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किस नेता के लिये कितना महत्वपूर्ण है बिहार का अखाड़ा?

पटना (मुकुंद सिंह)। बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान के साथ सूबे में सियासी पारा भी तेजी से चढ़ गया है। चुनाव में अपनी जीत पक्की करने को लेकर सभी प्रमुख दलों ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया है। पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार का चुनाव कई मायनों में अलग व खास है। तो चलिये देखते हैं यह राजनीतिक अखाड़ा देश के लिये क्या मायने रखता है।

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लालू यादव का करियर

कल के राजनीतिक दोस्त आज राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं और प्रतिद्वंद्वी दोस्त हैं 2010 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान जहां राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के विरोध में जदयू एवं भाजपा ने एक साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। वहीं, इस बार जदयू ने राजद के साथ हाथ मिला कर भाजपा के विरोध में चुनाव लड़ने का एलान किया है। लंबी दोस्ती के बाद जदयू व भाजपा ने एक-दूसरे से नाता तोड़ लिया है और इस बार दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

अगर इस चुनाव में नीतीश कुमार हैट्र‍िक लगाते हैं, तो उसका बड़ा फायदा लालू यादव को होगा। क्योंकि लालू यादव का खुद का करियर पहले ही खत्म हो चुका है, वे बस नीतीश के भरोसे अपनी रेल चलाना चाहते हैं। [बिहार चुनाव से जुड़ी खबरें]

अमित शाह की शाख दांव पर

बदलते-बिगड़ते इन सियासी रिश्तों के बीच चार प्रमुख नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की शाख दांव पर लगी है। लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में भाजपा को जबरदस्त कामयाबी दिलाने वाले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के लिए बिहार विधानसभा चुनाव बहुत अहम है।

उत्तर प्रदेश में उनके नेतृत्व में भाजपा को मिली शानदार कामयाबी के बाद उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। हालांकि इसके बाद हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा को जबरदस्त हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि उस हार का कारण किरण बेदी थीं, लेकिन फिर भी अमित शाह के लिए बिहार विधानसभा चुनाव प्रतिष्ठा का विषय बना हुआ है।

नीतीश का करियर?

जदयू से अलग होने के पीछे एनडीए की ओर से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाना मुख्य कारण था। इसी से खफा होकर नीतीश कुमार ने भाजपा से अलग होने का मन बनाया था। अब नीतीश कुमार को अहंकारी बताने वाले भाजपा नेताओं ने विस चुनाव में जदयू को पटखनी देकर उन्हें सबक सिखाने का मन बनाया है।

जदयू-राजद के एक साथ आने पर भाजपा ने भी नीतीश की आलोचना में कोई कसर नहीं छोड़ा है। भाजपा ने आरोप लगाते हुए कहा है कि लालू प्रसाद के जंगलराज के विरोध में सूबे की जनता ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया था और आज राजद के साथ मिलकर वे मंगलराज लाने की बात कर रहे हैं। खैर अगर भाजपा अपने मनसूबों में कामयाब नहीं हुई, तो उसके लिये बड़ी विफलता होगी। लेकिन अगर जदयू हारी तो नीतीश का करियर बिहार में खत्म होने की कगार पर जा सकता है।

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