फ़ैसला लिया है। चुनाव के मद्देनज़र शिरोमणि अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन के साथ चुनाव तो लड़ रही है लेकिन अंदर ही अंदर बहुजन समाज पार्टी के नेता और कार्यकर्ता बसपा सुप्रीमो मायावाती के फ़ैसले से नाराज़ भी चल रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिस क्षेत्र में उन्होंने मेहनत की और जहां बहुजन समाज पार्टी की पकड़ थी वहां की सीट शिरोमणि अकाली दल को दे दी गई है। इस तरह से बहुजन समाज पार्टी विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएगी। इसलिए पार्टी आलाकमान को इस मुद्दे पर फिर से विचार विमर्श करना चाहिए।

बसपा में पड़ सकती है दरार
सूत्रों की मानें तो अगर बहुजन समाज पार्टी ने इस मामले में कोई ठोस क़दम नहीं उठाया तो चुनाव से पहले ही बसपा में दरार पड़ सकती है, कहीं ना कहीं शिअद और बसपा गठबंधन भी कमज़ोर पड़ सकता है। चुनाव से पहले ही बहुजन समाज पार्टी पंजाब में तकरार हो सकती है। शिरोमणि अकाली दल ने 117 विधानसभा सीटों में से बहुजन समाज पार्टी को बीस सीटें दी हैं। पार्टी के वर्करों में चर्चा यह है कि यह वह बीस सीटें बसपा को दी गई हैं जिन पर बसपा का आधार ही नहीं है। जिन सीटों पर बसपा का वोट बैंक अधिक है, वह सीटें अकाली दल की ओर से बसपा को दी ही नहीं गई है।

टिकट बंटवारे को लेकर विरोध
बहुजन समाज पार्टी में टिकट बंटवारे को लेकर विरोध शुरू हो गया है। बहुजन समाज पार्टी को जो बीस सीटें दी गई हैं उनमें से कई सीटों पर बहुजन समाज पार्टी की पकड़ मजबूत नहीं है। इस बाबत बसपा की टकसाली लीडरशिप और टकसाली वर्करों ने सारी रिपोर्ट बसपा सुप्रीमो मायावती को भेजनी शुरू कर दी है। सूत्रों की मानें तो बसपा कार्यकर्ता पंजाब बसपा का गठन करके आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की साथ समझौता कर सकते हैं। उधर सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी ने भी बसपा मे बने विरोधियों के ग्रुप को मजबूत बनाना शुरू कर दिया है ताकि शिरोमणि अकाली दल को मिलने वाले बसपा के वोट बैंक में सेंधमारी की जा सके। क़यास लगाए जा रहे हैं कि बसपा पंजाब के बागी गुट चुनाव से पहले बसपा और शिरोमणि अकाली दल दोनों के लिए चुनौती बन सकते हैं।

कांग्रेस को हो सकता है फ़ायदा
सियासी गलियारों में यह भी चर्चा ज़ोरों पर है कि जिन सीटों पर बसपा के कार्यकर्ता चुनावी प्रचार में लगे हुए थे, वहां शिरोमणि अकाली दल के नेताओं को उम्मीदवार घोषित किए जाने से बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ता नाराज़ होकर घरों में बैठ गए हैं। बसपा के कार्यकर्ताओं ने बताया कि विधानसभा क्षेत्र टांडा, पायल, कपूरथला, अमृतसर सेंट्रल, अमृतसर नार्थ की सीट अकाली दल के साथ बदली जा चुकी है। लुधियाना और पठानकोट की सीटों पर भी अकाली दल के उम्मीदवारों को ही बसपा के उम्मीदवार के रूप में पेश किया जा रहा है। बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। इस वजह से पंजाब में बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ता आगामी विधनासभा चुनाव में बसपा को अलविदा कह कर कांग्रेस का दमान थाम सकते हैं।
ये भी पढ़ें: पंजाब सरकार के लिए सस्ती बिजली देने की घोषणा बन सकती है चुनौती, जानिये क्या है वजह ?












Click it and Unblock the Notifications