गुरू नानक की ज्योति जोत दिवस पर सीएम भगवंत मान ने अर्पित किए श्रद्धा सुमन
सिखों को पहले गुरू गुरू नानक देव साहब के ज्योति जोत दिवस पर मुख्यमंत्री भवंत मान ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए हैं। बता दें कि श्री गुरुसिंघ सभा गुरुद्वारा भगवानगंज में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।।
बता दें कि गुरु नानक सिख धर्म के संस्थापक हैं। उनका जन्म 1469 में कार्तिक पूर्णिमा के दिन तलवंडी नामक गांव में हुआ था। वह बचपन से ही धर्म और अध्यात्म की ओर आकर्षित थे। गुरू नानक को पारसी, अरबी भाषा का भी ज्ञान था।

बचपन में गुरू नानक चरवाहे का काम करते थे, वह पशुओं को चारते वक्त घंटों ध्यान में लीन रहते थे। एक दिन जब मवेशियों ने पड़ोसियों की फसल बर्बाद कर दी तो गुरू नानक को उनके पिता ने काफी डांटा। लेकिन जब गांव के मुखिया राय बुल्लर फसल को देखने के लिए गए तो फसल बिल्कुल सही सलामत थी। इस चमत्कार को देखकर हर कोई दंग रह गया और उसके बाद से उन्हें संत कहा जाने लगा।
गौर करने वाली बात है कि आश्विन कृष्ण दशमी को गुरू नानक देव जी ज्योति जोत में समा गए थे। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 22 सितंबर को उनकी पुण्यतिथि होती है। लेकिन तिथि के अनुसार गुरू नानक साहब की पुण्यतिथि 9 अक्टूबर को मनाई जाती है।
गुरू नानक जी का जन्म ऐसे समय हुआ था जब देश में कोई भी केंद्रीय संगठित शक्ति नहीं थी। उस वक्त विदेशी आक्रमणकारी भारत को लूट रहे थे। धर्म के नाम पर अंधविश्वास और कर्मकांड़ पर लोगों का कहीं ज्यादा विश्वास था। ऐसे समय जब गुरू नानक साहब ने अपना आध्यात्मिक दर्शन सामने रखा तो वह एक महान दार्शनिक के तौर पर सामने आए।
गुरू नानक साहब महान दार्शनिक, कवि, योगी, धर्म सुधार, समाज सुधार और देशभक्त थे। उनके उपदेशों पर लोग आज भी अमल करते हैं। लोग उनकी धर्म की शिक्षा का प्रचार-प्रसार करने लगे। उन्होंने सामाजिक सद्भाव के को आगे बढ़ाने का काम किया।












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