पंजाब की सियासत में धमाकेदार वापसी के लिए कैप्टन तैयार, इस रणनीति से बदल जाएंगे पूरे सियासी समीकरण
पंजाब में विधानसभा चुनाव के दिन क़रीब आ रहे हैं वहीं पंजाब कांग्रेस की दिन पर दिन मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कांग्रेस में जारी सियासी घमासान के बीच यह भी ख़बर है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस को अलविदा कह सकते हैं।
चंडीगढ़, सितंबर 30, 2021। पंजाब में विधानसभा चुनाव के दिन क़रीब आ रहे हैं वहीं पंजाब कांग्रेस की दिन पर दिन मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कांग्रेस में जारी सियासी घमासान के बीच यह भी ख़बर आ रही है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस को अलविदा कह सकते हैं। सियासी गलियारों में यह हलचल है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ग़ैर सियासी संगठन बनाकर पंजाब की पॉलिटिक्स में 2 अक्टूबर को नया दांव खेल सकते हैं। सूत्रों की मानें तो कैप्टन अमरिंदर सिंह का संगठन सालों से चले आ रहे किसान आंदोलन पर पूर्ण वीराम लगा देगा। जिसके बाद पंजाब की सियासत में नए राजनीतिक दल की नींव पड़ेगी जो की कैप्टन के दिशा निर्देश पर काम करेगी। इस तरह कैप्टन किसानों और केंद्र सरकार को भी साथ लेकर मास्टरस्ट्रोक लगाने की कोशिश में हैं।

कैप्टन करेंगे धमाकेदार वापसी
पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव कैप्टन अमरिंदर सिंह धमाकेदार वापसी करने वाले हैं। 'कैप्टन फ़ॉर 2022' का पोस्टर शेयर कर कैप्टन के सलाहकार नरिंदर भांबरी इसका इशारा कर चुके हैं। सीएम पद से इस्तीफ़ा देने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने साफ़ तौर पर कहा था कि फ़ौजी हूं, बेइज़्ज़त होकर मैदान नहीं छोड़ेंगे। ग़ौरतलब है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की है जो पंजाब में नए सियासी समीकरणों की तरफ इशारा कर रही है। वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह ने फिलहाल भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की बात को सिरे से नकार दिया है।
Recommended Video

सियासत का बादशाह बनने की तैयारी
पंजाब में भारतीय जनता पार्टी का दामन थामे बग़ैर कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब की सियासत की बादशाहत कैसे हासिल करेंगे ये एक बड़ा सवाल है।वही राजनीतिक जानकारों कहना है कि कैप्टन अगर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होते हैं तो किसानों में यह ग़लत मैसेज जाएगा कि कैप्टन में अपनी सियासी ज़मीन मज़बूत करने के लिए किसानों का सहारा लिया। वहीं तीन कृषि कानूनों के लेकर केन्द्र सरकार अडिग है, कैप्टन इस फ़िराक में हैं कि किसी तरह वह कृषि क़ानून वापस लेने के लिए केंद्र सरकार को मना लें ताकि किसान उनके समर्थन में आ जाएं। वहीं भारतीय जनता पार्टी ये मैसेज बिलकुल भी नहीं देने चाहती की विधानसभा चुनाव में किसानों की वजह से झुकना पड़ा। क्योंकि ऐसा होने पर वह भाजपा विपक्ष के निशाने पर आ जाएगी। इसलिए कहीं न कहीं भाजपा कैप्टन अमरिंदर सिंह के प्रस्ताव को मान सकती है।

ग़ैर सियासी संगठन बनाने पर विचार
कैप्टन अमरिंदर सिंह औपचारिक रूप से कांग्रेस छोड़ सकते हैं। फिलहाल कैप्टन सियासी संगठन नहीं बनाएंगे। वह ऐसा संगठन चाहते हैं जो नॉन-पॉलिटिकल हो। यह संगठन दिल्ली किसान आंदोलन में शामिल होगा, किसान नेताओं से मिलेगा। यह संगठन किसान आंदोलन में फ्रंट फुट पर नहीं रहेगा, बल्कि केंद्र सरकार से बातचीत में अगुवाई करेगा। इसी बातचीत में कृषि कानून वापस कराने की पूरी भूमिका तय की जाएगी। एक विकल्प यह भी है कि समर्थन मूल्य यानी MSP गारंटी कानून लाया जाए। कैप्टन ने पंजाब में जाट महासभा भी बनाई है, जिसमें कई बड़े किसान भी जुड़े हैं। यह भी कैप्टन का एक विकल्प हो सकता है।

कैप्टन ने किया किसानों का खुला समर्थन
कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए यह काम ज्यादा मुश्किल नहीं होगा क्योंकि कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन पंजाब से ही शुरू हुआ था। कैप्टन ने आंदोलन में किसानों का खुला समर्थन किया। किसानों के दिल्ली तक पहुंचाने में कैप्टन ने अहम किरदार निभाया। हरियाणा में किसानों पर लाठीचार्ज होने पर भी कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को आड़े हाथो लिया था। किसानों की बात नहीं सुनी जा रही थी तो केंद्र सरकार पर भी हमले किए। जब भी किसान नेताओं को जरूरत पड़ी कैप्टन अमरिंदर सिंह उनके साथ डटकर खड़े रहे। अब कैप्टन अमरिंदर सिंह को किसान नेताओं की ज़रूरत है उन्हें किसानों की हमदर्दी मिलनी तय है। क्योंकि किसान नेताओं के साथ कैप्टन के अच्छे संबंध हैं। ग़ौरतलब है कि किसानों ने अपने आंदोलन के दौरान राजनीतिक दलों का बहिष्कार किया था, लेकिन कैप्टन का लड्डू खिलाकर आभार जताया था।

