कर्नाटक में खुश हो रही कांग्रेस को AAP ने पंजाब में उसके 'गढ़' में ही दिया बड़ा झटका
Jalandhar lok sabha bypoll:आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस छोड़कर आए सुशील कुमार रिंकू को टिकट दे दिया है। वह दलित नेता हैं और कांग्रेस के पूर्व विधायक रहे हैं।

कर्नाटक में चुनाव से पहले के कुछ सर्वेक्षणों से कांग्रेस गदगद है। लेकिन, पंजाब में उसका बचा खुचा किला भी ढहने लगा है। पार्टी को जालंधर में बहुत बड़ा झटका लगा है। यहां की एक सीट से पूर्व विधायक और जनाधार वाले दलित नेता को आम आदमी पार्टी ने जालंधर लोकसभा उपचुनाव में अपना प्रत्याशी बना दिया है। सुशील कुमार रिंकू इसी हफ्ते सत्ताधारी दल में शामिल हुए थे। कांग्रेस वहां पहले ही अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी थी, लेकिन अब वहां की चुनावी फिजा ही बदल गई है।

AAP ने जालंधर सीट से दिया सुशील कुमार रिंकू को टिकट
जैसी की कांग्रेस को आशंका थी, आम आदमी पार्टी ने उसे उसके गढ़ में ही घेरने की चुनावी बिसात बिछा दी है। पार्टी ने जालंधर पश्चिम के पूर्व एमएलए सुशील कुमार रिंकू को जालंधर लोकसभा उपचुनाव के लिए आम आदमी पार्टी का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। लोकप्रिय दलित नेता रिंकू बीते सोमवार को ही कांग्रेस छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे।

सोमवार को ही कांग्रेस छोड़ AAP में शामिल हुए थे दलित नेता
रिंकू के आम आदमी पार्टी में शामिल होने के वक्त पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगवंत मान भी मौजूद थे। अब 10 मई को होने वाले जालंधर लोकसभा उपचुनाव में रिंकू का सामना कांग्रेस की आधिकारिक प्रत्याशी से होना तय हो चुका है। जब कांग्रेस को पक्का यकीन हो गया कि दलित नेता पार्टी छोड़ ही देंगे तो आखिरी समय में उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था।

दिवंगत सांसद संतोख सिंह चौधरी की विधवा हैं कमरजीत
गौरतलब है कि कांग्रेस ने जालंधर लोकसभा उपचुनाव में पहले ही कमरजीत कौर के नाम की घोषणा कर रखी है। लेकिन, जब चुनाव में करीब एक महीने ही बचे हैं, इलाके के एक वरिष्ठ दलित नेता के पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ मैदान में होने से उसका सारा चुनावी गणित ही बिगड़ गया है। कमरजीत कांग्रेस के दिवंगत सांसद संतोख सिंह चौधरी की विधवा हैं।

भारत जोड़ा यात्रा के दौरान हुई थी सांसद की मौत
संतोख चौधरी की मौत राहुल गांधी की भारत जोड़ा यात्रा के दौरान हार्ट अटैक की वजह से हो गई थी। उन्हीं के निधन की वजह से जालंधल सीट पर उपचुनाव करवाए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक रिंकू ने कांग्रेस से जालंधर सीट से टिकट देने को कहा था, लेकिन कांग्रेस हाई कमान ने सहानुभूति लहर की उम्मीद में कमरजीत कौर के नाम पर दांव लगाने का फैसला किया है।

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जालंधर कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा है
जालंधर को परंपरागत तौर पर कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में जब पंजाब में आम आदमी पार्टी की लहर चली थी, तब भी यहां की 9 सीटों में से कांग्रेस को 5 सीटें मिली थीं। सुशील कुमार रिंकू के रास्ते आम आदमी पार्टी का मकसद सिर्फ जालंधर लोकसभा सीट पर कब्जा करना नहीं है, बल्कि उनके जरिए वह प्रदेश के दलित वोट बैंक को और मजबूत करना चाहती है।

काउंसलर से शुरू हुआ रिंकू का सियासी करियर
दलित नेता रिंकू ने अपना राजनीतिक करियर नगर निकाय में एक काउंसलर के तौर पर शुरू किया था। 2017 के चुनाव में जब वह एमएलए चुन लिए गए तो उनकी पत्नी सुनीता रिंकू 2018 में उसी इलाके की काउंसलर बन गईं। पंजाब में आम आदमी पार्टी के लिए जालंधर सीट अब प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुकी है, क्योंकि पिछले साल संगरूर लोकसभा उपचुनाव में उसे झटका लगा था।
कुछ हफ्ते पहले जालंधर छावनी के पूर्व अकाली दल विधायक जगबीर बरार भी आम आदमी पार्टी में शामिल हुए हैं। जालंधर लोकसभा सीट के लिए 10 मई को वोटिंग होगी और 13 मई को नतीजे आएंगे। यहां नामांकन भरने की आखिरी तारीख 20 अप्रैल है।












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