कैप्टन के दिल्ली दौरे से बदल जाएगी पंजाब की सियासी फ़िज़ा, जानिए क्या है पूरा मामला
पंजाब कांग्रेस में कलह का दौर जारी है, अभी सिद्धू के अध्यक्ष पद पर बने रहने की संशय बरक़रार ही है लेकिन ख़बर यह भी आ रही है कि आलाकमान के साथ नवजोत सिंह सिद्धू की सहमती बन गई है।
चंडीगढ़, अक्टूबर 7, 2021। पंजाब कांग्रेस में कलह का दौर जारी है, अभी सिद्धू के अध्यक्ष पद पर बने रहने की संशय बरक़रार ही है लेकिन ख़बर यह भी आ रही है कि आलाकमान के साथ नवजोत सिंह सिद्धू की सहमती बन गई है। इसकी आधिकारिक घोषणा जल्द ही हो सकती है। वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह के अगले क़दम पर सब की निगाहें टिकी हुई हैं। कैप्टन अमरिंदर के एक सप्ताह में दूसरी बार दिल्ली दौरे से पंजाब में सियासी माहौल में हलचल पैदा हो गई है। बताया जा रहा है कि इस बार कैप्टन अमरिंदर सिंह प्रधानमंत्री मोदी से मुलाक़ात कर सकते हैं। आपको बता दें कि अपने पिछले दौरे में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाक़ात की थी।

कैप्टन का दिल्ली दौरा
कैप्टन अमरिंदर सिंह के अचानक दिल्ली दौरे से पंजाब की सियासी सरगर्मियां बढ़ चुकी हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह क्या क़दम उठाएंगे इस पर राजनीतिक गलियारों में संशय बना हुआ है। ग़ौरतलब है कि अमरिंदर सिंह एक सप्ताह में दूसरी बार दिल्ली दौरे पर हैं इस बात को लेकर पंजाब की सियासी फ़िज़ा में सुगबुगाहट तेज़ हो गई है। हालांकि उन्होंने कांग्रेस को छोड़ने की बात साफ़ कर दी थी लेकिन भाजपा में शामिल होने या नहीं होने पर कैप्टन ने अपना स्टैंड क्लियर नहीं किया है। आज वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाक़ात कर सकते हैं। इसके कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। हाल ही में उनके उलग पार्टी बनाने की बात सुर्खियों में थी।

संपर्क में कई कांग्रेसी
पंजाब कांग्रेस कैप्टन अमरिंदर सिंह की हर गतिविधियों पर पैनी नज़र रख रही है। क्योंकि पंजाब कांग्रेस के कई दिग्गज नेता उनके संपर्क में हैं। सियासी तजुर्बे की बात कि जाए तो कैप्टन अमरिंदर सिंह 52 साल पंजाब की सियासत को दे चुके हैं। बतौर मुख्यमंत्री उनके पास साढे नौ साल का तजुर्बा रहा है। वह पंजाब कांग्रेस की हर नफ़्ज़ से वाक़िफ़ हैं। उन्होंने कांग्रेस छोड़ने की बात तो कह दी है लेकिन उन्होंने अपने अगले क़दम का पत्ता नहीं खोला है। सियासी सलाहकारों की मानें तो कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के सियासी समीकरणों को नया मोड़ देने के लिए दोबारा दिल्ली दौरे पर गए हैं।

कांग्रेस के कैसे बदले समीकरण
पंजाब कांग्रेस में जो कुछ भी हो रहा है यह अचानक से नहीं हुआ है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के हटाए जाने की क़वायद सिद्धू के कांग्रेस में शामिल होने के साथ ही शुरू हो गई थी । नवजोत सिंह सिद्धू पिछले चुनाव में इसी शर्त पर कांग्रेस में आये थे कि अगली बार पार्टी उन्हें अहम जिम्मेदारी देगी वहीं नवजोत सिंह सिद्धू के कांग्रेस में शामिल होने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने यह बात सार्वजनिक तौर पर कही थी कि यह उनका अंतिम चुनाव है। नवजोत सिंह सिद्धू को कांग्रेस में लाने के लिए पीके टीम ने मेहनत की और आप की तरफ़ जा रहे सिद्धू को कांग्रेस से जोड़ा। नवजोत सिंह सिद्धू को मंत्री तो बनाया गया लेकिन ताल मेल नहीं बन सका। लोकसभा चुनाव में भी सिद्धू की नहीं चली कैप्टन के नेतृत्व में पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन भी किया और यह साबित किया कि पंजाब में कैप्टन के इतना मज़बूत कोई दूसरा नेता नहीं है।

सिद्धू की सियासी चाल
कांग्रेस का प्रदर्शन पूरे देश में ख़राब होने के बाबजूद पंजाब में लोकसभा की 12 सीटों में से 8 सीटों पर कांग्रेस ने क़ब्ज़ा जमाया मिलीं। इसी बीच आम आदमी पार्टी के कई विधायकों ने कांग्रेस का दामन थामा। दोबारा कांग्रेस से उपचुनाव में जीत कर भी आये। इसककी वजह से जहां कांग्रेस की 77 सीटें थी वहीं 80 सीटें हो गईं। इन सारे प्रकरणों में कैप्टन बड़े ही मज़बूत नेता के तौर पर स्थापित हुए। यहां तक माना जाने लगा कि कैप्टन को हटा दिया जाए तो कांग्रेस का पंजाब में कोई अस्तित्व नहीं बचेगा। इसी बीच नवजोत सिंह सिद्धू को मंत्री पद से भी हटा दिया गया। सिद्धू भी हर मौकों पर कैप्टन को घेरने में कोई मौका नहीं गंवाते थे। साथ ही खुद को कैप्टन का उत्तराधिकारी साबित करने की हर कोशिश करते नज़र आते थे। अगर ऐसा नहीं कर पाते तो कैप्टन की कमज़ोरियों को एक विपक्षी नेता के रूप में उठा देते। उदहारण के तौर करतारपुर कॉरीडोर खोलने का पूरा श्रेय भी लिया और जनता के बीच यह मैसेज पहुचाने में भी कामयाब रहे कि यह कार्य इनके द्वारा किया गया है। साथ ही अकाली दल और आम आदमी पार्टी को हर फ्रंट पर कमज़ोर देख ख़ुद बेअदबी के मुद्दे को उठाते रहे।

कैप्टन की सबसे बड़ी भूल
कैप्टन अमरिंदर सिंह की दिल्ली दरबार से दूरी बना कर रखना सबसे बड़ी कमजोरी थी। नवजोत सिंह सिद्धू ने उसका फ़ायदा उठाने के लिए प्लान तैयार किया और हर मौके पर पंजाब की बातों को दिल्ली ले जाते रहे। पंजाब में कैप्टन को न घेर पाने वाले सिद्धू ने कैप्टन को दिल्ली से घेरना शुरू किया इसमें उन्होंने प्रियंका गांधी को अपने पक्ष में किया। चूंकी सिद्धू के ज्वाइनिंग में प्रियंका गांधी की अहम भूमिका रही थी इसलिए प्रियंका गांधी प्रत्यक्ष रूप से सिद्धू की मदद करती रहीं। उधर नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से भी मिलते रहे और अध्यक्ष बनते वक़्त सोनिया गांधी को भी विश्वास में लिया। वहीं कैप्टन का दिल्ली दरबार से संपर्क न के बराबर रहा। इसी सब समीकरणों की वजह से आज पंजाब कांग्रेस में यह सब हालात पैदा हुए हैं।
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