सदन में तनु वेड्स मनु के "पप्पी भईया" बने तेज प्रताप!

पटना (मुकुंद सिंह)। फिल्म तनु वेड्स मनु रिटर्न का वो सीन आपको जरूर याद होगा जब दिल्ली यूनिवर्सिटी में एक लेक्चर में पप्पी भईया को मंच पर आमंत्रित किया जाता है। छात्र बाई-कार्डिया और ट्राई-कार्डिया पर सवाल करते हैं, तो पप्पी भईया का पहला जवाब होता है, "गुड क्वेशन, वेरी गुड क्वेशन...." बस ऐसा ही कुछ हाल हुआ बिहार के स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव का जब सदन में उनसे उन्हीं के विभाग से जुड़े सवाल पूछे गये।

Tej Pratap Ydav Pappi Bhaiya

एक दवा, एक कंपनी, एक डॉक्टर और राजधानी में एक दुकान। और यह दुकान 6 महीने में 42 लाख 14 हजार रुपये की दवाएं बेच देती है।

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प्रो संजय कुमार सिंह ने जब विधान परिषद में यह सवाल उठाया गया तो स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप देखते ही देखते विपक्षी नेताओं ने सवालों की बौछार कर दी और तेज प्रताप पप्पी भईया की तरह सवालों के बीच ढेर हो गये। बस फर्क यह था कि फिल्म में पप्पी भईया ने अपना सीना पकड़ लिया और सदन में तेज प्रताप शांत खड़े रह गये।

खैर यह तो मजाक था अब एक नजर पहलू की गंभीरता पर

सबसे पहला सवाल प्रोफेसर संजय कुमार सिंह ने सवाल उठाया। स्वास्थ मंत्री ने अपने जवाब में सवाल को सही बताते हुए सदन को बताया कि इसकी जांच के लिए आईजीएमएस के निर्देश और संयुक्त निर्देशक की देख रेख में एक जांच कमेटी गठित की गई है, जो एक माह में अपनी रिपोर्ट देगी, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

इसी बीच शोर शराबा शुरू हुआ, सत्ता और विपक्षी सदस्यों की ओर से। इसी दौरान नेता विरोधी दल सुशील कुमार मोदी ने अपने पूरक सवाल के बीच सदन को यह जानकारी दी कि इस मामले की जांच 3ड्रग इंसपेक्टर की एक कमेटी ने स्वास्थ विभाग के अधिकारियों के निर्देश पर की है, जिसकी रिपोर्ट आ गई है। और उसमें मामला सही पाया गया है।

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सुशील मोदी ने सदन में रहस्योद्धाटन करते हुए कहा कि एक दूसरी जांच कमेटी इस मामले की लीपा पोती के लिए सरकार ने घटित की है। उन्होंने सरकार से यह जानना चाहा की एक कमेटी की जांच रिपोर्ट आ गई तो दूसरी जांच कमेटी जांच कराने का क्या औचित्य है?

स्वास्थ मंत्री विरोधी दल के नेता के इस सवाल का कोई जवाब नहीं दे सके।

नेता विपक्ष में 3 ड्रग इंसपेक्टर सच्चिदानंद, संजीव कुमार एवं सुभाष कुमार की जांच रिपोर्ट की कॉपी सदन के पटल पर रखते हुए सदन को बताया कि राजा बाजार स्थित विशाल रेजीडेंसी में तीन कमरे का एक फ्लैट आईजीएमएस के डॉक्टर राजेश कुमार सिंह का है। इसी फ्लैट के एक डॉक्टर की पत्नी रंजना सिंह ने सीएण्डएफ नामक दवा कंपनी के कार्यालय के लिए दे दिया है। रंजना इस कंपनी की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स सदस्य हैं।

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इस दवा कंपनी के द्वारा निर्मित कैंसर की एक दवा है, जिसे आईजीएमएस के डॉक्टर राजेश कुमार सिंह रोगियों को लिखते थे, और पटना के मरियम इंटरप्राइजेज में मिलता था। जून 2014 से 1 जनवरी 2016 तक 4260000 रुपए की दवा बेची गई थी। नेता विरोधी दल ने आरोप लगाया कि सरकार पूरे मामले को रफा दफा करने में जुट गई है।

इसलिए आईजीआईएमएस के डायरेक्टर से इसकी जांच कर आ रही है। इस मामले में सम्मिलित डॉक्टर भी इसी अस्पताल के हैं। ऐसी जांच की निष्पक्षता की गारंटी कौन लेगा?

इस सवाल पर भी तेज मौन रहे और इससे पहले कि स्थिति बिगड़े सभापति अन्य सवालों की ओर आगे बढ़ गए।

इधर सदन से बाहर अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विरोधी दल ने सीधा आरोप लगाया कि इस मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के भतीजे नागेंद्र राय जो अपने आप में चर्चित है, ने एक अधिकारी को फोन पर धमकी दी थी चुप रहने के लिए अन्यथा इसके बाद व अधिकारी चुप हो गया।

फिल्म तनु वेड्स मनु रिटर्न का वो सीन-

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