खेतीबाड़ी से जुड़ी है 75% आबादी
पंजाब की आर्थिक स्थिति कृषि पर ही आधारित है, यहा की 75% आबादी खेतीबाड़ी से जुड़ी है। यहां की खेती से न सिर्फ़ बाजार चलता है, बल्कि ज्यादातर इंडस्ट्रीज भी ट्रैक्टर से लेकर खेतीबाड़ी तक का सामान बनाती हैं। 117 सीटों वाली पंजाब विधानसभा में 77 सीटों पर किसानों के वोट बैंक का बहुत बड़ा किरदार है। पंजाब के ज़्यादातर गांव के किसान कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं। कैप्टन के उठाए गए क़दम से अगर कृषि कानून वापस हो गए या संयुक्त किसान मोर्चा की सहमति से कोई हल निकल आए तो कैप्टन पंजाब के सुप्रीम यानी सबसे बड़े लीडर होंगे और पार्टी की बात पीछे छूट जाएगी। आपको बता दें कि साल 2002 और 2017 में कैप्टन के नाम पर ही पंजाब में कांग्रेस सत्ता में आई थी।

'राजनीतिक सफ़र में कई दोस्त बने हैं'
सियासत में मुलाकात के पीछे मुद्दों से कहीं ज्यादा उसमें छिपा संदेश अहम होता है। कांग्रेस ने कैप्टन को CM की कुर्सी से हटा दिया। यानी कांग्रेस ने साफ तौर पर कैप्टन के दौर को खत्म मान लिया, लेकिन BJP ने यहीं से अपना दांव शुरू किया है। कैप्टन CM रहते हुए भी कई बार शाह से मिले, लेकिन बुधवार की मुलाकात कुछ अलग थी। जरा वो बात भी याद कीजिए जब कैप्टन ने कहा कि वे दिल्ली में अपने कुछ दोस्तों से मिलेंगे। मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के बाद भी कैप्टन ने कहा था कि 52 साल के राजनीतिक करियर में कई दोस्त बने हैं। वहीं कैप्टन से नजदीकियां दिखाकर BJP ने कांग्रेस को संदेश दिया कि कैप्टन के अंदर अभी बहुत सियासत बाकी है।

कैप्टन और BJP का समीकरण
कैप्टन अगर किसान आंदोलन का हल करवा गए तो पंजाब में कैप्टन और BJP को एक-दूसरे का साथ मिल सकता है। कृषि कानूनों के मुद्दे पर पिछले साल अकाली दल ने BJP का साथ छोड़ दिया था, लेकिन भाजपा के पास खोने को लिए कुछ भी नहीं है और पाने के लिए बहुत कुछ है। अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह की पहल से किसान आंदोलन खत्म होता है तो भारतीय जनता पार्टी को कैप्टन के साथ से उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड, हरियाणा में भी फ़ायदा पहुंच सकता है क्योंकि इन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी अपना दबदबा बनाए रखना चाहती है।
ये भी पढ़ें: पंजाब कांग्रेस की सियासी ज़मीन मज़बूत करने में जुटे CM और उनके मंत्री, इस तरह तैयार कर रहे रणनीति
-
'इंटीमेट सीन के दौरान उसने पार की थीं सारी हदें', Monalisa का बड़ा बयान, सेट पर मचा था ऐसा हड़कंप -
Rakesh Bedi Caste: धुरंधर में पाकिस्तान को उल्लू बनाने वाले 'Jameel' किस जाति से? ठगी का शिकार हुई पत्नी कौन? -
RBSE Topper: रिजल्ट से 10 दिन पहले थम गईं निकिता की सांसें, 12वीं की मार्कशीट में चमकता रह गया 93.88% -
Leander Paes: तीन अभिनेत्रियों संग रहा लिवइन रिलेशन, बिना शादी के बने पिता, घरेलू हिंसा का लगा था आरोप -
Vaibhav Suryavanshi के पास सात समंदर पार से आया ऑफर! टैलेंट पर फिदा हुआ ये देश, कहा- हमारे लिए खेलो -
LPG Price Today: कुकिंग गैस की दरें ऊंचे स्तर पर, आपके शहर में आज कहां पहुंचा रेट? -
Election Report Card: 5 चुनावी राज्यों में बीजेपी का हिसाब-किताब: कहां बन रही सरकार, कहां बिगड़ रहे समीकरण? -
क्रिकेट जगत में शोक की लहर, IPL 2026 के दौरान होटल के कमरे में मिला शव! BCCI की ड्यूटी ने छीन ली जिंदगी? -
Kal Ka Match Kon Jeeta 30 March: कल का मैच कौन जीता- राजस्थान रॉयल्स vs चेन्नई सुपर किंग्स -
Iran Vs America: अकेला पड़ा अमेरिका? 10 सबसे बड़े सहयोगी ने ट्रंप को दिखाया ठेंगा, कहा- जंग में साथ नहीं देंगे -
तलाक के 6 साल बाद कैसे प्रेग्नेंट हो गईं Poonam Pandey? सरेआम दिखा दीं फोटोज, लोग बोले- कौन है बच्चे का पिता? -
कराची में Sonu Nigam की होने वाली थी मौत? लाइव शो के दौरान हुआ था भयावह हादसा, अब वीडियो में दिखा सच












Click it and Unblock the Notifications