ये है दुर्लभ स्तनधारी जीव 'पेंगोलिन', इसके फायदे तो पूछिए मत
पटना। दक्षिण एशिया क्षेत्र में पाया जाने वाला सबसे दुर्लभ स्तनधारी जीव 'पेंगोलिन', बिहार के नेपाल सीमावर्ती इलाके के किशनगंज जिले में देखने को मिला। इसे देखने के बाद स्थानीय लोग काफी उत्सुक हो गए क्योंकि यहां के लोगों ने आज तक इस तरह के जानवर नहीं देखा था। हालांकि इसे देखने के बाद अफवाह का भी माहौल रहा। कोई इसे सांप कह रहा था तो कोई इसे आसमान से आया हुआ एक विचित्र जीव। इस जीव की खबर जैसे ही इलाके में फैली, हजारों की संख्या में लोग इसे देखने पहुंच गए।
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फिर बाद में उसकी पहचान दक्षिण एशिया क्षेत्र में पाया जाने वाला पेंगोलिन के रुप में किया गया। इसकी पहचान उजागर होने के बाद लोगों ने इसके बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ने लगी। तो मौके पर पहुंचे वन विभाग की टीम ने उन्हें बताया कि यह बहुत ही फायदेमंद जीव है। इस छोटे से जीव का कीमत आज के बाजार में लगभग 12 लाख रुपए हैं। साथ ही वन विभाग से आई टीम ने इसके बिहार में आने के बारे में यह अनुमान लगाते हुए कहा कि हो ना हो यह बाढ के वजह से नेपाल के रास्ते बिहार मे आ गया है।
जिसके बाद ग्रामीणों ने और वन विभाग की टीम ने इसे पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान के हवाले कर दिया। आपको बताते चलें की पेंगोलिन का मुख्य भोजन कीड़े मकोड़े के साथ-साथ चींटी और दीमक है। इसे देखने में इसकी त्वचा बिल्कुल खजूर के पेड़ के छिलके जैसी है। वही पेंगोलिन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कोई भी खतरा आने से पहले यह बिल्कुल कर सिकुड़कर गेंद के समान हो जाता है। आपको बताते चलें कि यूं तो पेंगोलिन के सात प्रजाति होते है। पर भारत में केवल दो प्रजातियों का पेंगोलिन पाया जाता है।
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तो इसे आइयूसीएन द्वारा संकटापन्न प्रजातियों की सूची में शामिल किया गया है। यह प्रजाति संरक्षित है। यह बंगलादेश, चीन, भारत, म्यांमार, नेपाल, ताइवान, थाइलैंड और वियतनाम में राष्ट्रीय कानूनों से संरक्षित है। तो इसे भारत मे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची एक में रखा गया है। उल्लेखनीय है कि आज से कई वर्ष पहले यह एक बार बिहार के खगड़िया में देखने को मिला था।
इसका उपयोग अधिकतर यौनवर्धक दवा से लेकर नपुंसकता को दूर करने में किया जाता है। जिसके वजह से इसकी कीमत लाखों में है। वहीं जानकारों की अगर मानें तो इसके अंगों की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 10-12 लाख रुपये तक मिलती है लेकिन भारत में इसे 20 हजार रुपये में बेचा जाता है। क्योंकि इसका उपयोग चीन और थाईलैंड जैसे देशों में नपुंसकता दूर करने और यौन पावर बढ़ाने वाली दवाएं बनायी जाती हैं।












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