सुकमा में बन रहे हैं ग्रामीणों के पक्के घर, पीएम आवास योजना का मिल रहा है लाभ
छत्तीसगढ़ सरकार के आधिकारिक सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक सुकमा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राहियों के खाते में राशि ट्रांसफर करने में पूरे राज्य में अव्वल है।
माओवादी प्रभावित इलाकों में तस्वीर तेजी से बदल रही है। बस्तर संभाग के जिस क्षेत्र को कभी नक्सलियों का मुख्यालय कहा जाता था,वहां अब शासकीय योजनाओ का लाभ ग्रामीणों को मिलने लगा है। सुकमा जिला जिला प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राहियों के खाते में राशि ट्रांसफर करने में पूरे राज्य में प्रथम स्थान पर है।

छत्तीसगढ़ सरकार के आधिकारिक सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक सुकमा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राहियों के खाते में राशि ट्रांसफर करने में पूरे राज्य में अव्वल है। इसके चलते हितग्राहियों को अपना मकान बनाने में कोई कठिनाई नहीं हो रही है। इसी कड़ी में प्रदेश के दक्षिण में स्थित सुकमा जिले के अंतर्गत जनपद पंचायत कोण्टा के अतिसंवेदनशील ग्राम पंचायत मिसमा में अपने परिवार के साथ हितग्राही ओयम मासे प्रधानमंत्री आवास बनाकर निवास कर रही है।
जनपद पंचायत मुख्यालय से लगभग 60 किमी. दूर व एनएच से 10 किमी दूर स्थित इस गांव में कालान्तर में वामपंथी उग्रवाद विभीषिका में ग्राम की प्रगति भेंट चढ़ गई थी। एक समय ऐसा आया कि भय के कारण यह ग्राम वीरान-सुनसान में परिवर्तन हो गया और ओयम मासे बताती है कि यहाँ निवासरत वनवासी अपना घर, काम, पशु को छोड़कर सुरक्षित स्थान की तलाश में विकासखण्ड मुख्यालय कोण्टा, दोरनापाल एवं अन्य स्थानों में निवास करने लगे। जिससे उनके काम के साथ ही उनके परिवार वालों पर भी प्रतिकुल असर पड़ा।
अपनी मिटटी से दूर होने का दर्द छुपाये विवषता में किसी तरह जीवन जी रहे थे, किन्तु हृदय में अपनी मिटटी अपनी जन्मभूमि में वापस जाने की छटपटाहट थी। शासन द्वारा सुरक्षापूर्ण परिस्थिति तैयार करने के बाद कुछ समय पश्चात अपनी मातृभूमि में फिर से जुड़ने की आशा की किरण दिखाई पड़ने लगी किन्तु पूर्व से आर्थिक और आय सीमित होने के कारण यह एक सपना सा प्रतीत होने लगा।
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ऐसे में पंचायत ग्रामीण विकास विभाग की प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण योजनातर्गत वर्ष 2019-20 में आवास की स्वीकृति प्राप्त हुई, इस योजना के तहत प्राप्त अनुदान राशि एवं स्वयं की राशि को जोड़कर श्रीमती ओयम मासे ने अपने उजड़े हुए आशियानों को फिर से आबाद कर पायी और आज शासन की इस महती योजना का लाभ इनके चेहरे पर खुशी लेकर आई। आज अपने गाँव में सहपरिवार खुशहाल जीवन जी रहे है।
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