Election Special: दीनानगर सीट से क्या अरुणा चौधरी लगा पाएंगी हैट्रिक, या लहराएगा दूसरी पार्टी का परचम ?
विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र गुरदासपुर ज़िले का दीनानगर विधानसभा सीट भी सुर्खियों में है।
चंडीगढ़, 9 फरवरी 2022। विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र गुरदासपुर ज़िले का दीनानगर विधानसभा सीट भी सुर्खियों में है। आज हम आपको दीनानगर विधानसभा सीट के सियासी इतिहास और चुनावी समीकरणों के बारे में बताने जा रहे हैं। दीनानगर विधानसभा सीट से चुनावी मैदान मे कांग्रेस की टिकट पर अरुणा चौधरी चुनाव लड़ रही हैं। ग़ौरतलब है कि वह कांग्रेस की टिकट पर लगातार पांचवी बार चुनावी रण में उतरीं हैं। आम आदमी पार्टी की ओर से शमशेर सिंह चुनावी ताल ठोक रहे हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर रेनू कश्यप (पूर्व विधायक प्रिसिपल सीता राम कश्यप की बहू) चुनावी मैदान में हैं। बहुजन समाज पार्टी और शिरोमणि अकाली दल गठबंधन की तरफ़ से कमलजीत चावला उम्मीदवार हैं। संयुक्त समाज मोर्चा की ओर से कुलवंत सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। ग़ौरतलब है कि कुलवंत सिंह को आम आदमी पार्टी ने टिकट नहीं दिया था, जिसके बाद वह किसानों की पार्टी संयुक्त समाज मोर्चा की तरफ़ चुनावी मैदान में उतरे हैं।

दीनानगर विधानसभा सीट का इतिहास
दीनानगर विधानसभा सीट पंजाब के गुरदासपुर जिले की सात विधानसभा सीटों में से एक है। 2017 के विधानसभा चुनाव में 1 लाख 29 हज़ार 294 वोटरों ने मतदातान किया था। इस चुनाव में कांग्रेस की उम्मीदवार अरुणा चौधरी ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार बिशनदास धुप्पड़ को 31 हज़ार 917 मतों से हराया था। यहां के सियासी इतिहास की बात की जाए तो 1967 में हलके का प्रतिनिधित्व अस्तित्व में आया था। आपको बता दें कि इस विधानसभा की सीट पर 12 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिसमें आठ बार कांग्रेस जीत दर्ज कर चुकी है और भारतीय जनता पार्टी चार बार अपना परचम लहरा चुकी है। इस सीट का प्रतिनिधित्व सात बार चौधरी परिवार के हाथों में रहा है।

पहली बार चौधरी जयुमनी चुने गए थे विधायक
विधानसभा हलका दीनानगर से पहली बार कांग्रेस के उम्मीदवार चौधरी जयुमनी विधायक चुने गए थे। आपको बता दें कि जयुनी चौधरी हलके की मौजूदा विधायका अरुणा चौधरी के ससुर थे। भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार सतपाल को उन्होंने 1 हज़ार 155 मतों से हराया था। इसके बाद 1972, 1980, 1985, 1992, 2002, 2012 और 2017 के विधानसभा चुनावों में दीनानगर सीट पर कांग्रेस का क़बज़ा रहा। इस हलके की मौजूदा विधाय अरुणा चौधरी हैं उन्होंने 2002, 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर जीत दर्ज की। 2002 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद 2007 के विधानसभा चुनाव में वह भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रिसिपल सीता राम कश्यप से हार गईं थीं।

कांग्रेस को मिल सकता है फ़ायदा
पंजाब के सियासी जानकारों की मानें तो बेशक कांग्रेस दीनानगर विधानसभा सीट से आठ बार जीत दर्ज कर चुकी है। लेकिन इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच कांटे की टक्कर रही है। इस विधानसभा सीट पर भाजपा ने चार बार जीत दर्ज कर चुकी है लेकिन उस वक्त शिअद-भाजपा गठबंधन के तहत चुनाव लड़ती थी। लेकिन इस बार शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी अलग-अलग चुनावी मैदान में उतरी है। इससे भाजपा के वोटों का ध्रुवीकरण हो सकता है। वहीं आम आदमी के बाग़ी नेता कुलवंत सिंह भी इस विधानसभा सीट से आप उम्मीदवार के ख़िलाफ़ सियासी रण में उतरे हैं। इन सब पहलुओं को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस उम्मीदवार फिर से इस सीट से परचम लहरा सकतीं हैं।
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