बिहार में शराबबंदी पर काउंटडाउन शुरू
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे बड़े फैसले 'शराब बंदी' को पूरे बिहार में समर्थन मिल रहा है। यह एक ऐतिहासिक पहल है, जिसका क्रेडिट आधी आबादी यानि महिलाओं को जाता है। इस सराहनीय कदम का काउटडाउन शुरू हो गया है। जी हां पहली अप्रैल से बिहार में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लग जायेगा।
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क्या है शराब बंदी का कानून
गैरकानूनी ढंग से शराब बेचने पर कानून का उल्लंघन करने वाले को मृत्युदंड, आजीवन कारावास, 10 लाख का जुर्माना व सम्पति जब्ती की सजा का प्रावधान है। इतना ही नहीं सार्वजनिक स्थल पर या अनधिकृत स्थान पर शराब पीना भी दंडनीय अपराध माना जायेगा, जिसके लिए 7 से 10 साल का कारावास या 10 लाख रुपए तक का जुर्माना भी हो सकता है।
छा गई मुस्कान
महिलाओं की आवाज़ पर शराबबंदी को लेकर किये वादे को नीतीश कुमार ने सत्ता में फिर से आते ही पूरा किया और इस ऐलान के साथ आधी आवादी के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
सात निश्चय के साथ शराबबंदी के लिये गए निर्णय पर मुख्यमंत्री की गंभीरता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है, कि पार्टी की कार्यसमिति की बैठक हो या सार्वजनिक मंच, वे सभी से इसकी सफलता में सहभागी बनने की अपील कर रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि बिहार की शराबबंदी देश के लिए मॉडल बने, ताकि सीना ठोंककर हर बिहारी कह सके कि देखो हमने कर दिखाया।
अब सभी को मिलकर समाज का मानस बदलना होगा, लेकिन नशे के आदि हो चुके लोगों की बड़ी संख्या को अचानक से नशा के विमुख करना आसान नहीं होगा।
इसके लिए उत्पाद विभाग व पुलिस विभाग को मिलकर काम करना होगा। बिहार से सटे राज्यों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। और तो और सीमावर्ती क्षेत्रों में बहुत ज्यादा। क्योंकि गुजरात में शराबबंदी है, लेकिन अवैध शराब का कारोबार नहीं रुक रहा है। सीमावर्ती इलाकों में शराब का सेवन कई गुना बढ़ गया है।
शराबबंदी को लेकर महिला ब्रिगेड व मुस्तफापुर गांव की महिलाओं ने आंदोलन भी किया। आज वे काफी खुश हैं, लेकिन इस चुनौती को सब को मिलकर पूरा करना होगा।












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