इस बच्ची का दर्द, तुम क्या जानो नीतीश बाबू!
पटना। यह हेडलाइन एक फिल्म के डॉयलॉग जैसी भले ही लगती है, लेकिन खबर फिल्मी नहीं है। यह कहानी बिहार की एक बच्ची की है, जिसका दर्द अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समझ लें, तो बड़े-बड़े घरों में हर रोज़ शिकार हो रहीं बच्चियों को नया जीवन मिल जाये। खैर चलिये पढ़ते हैं पटना की इस बच्ची की।
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करीब डेढ़ महीने पहले छह हजार रुपए मेहनताना तय कर एक 10 साल की बच्ची को जयनगर के एसडीओ गुलाम मुस्तफा अपने घर पर काम करने ले आये। बच्ची की शक्ल देख एसडीओ साहब के परिवार के चेहरे की मुस्कान कई गुना बढ़ गई, लेकिन बच्ची की मुस्कान मानो उसी दिन से छिन गई। काम दुगना और मेहनताना आधा। जब बच्ची किसी बात की शिकायत करती, तो एसडीओ साहब ही नहीं बल्कि उनकी पत्नी, बेटी और बेटा मिलकर इस फूल जैसी बच्ची की पिटाई कर डालते।
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करीब 47 दिनों तक यातनाएं झेलने के बाद बच्ची घर से भाग निकली और सीधे शास्त्रीनगर थाने पहुंच गई। बच्ची ने शास्त्रीनगर की मछली गली, इंदिरा नगर स्थित मक्का टावर के फ्लैट नंबर 402 के भीतर की कहानी बयां की तो पुलिसवालों की भी आंखें भर आयीं।
सुगौली निवासी इकरामुल हक की बेटी शब्बो खातून ने बताया कि फ्लैट नंबर 402 में एसडीओ की पत्नी शिबू खातून अपने दो बच्चे जैबून निशा और फिरोज के साथ रहती हैं। एसडीओ भी अपने घर आते-जाते रहते हैं। करीब डेढ़ माह पूर्व एसडीओ उसे अपने घर काम कराने लाए थे। उसे छह हजार महीना देना तय हुआ था।
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शास्त्री नगर पुलिस के मुताबिक 10 वर्षीय सब्बू थाने पहुंची उसके शरीर पर चोट के निशान थे। उसकी बेरहमी से पिटाई की गई थी। शास्त्रीनगर थाने के इंस्पेक्टर एसए हाशमी के मुताबिक नबालिग बच्ची ने गुलाम मुस्तफा उनकी पत्नी शिबू खातून बेटी जैबू निसा और बेटा फिरोज पर मारपीट का करने का आरोप लगाया है। उसके बयान के आधार पर पुलिस ने एसडीओ के खिलाफ नाबालिग नौकरानी को प्रसारित करने और मारपीट करने का मामला दर्ज किया है।
पुलिस मक्का टावर गई, लेकिन फ्लैट में तालाबंद कर सभी लोग भाग निकले पुलिस उनकी तलाश कर रही है। पुलिस ने जख्मी नौकरानी का मेडिकल कराया तथा गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।
सवाल- एसडीओ को सजा तो कोर्ट देगी लेकिन मुख्यमंत्री जी से हम केवल एक सवाल कर रहे हैं क्या वे एक मुहिम चला सकते हैं, जिसमें ऐसे बड़े-बड़े घरों की तलाशी ली जाये, जहां छोटे-छोटे बच्चे काम कर रहे हैं। अगर हां, तो शब्बो के लिये इससे बड़ा इंसाफ कुछ नहीं होगा।












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